आने वाले समय में क्या Gen Z भूल जाएंगे लिखना? इस रिसर्च ने किए चौंकाने वाले खुलासे

Gen z (प्रतीकात्मक तस्वीर)
Gen Z Skills: आज का जमाना Gen Z का है. Gen Z में लिखने की आदत कम होती जा रही है. साथ ही लिखने को लेकर इनकी रूचि भी कम होती जा रही है. पहले के समय लोग कागज पर लिखते थे. वहीं आज के समय में मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर पर लिखा जा रहा है.
Gen Z Skills: स्कूल का होमवर्क हो या कॉलेज में प्रोजेक्ट लिखना, हाथों से लिखना हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा है. यह बहुत पुरानी कला है. इतिहास में हाथ से लिखने की कला लगभग 5500 सालों से चली आ रही है. लेकिन बीते कुछ समय से तकनीक और कंप्यूटर की दुनिया में दौर बदल रहा है. कॉलेज से लेकर दफ्तर तक पत्र की जगह अब ई-मेल ने ले ली है. वहीं अन्य कामों के लिए भी पेन पेपर की बजाय कंप्यूटर, पीडीएफ और पीपीटी का सहारा लिया जाने लगा है.
आज का जमाना Gen Z का है. Gen Z में लिखने की आदत कम होती जा रही है. साथ ही लिखने को लेकर इनकी रूचि भी कम होती जा रही है. ऐसा कहना है University of Stavanger, Norway द्वारा जारी एक रिसर्च का. इस रिसर्च में कहा गया कि करीब 40 प्रतिशत Gen Z अब हैंड राइटिंग में सक्षम नहीं है. डिजिटल युग ने हमारी लिखने की आदत पर काफी प्रभाव डाला है.
लिखने और सोचने की क्षमता में आई कमी
पहले के समय लोग कागज पर लिखते थे. वहीं आज के समय में मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर पर लिखा जा रहा है. साथ ही लिखने के लिए कई सारे टूल्स आ गए हैं, जिससे न केवल हाथों से लिखने की क्षमता कम हो रही है बल्कि सोच विचार की गहराई और इमोशनल एक्स्प्रेशन में भी कमी आ रही है.
Gen Z और डिजिटल युग
Gen Z युवा पूरी तरह डिजिटल दुनिया में पले-बढ़े हैं. बचपन से ही इंटरनेट, स्मार्टफोन और वर्चुअल कम्युनिकेशन उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहे हैं. इस माहौल ने हाथ से लिखने की प्रैक्टिस को काफी हद तक कम कर दिया है. आज स्कूलों में भी पढ़ाई और नोट्स का तरीका टाइपिंग और स्क्रीन-बेस्ड हो गया है.
टाइपिंग पर है जोर
जहां पहले सुंदर राइटिंग औस स्पीड पर ध्यान दिया जाता था. वहीं आज के समय में स्कूल प्रोजेक्टस से लेकर सरकारी परीक्षाएं (Sarkari Exams) तक ऑनलाइन और कंप्यूटर बेस्ड मोड में होने लगी है, जिसके कारण लिखने की स्पीड से ज्यादा टाइपिंग की स्पीड पर जोर दिया जाने लगा है.
रिसर्च के चौंकाने वाले नतीजे
University of Stavanger की रिसर्च में सामने आया कि लगभग 40% Gen Z युवाओं को फंक्शनल हैंडराइटिंग में मुश्किल होती है. हस्तलिखित लेखन की कमी से उनकी याददाश्त, फोकस और जानकारी को गहराई से समझने की क्षमता प्रभावित हो रही है. स्कूल, कॉलेज और ऑफिस, हर जगह डिजिटल नोट-टेकिंग को प्राथमिकता मिल रही है. टाइपिंग, ऑटो-करेक्शन और डिजिटल टूल्स की सुविधा के कारण लोग हाथ से लिखने से दूरी बना रहे हैं.
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लेखक के बारे में
By Shambhavi Shivani
शाम्भवी शिवानी पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया के साथ जुड़ी हुई हैं. उन्होंने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्था के साथ काम किया है. अभी प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़कर एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शाम्भवी यहां एग्जाम, नौकरी, सक्सेस स्टोरी की खबरें देखती हैं. इसके अलावा वे सिनेमा और साहित्य में भी रुचि रखती हैं.
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