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पूर्वी गढ़ की वह दीवार, जिससे टकराने की हिम्मत चीन भी नहीं करता – भारत की हिमालयी सुरक्षा का अभेद्य कवच!

Updated at : 16 Mar 2025 2:28 PM (IST)
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Chabua Airbase

चबुआ एयरबेस

Chabua Airbase: भारत का वो एयरबेस जिसे पूर्वी गढ़ के नाम से भी जाना जाता है, चीन भी नहीं देखता उस पर नजर जो कभी मित्र देशों की सेनाओं के लिए अहम सेंटर के तौर पर करता था काम, जानिए चबुआ एयरबेस के बारे में.

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Chabua Airbase: असम के डिब्रूगढ़ जिले में स्थित चबुआ एयरबेस भारतीय वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान के रूप में कार्य करता है. इसकी उत्पत्ति द्वितीय विश्व युद्ध से हुई है, जहां यह मित्र देशों की सेनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य करता था. 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद, इसे फिर से संचालन में लाया गया और यह मिग-21 और सुखोई-30 एमकेआई जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों का बेस बन गया. वर्तमान में, चीनी सीमा के पास शिगात्से और अक्साई चिन के पास चीनी सैन्य एयरबेस के बढ़ने से चबुआ एयरबेस का सामरिक महत्व और बढ़ गया है. यह भारत की पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा में महत्वपूर्ण होगा और भविष्य में इसके और भी बढ़ने की संभावना है.

वायुसेना के सबसे पुराने और सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों में से एक

असम के डिब्रूगढ़ जिले में स्थित, चबुआ एयरबेस भारतीय वायुसेना के सबसे पुराने और सबसे महत्वपूर्ण ठिकानों में से एक है. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस एयरबेस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जब इसका इस्तेमाल मित्र देशों की सेनाओं द्वारा विभिन्न अभियानों के लिए किया गया था. आज, यह मुख्य रूप से सुखोई-30 एमकेआई जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों के लिए मुख्य आधार के रूप में कार्य करता है.

सुरक्षा के दृष्टिकोण से, आज चबुआ एयरबेस भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में अत्यधिक संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है. इसका स्थान इसे भारत-चीन सीमा के पास हवाई निगरानी और सुरक्षा अभियानों के लिए आदर्श बनाता है.

Chabua Airbase: पूर्वी भारत का रक्षा गलियारा

चबुआ एयरबेस सहित विभिन्न सैन्य प्रतिष्ठानों का अस्तित्व असम को रक्षा गलियारा स्थापित करने के लिए उपयुक्त बनाता है. रक्षा गलियारे ऐसे निर्दिष्ट क्षेत्र हैं जो रक्षा प्रौद्योगिकियों के विनिर्माण और अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देते हैं. जबकि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में पहले से ही रक्षा उत्पादन केंद्र स्थापित हैं, पूर्वोत्तर में ऐसी समर्पित सुविधाओं का अभाव है.

असम को रक्षा गलियारे में बदलने से घरेलू रक्षा उत्पादन में वृद्धि होगी, भारत की आत्मनिर्भरता में सुधार होगा और आयात पर निर्भरता कम होगी. इसके अतिरिक्त, यह विकास स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा और कई नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा.

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विकास के लाभ (असम में चबुआ एयरबेस, जिसे “पूर्वी गढ़” के नाम से भी जाना जाता है)

  • रणनीतिक स्थान: चीन, म्यांमार और भूटान की सीमाओं से असम की निकटता इसे सैन्य रसद के लिए एक आदर्श केंद्र बनाती है.
  • सैन्य सुविधाओं की उपस्थिति: असम में तेजपुर, चबुआ और जोरहाट सहित महत्वपूर्ण वायु सेना की बड़ी कंपनियां और सैन्य अड्डे हैं.
  • बुनियादी ढांचा: ब्रह्मपुत्र नदी, बेहतर सड़क और रेल नेटवर्क के साथ, क्षेत्र में प्रभावी रक्षा उत्पादन की सुविधा प्रदान करती है.
  • सरकारी समर्थन: ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल रक्षा उत्पादन प्रयासों को बढ़ावा दे रही हैं.
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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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