UPSC क्रैक करना ही काफी नहीं, LBSNAA में भी लगते हैं बैक, 213 IAS हुए फेल

Published by : Shambhavi Shivani Updated At : 17 May 2026 12:15 PM

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सांकेतिक तस्वीर

IAS Officer Trainees: LBSNAA की ट्रेनिंग में केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होती है. इसमें कई एंगल पर कैंडिडेट्स का रिव्यू किया जाता है. एक रिपोर्ट के अनुसार, LBSNAA में हुई एक परीक्षा में करीब 213 ट्रेनी IAS असफल हो गए.

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IAS Officer Trainees: अक्सर लोग सोचते हैं कि यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद सारी कठिनाइयां कम हो जाती हैं. लेकिन ऐसा नहीं है. मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में IAS की सिर्फ ट्रेनिंग नहीं होती है बल्कि एग्जाम भी होता है. हाल ही में आए एक खबर के अनुसार, 213 IAS ट्रेनी को फिर से ये परीक्षा देनी पड़ी. अब ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर देश की सबसे कठिन परीक्षा पास करने वाले IAS एक ट्रेनिंग अकैडमी की परीक्षा में कैसे असफल हो गए.

TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक जनवरी 2020 से एक जनवरी 2026 के बीच अकैडमी में कुल 1079 IAS ट्रेनी ने ट्रेनिंग ली है. इनमें से 213 स्टूडेंट्स परीक्षा में पास नहीं कर पाए. ये कैंडिडेट विभिन्न मूल्यांकन और परीक्षा में पास होने के लायक मार्क्स हासिल नहीं कर पाए. ऐसे में इन सभी कैंडिडेट् को री-एग्जाम देना पड़ा.

LBSNAA की ट्रेनिंग में क्या-क्या होता है?

LBSNAA की ट्रेनिंग में केवल किताबी ज्ञान का परीक्षण नहीं होता है बल्कि प्रशासनिक निर्णय क्षमता, फील्ड ट्रेनिंग, कानून, अर्थव्यवस्था, शारीरिक दक्षता और संकट प्रबंधन आदि कई स्तर पर मूल्यांकन किया जाता है.

AGMUT कैडर से सबसे ज्यादा ट्रेनी

इस रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा री-अपीयर करने वाले ट्रेनी IAS AGMUT (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर से रहे, जहां 21 प्रशिक्षुओं ने दोबारा परीक्षा दी.

कैडररी-अपीयर करने वाले IAS ट्रेनी
AGMUT कैडर21
तमिलनाडु18
उत्तर प्रदेश16
बिहार15
पश्चिम बंगाल15
मध्य प्रदेश14
ओडिशा13
महाराष्ट्र12
गुजरात11

इस लिस्ट में तमिलनाडु कैडर और उत्तर प्रदेश कैडर आता है. बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र और गुजरात कैडर भी शामिल है. हालांकि, UPSC ने ये साफ किया है कि किसी भी रिव्यू के दौरान नकल जैसी चीजें देखने को नहीं मिली.

सीनियर IAS ने बताया क्यों फेल होते हैं LBSNAA में ट्रेनी अधिकारी

एक वरिष्ठ Chief Development Officer (CDO), जो स्वयं IAS अधिकारी हैं, ने कहा कि LBSNAA में IAS अधिकारियों की ट्रेनिंग बहुत कठिन होती है. इसमें सिर्फ किताबी ज्ञान नहींं देखा जाता है बल्कि फील्ड एक्सपोजर, जिला प्रशिक्षण, शारीरिक फिटनेस, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, कानून कई आधार पर मूल्यांकन किया जाता है. उन्होंने आगे कहा कि ट्रेनी IAS का दोबारा परीक्षा में शामिल होना हमेशा नेगेटिव नहीं होता.

LBSNAA का IAS ट्रेनिंग प्रोग्राम दो साल का इंडक्शन प्रोसेस होता है, जिसका उद्देश्य सिविल सेवा अधिकारियों को फील्ड-रेडी एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में तैयार करना है. इसमें अकादमिक पढ़ाई के साथ-साथ प्रैक्टिकल गवर्नेंस ट्रेनिंग और ग्राउंड लेवल अनुभव भी शामिल होता है.

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Shambhavi Shivani

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By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.

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