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Rakhaldas Banerjee Jayanti in Hindi 2025: मोहनजोदड़ो के खोजकर्ता…राखालदास बनर्जी कौन थे?

Updated at : 12 Apr 2025 4:45 AM (IST)
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Rakhaldas Banerjee Jayanti in Hindi 2025

Rakhaldas Banerjee Jayanti in Hindi 2025 (Source-Wikipedia)

Rakhaldas Banerjee Jayanti in Hindi 2025: 12 अप्रैल को राखालदास बनर्जी की जयंती मनाई जाती है, जिन्होंने मोहनजोदड़ो की खोज कर भारत के इतिहास में अहम योगदान दिया. वे एक प्रसिद्ध पुरातत्वविद् थे और सिंधु घाटी सभ्यता को दुनिया के सामने लाने वाले पहले भारतीय थे.

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Rakhaldas Banerjee Jayanti in Hindi 2025: राखालदास बंद्योपाध्याय को आर.डी. बनर्जी कहा जाता है. वह भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार और पुरातत्वविद् थे. उनका जन्म 12 अप्रैल 1885 को पश्चिम बंगाल में हुआ था. अब इसी दिन उनकी जयंती मनाई जाती है. राखालदास को मोहनजोदड़ो की खोज के लिए जाना जाता है और उनकी इस उपलब्धि ने सभ्यता को समझने में मदद की. राखालदास की जयंती के अवसर पर इस लेख के माध्यम से मोहनजोदड़ो के खोजकर्ता राखालदास बनर्जी कौन थे? (Rakhaldas Banerjee in Hindi 2025) के बारे में जानेंगे.

राखालदास बनर्जी कौन थे? (Rakhaldas Banerjee in Hindi)

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के एक प्रसिद्ध इतिहासकार और पुरातत्वविद् थे. उनका जन्म 12 अप्रैल 1885 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेहरामपुर में हुआ था. उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. की डिग्री हासिल की और 1910 में भारतीय संग्रहालय, कोलकाता में काम शुरू किया. बाद में वे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से जुड़ गए और 1917 में उन्हें पश्चिमी सर्कल का प्रमुख नियुक्त किया गया.

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सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल मोहनजोदड़ो की खोज

आर.डी. बनर्जी (Rakhaldas Banerjee in Hindi) को सबसे ज्यादा प्रसिद्धि तब मिली जब उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल मोहनजोदड़ो की खोज की. यह खोज भारतीय इतिहास के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, जिसने सभ्यता की जड़ों को और गहराई से समझने में मदद की. वे सिर्फ एक खोजकर्ता ही नहीं थे बल्कि उन्होंने बांग्ला लिपि की उत्पत्ति पर भी गहन अध्ययन किया. 

इतिहास की स्टडी के लिए लिखीं किताबें (Rakhaldas Banerjee Jayanti)

राखालदास की प्रसिद्ध पुस्तक “द ओरिजिन ऑफ द बंगाली स्क्रिप्ट” को कलकत्ता विश्वविद्यालय से जुबली रिसर्च अवार्ड भी मिला था. इसके अलावा उन्होंने छात्रों के लिए दो किताबें- हिस्ट्री ऑफ इंडिया (1924) और ए जूनियर हिस्ट्री ऑफ इंडिया (1928) लिखीं जो आज भी ऐतिहासिक अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. आर.डी. बनर्जी का जीवन एक उदाहरण है कि समर्पण और खोज की भावना से कैसे इतिहास के अनछुए पहलुओं को सामने लाया जा सकता है.

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Shubham

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By Shubham

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