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Educate Girls: घर-घर जाकर 20 लाख बेटियों को स्कूल भेजा, भारत की इस संस्था ने जीता रेमन मैग्सेसे; पढ़िए पूरी कहानी

Updated at : 10 Nov 2025 12:20 AM (IST)
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Educate Girls: घर-घर जाकर 20 लाख बेटियों को स्कूल भेजा, भारत की इस संस्था ने जीता रेमन मैग्सेसे; पढ़िए पूरी कहानी

Educate Girls: भारत की गैर-लाभकारी संस्था एजुकेट गर्ल्स को प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान लाखों बालिकाओं की शिक्षा में क्रांति लाने और सामुदायिक सहयोग से इसे जन-आंदोलन बनाने के लिए दिया गया है. संस्था ने यह पुरस्कार अपने 55 हजार टीम बालिका वॉलंटियर्स को समर्पित किया है.

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Educate Girls:
भारत की गैर-लाभकारी संस्था एजुकेट गर्ल्स को एशिया के नोबेल माने जाने वाले प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार (Ramon Magsaysay Award) 2025 से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान भारत की लाखों वंचित बालिकाओं की शिक्षा और उनके जीवन में असाधारण परिवर्तन लाने के लिए दिया गया है. एजुकेट गर्ल्स यह पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय संस्था बनकर देश के लिए गौरव लाई है. इसी माह सात नवंबर को मनीला में आयोजित भव्य समारोह में संस्था ने यह सम्मान अपने 55 हजार से अधिक टीम बालिका वॉलंटियर्स को समर्पित किया. ये वॉलंटियर्स अक्सर खुद संघर्षरत परिवारों से आते हैं. लेकिन, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार के 30 हजार से अधिक गांवों में शिक्षा की अलख जगा रहे हैं, ताकि कोई भी लड़की निरक्षर न रहे.

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वॉलंटियर्स ने संस्था से 20 लाख से अधिक बच्चियों को जोड़ा

साल 2007 में स्थापित एजुकेट गर्ल्स ने गरीबी और निरक्षरता के दुष्चक्र को तोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर अच्छा काम किया है. संस्था ने अब तक 55 हजार से अधिक सामुदायिक स्वयंसेवकों और युवा सलाहकारों के सहयोग से 20 लाख से अधिक बालिकाओं को स्कूल में दाखिला दिलाया है. यह दर्शाता है कि स्थानीय समुदाय की भागीदारी से शिक्षा को जन-आंदोलन बनाया जा सकता है.रेमन मैग्सेसे पुरस्कार संस्था ने एजुकेट गर्ल्स को विशेष रूप से सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने, निरक्षरता की बेड़ियों से मुक्त करने और लड़कियों में कौशल, साहस एवं आत्मनिर्भरता की भावना जगाने के लिए सम्मानित किया. यह संस्था केंद्र और राज्य सरकारों की शिक्षा नीतियों के साथ तालमेल बिठाकर काम करती है.

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देर रात पढ़ाई करने वाली बेटियों के नाम किया समर्पित

पुरस्कार ग्रहण करते हुए संस्थापिका सफीना हुसैन ने कहा कि यह पुरस्कार उन बालिकाओं के नाम है जो अपने साहस, हिम्मत और दृढ़ निश्चय से हमें हर दिन प्रेरित करती हैं. वे बेटियां जो घर के कामकाज के बीच देर रात तक पढ़ाई करती हैं ताकि स्वयं और अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य बना सकें. उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन अभिभावकों, शिक्षकों और 55 हजार टीम बालिका वॉलंटियर्स को समर्पित है जो उनकी ढाल बनकर खड़े हैं. सीइओ गायत्री नायर लोबो ने इसे सामूहिक शक्ति का प्रमाण बताया और कहा कि जब समुदाय, सरकारें और सभी हितधारक एक साथ आते हैं, तो शिक्षा के क्षेत्र में असंभव को भी संभव किया जा सकता है.

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अब एक करोड़ शिक्षार्थियों तक पहुंचने का लक्ष्य

सम्मान प्राप्त करने के बाद एजुकेट गर्ल्स ने अपने अगले लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाया है. संस्था का लक्ष्य वर्ष 2035 तक एक करोड़ (10 मिलियन) शिक्षार्थियों तक अपनी पहुंच बनाना है.सीइओ ने कहा कि लाखों लड़कियां अभी भी सीखने के अवसर की प्रतीक्षा कर रही हैं और संस्था नहीं चाहती कि उन्हें अब और इंतजार करना पड़े. संस्था के लिए यह समारोह भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि पहली बार अंतर्राष्ट्रीय उड़ान भरने वाले टीम बालिका स्वयंसेवक और शिक्षार्थी भी इस समारोह में शामिल होने मनीला पहुंचे.

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हिमांशु देव

लेखक के बारे में

By हिमांशु देव

सितंबर 2023 से पटना में प्रभात खबर से जुड़कर प्रिंट और डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. कला, साहित्य-संस्कृति, नगर निगम और स्मार्ट सिटी से जुड़ी खबरों पर प्रमुखता से काम किया है. महिला, युवा और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाना प्राथमिकता में शामिल है. व्यक्तिगत तौर पर किताबें पढ़ना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना अच्छा लगता है.

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