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ODF घोषित धनबाद का सच, शौचालय के नाम पर 47 लाख निकाले, बनाया 20 लाख का

Updated at : 22 Jul 2019 10:15 PM (IST)
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ODF घोषित धनबाद का सच, शौचालय के नाम पर 47 लाख निकाले, बनाया 20 लाख का

– 225 शौचालय का 27 लाख रुपये का हो गया वारा न्यारा – बाघमारा के कंचनपुर में आज भी खुले में शौच को मजबूर हैं लोग संजीव झा, धनबाद बनाना था 392 शौचालय. इसके लिए सरकारी खाता से राशि की निकासी भी हो गयी. लेकिन, बना केवल 167. वह भी आधे-अधूरे ढंग से. शेष 225 […]

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– 225 शौचालय का 27 लाख रुपये का हो गया वारा न्यारा

– बाघमारा के कंचनपुर में आज भी खुले में शौच को मजबूर हैं लोग

संजीव झा, धनबाद

बनाना था 392 शौचालय. इसके लिए सरकारी खाता से राशि की निकासी भी हो गयी. लेकिन, बना केवल 167. वह भी आधे-अधूरे ढंग से. शेष 225 शौचालय के 27 लाख रुपये का वारा न्यारा हो गया. इसके चलते आज भी सैकड़ों महिला, पुरुष खुले में शौच जाने को मजबूर हैं. इसे देखने वाला कोई नहीं है.

कागज पर ओडीएफ, हकीकत में मैदान ही सहारा

धनबाद जिला दो अक्तूबर 2018 को खुले में शौच से पूरी तरह मुक्त (ओडीएफ) घोषित हो चुका है. यहां गांव से लेकर शहर तक में खुले में शौच करने वालों पर जुर्माना का प्रावधान लागू है. लेकिन, आज भी शहर से लेकर गांव में हजारों परिवार रोज खुले में शौच करते हैं. आज भी सरकारी महकमे द्वारा शौचालय निर्माण कराया जा रहा है. यही सरकारी दावों का पोल भी खोलता है. अगर पूरा धनबाद ओडीएफ हो चुका है. तब फिर क्यों नगर निगम से लेकर प्रखंडों में शौचालय निर्माण अभियान चल रहा है. शौचालय निर्माण के नाम पर मची लूट खसोट पर पूरा तंत्र क्यों चुप है.

कंचनपुर में शौचालय के नाम पर मची है लूट

अविभाजित बिहार में बाघमारा को गांधी प्रखंड घोषित किया गया था. इस गांधी प्रखंड के कंचनपुर पंचायत में 392 शौचालय निर्माण के लिए 47 लाख चार हजार रुपये की निकासी हुई. लेकिन, ऑनलाइन रिपोर्ट के अनुसार 167 शौचालय का निर्माण ही पूरा हुआ है. शेष 225 शौचालय का अता-पता नहीं. खुद कंचनपुर के मुखिया सीताराम भुइंया भी मानते हैं कि तीन सौ के आस-पास शौचालय निर्माण का काम पूरा हुआ है. शेष का काम एक-दो दिनों में शुरू हो जायेगा. क्षेत्र के लोगों के अनुसार जो शौचालय बने हैं उनकी भी गुणवत्ता सही नहीं है. सही ढंग से निर्माण नहीं कराया गया है.

एक वर्ष पहले मापी हुई, ईंट तक नहीं गिरा

कंचनपुर पंचायत के रामपुर राजस्व गांव में डाक घर के पास दो दर्जन से अधिक घरों में एक भी शौचालय नहीं है. इस गांव के लोग आज भी बाहर ही शौच करने जाते हैं. इसी पंचायत के दुखीडीह, बांस कपूरिया गांवों में भी कई घरों में शौचालय नहीं बन पाया है. कई स्थानों पर तो मापी के बाद भी न तो लाभुक को राशि दी गयी और न ही निर्माण के लिए एक ईंट तक गिरायी गयी.

पंचायत सेवक, जेई पर लग चुका है जुर्माना

पिछले वित्तीय वर्ष यहां सामाजिक अंकेक्षण के दौरान यहां शौचालय निर्माण सहित अन्य योजनाओं में गड़बड़ी को लेकर कनीय अभियंता, पंचायत सेवक पर जुर्माना लग चुका है. पंचायत सेवक पर तो 37 हजार रुपये का जुर्माना लगा था.

क्या कहते हैं लाभुक

पुतुल राय का कहना है कि एक वर्ष पहले कुछ लोग आये थे. बोले कि सरकार के तरफ से शौचालय मिलेगा. जमीन की मापी भी किया. लेकिन, उसके बाद कोई नहीं आया. क्या हुआ, पता नहीं. मेरी उम्र ऐसी नहीं कि मैं सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगा सकूं.

पारू लता राय का कहना है कि शौचालय के लिए एक बार मुखिया से बात हुई थी. बोले थे कि जल्द ही बन जायेगा. कहीं जाने की जरूरत नहीं है. एक दिन घर पर दो-तीन लोग आये भी थे. शौचालय के लिए जगह भी देख कर गये थे. फिर कोई नहीं आया. आज भी शौच के लिए बाहर जाती हूं.

शकुंतला राय कहती हैं कि शौचालय नहीं रहने के कारण पीछे खेत में शौच के लिए जाना पड़ता है. शाम होने का इंतजार करते हैं. या फिर अहले सुबह महिलाओं को जाना पड़ता है. बरसात के मौसम में काफी परेशानी होती है.

ग्रामीण उत्तम राय शौचालय के लिए मुखिया से मिले थे. बोले थे कि बनवा देंगे. हम लोगों ने कहा था कि शौचालय निर्माण के लिए सरकार से मिलने वाली 12 हजार रुपये में से जो राशि देनी है, दे दीजिए. बाकी हम लोग अपना मिला कर बनवा लेंगे. लेकिन कुछ नहीं हुआ. निजी कंपनी में काम करते हैं. रोज-रोज सरकारी दफ्तर का चक्कर लगाना संभव नहीं है.

सोनाली राय ने कहा कि सरकार का खुले में शौच से मुक्त करने की घोषणा यहां हवा-हवाई है. आज भी इस पंचायत में दर्जनों लोग खुले में शौच जा रहे हैं. इसकी जानकारी सबको है. कई बार प्रखंड से भी कई कर्मी आये. पूछताछ किये और चले गये. कोई सुनने वाला नहीं है. रोज खुले में शौच जा रहे हैं. सांप-बिच्छू का डर बना रहता है.

विक्की सरकार ने कहा कि सरकारी योजना के तहत शौचालय बनाने के लिए पंचायत सेवक, मुखिया से मिले थे. आश्वासन मिला था कि बन जायेगा. हम लोग खुद से भी शौचालय बनाने को तैयार हैं. सरकार की तरफ से कोई मदद मिले तब ना. यहां गरीबों की बातें सुनने को कोई तैयार नहीं है.

क्‍या कहना है जनप्रतिनिधि और अधिकारी का

कंचनपुर की मुखिया सीतारमा भुईयां का कहना है कि शौचालय निर्माण का काम पूरा नहीं हो पाया है. जो लोग छूट गये हैं उन्हें जल्द शौचालय दिलवा देंगे. 392 में से तीन सौ का काम लगभग पूर्ण है. गबन की बात गलत है. लाभुकों का चयन आम सभा से होता है. कुछ लोग बदनाम करने के लिए अनर्गल आरोप लगा रहे हैं.

बाघमारा के प्रखंड विकास पदाधिकारी रिंकू कुमारी का कहना है कि शौचालय निर्माण में गड़बड़ी की सूचना नहीं थी. कंचनपुर पंचायत में शौचालय नहीं बनने तथा लोगों के खुले में शौच जाने की जांच होगी. अगर किन्हीं को राशि नहीं मिली है, तो उन्हें यह मुहैया करायी जायेगी. जांच में दोषी पाये जाने वालों पर कार्रवाई होगी.

प्रखंड 20सूत्री समिति के उपाध्‍यक्ष गुरमीत सिंह ने कहा कि कंचनपुर पंचायत में शौचालय निर्माण में भारी गड़बड़ी हुई है. पहले भी इसे प्रखंड स्तर पर उठाया गया था. दोषियों पर अविलंब प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए. इस मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठायेंगे.

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