Sawan 2020 : वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा की हुई पूजा अर्चना, जानिए विधि विधान से कैसे होती है आराधना

Updated at : 22 Jul 2020 3:41 PM (IST)
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Sawan 2020 : वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बाबा की हुई पूजा अर्चना, जानिए विधि विधान से कैसे होती है आराधना

Sawan 2020 : श्रावण मास के 17वें दिन शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि बुधवार को सुबह 4:30 बजे बाबा मंदिर का पट खुला. पुजारी सुशील झा एवं मंदिर दरोगा उदया नंद झा बाबा बैद्यनाथ की सरकारी पूजा करने के लिए मंदिर गर्भ गृह प्रवेश किये. पुजारी की ओर से मंगलवार रात्रि में हुए बाबा के शृंगार पूजा की सामग्रियों को हटायी गयी. शिवलिंग को अच्छी तरह से साफ किया. उन्हें मखमल के कपड़े से पोछा गया. इसके बाद मंदिर पुजारी सुशील झा ने सर्वप्रथम वैदिक मंत्रोचार के साथ बाबा को एक लोटा कांचा जल चढ़ाया. इसके साथ ही कांचा पूजा शुरू हो गयी.

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Sawan 2020 : देवघर : श्रावण मास के 17वें दिन शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि बुधवार को सुबह 4:30 बजे बाबा मंदिर का पट खुला. पुजारी सुशील झा एवं मंदिर दरोगा उदया नंद झा बाबा बैद्यनाथ की सरकारी पूजा करने के लिए मंदिर गर्भ गृह प्रवेश किये. पुजारी की ओर से मंगलवार रात्रि में हुए बाबा के शृंगार पूजा की सामग्रियों को हटायी गयी. शिवलिंग को अच्छी तरह से साफ किया. उन्हें मखमल के कपड़े से पोछा गया. इसके बाद मंदिर पुजारी सुशील झा ने सर्वप्रथम वैदिक मंत्रोचार के साथ बाबा को एक लोटा कांचा जल चढ़ाया. इसके साथ ही कांचा पूजा शुरू हो गयी.

मंदिर प्रशासनिक भवन से तीर्थ पुरोहितों को मंदिर गर्भगृह में प्रवेश कराया गया. सभी तीर्थ पुरोहितों ने बाबा पर कांचा जल चढ़ाया. इस दौरान जय शिव की जयकारा से मंदिर गर्भगृह सहित पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा. इसके बाद बाबा की सरकारी पूजा शुरू हुई. मंदिर पुजारी सुशील झा ने फूल, विल्व पत्र, फल, इत्र, चंदन, मधु, घी, दूध, शक्कर, धोती, जनेऊ आदि से बाबा की पूजा अर्चना की गयी. इसके बाद बाबा मंदिर का पट खोल दिया गया. इसमें सीमित संख्या में तीर्थ पुरोहितों को बाबा पर जल अर्पण की सुविधा मुहैया करायी गयी.

सरकारी पूजा के उपरांत महिला तीर्थ पुरोहित गुदड़ी देवी ने मंदिर इस्टेट की ओर से मंदिर परिसर स्थित मां अन्नपूर्णा, मां काली, मां पार्वती आदि सभी देवी शक्ति मंदिरों में माता को जल से स्नान करा कर सिंदूर चढ़ायी. सुबह 6:30 बजे मंदिर का पट बंद कर दिया गया.

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गत वर्ष श्रावणी मेला के 17वें दिन भीड़ अपने चरम पर थी. भक्तों की लंबी कतार लगी हुई थी, लेकिन इस बार वैश्विक महामारी कोविड 19 के संक्रमण ने सब कुछ बदल दिया है. संक्रमण से भक्तों को बचाने के लिए बाबा मंदिर में लॉकडाउन लगा दिया गया है. यहां तक की बाहरी भक्तों के साथ- साथ तीर्थ- पुरोहित परिवार की महिला एवं बच्चों को भी पूजा करने पर रोक लगा दी गयी है.

बाबा मंदिर सहित आसपास के क्षेत्रों में भक्तों को रोकने के लिए पुलिस गश्ती कर रही है. शहर के मुख्य प्रवेश रोड से मिलने वाली सभी सड़कों पर पुलिस की नजर है. सभी रोड में चेक पोस्ट बना कर पुलिस तैनात कर दी गयी है. शहर में प्रवेश करने वाली गाड़ियों से परमिट मांगी जा रही है. अनुमति आदेश दिखाने के बाद ही शहर में प्रवेश की अनुमति दी जा रही है.

गत वर्ष शुक्ल पक्ष द्वितीया को विलियम्स टाउन बीएड कॉलेज परिसर से लेकर मंदिर परिसर तक भक्तों से पटा हुआ था. हर तरफ गेरुआ वस्त्रधारी शिवभक्त कांवरिया ही दिख रहे थे. भक्तों के स्वागत में तिवारी चौक, मत्स्य विभाग, पंडित शिवराम झा चौक तक एक दर्जन से अधिक सेवा शिविर लगे हुए थे. हर शिविर में सेवा करने वालों की भीड़ लगी हुई थी.

बाबा पर जल अर्पण करने जा रहे भक्तों को फल, चाय, नींबू पानी दी जा रही थी. सभी भक्तों को फुटओवर ब्रिज से मंदिर गर्भगृह प्रवेश कराया जा रहा था. कोई कांवरिया नहीं है. भक्तों को रोकने के लिए महिला एवं पुरुष पुलिस लगी हुई है. तीर्थ पुरोहित भी मंदिर परिसर में नहीं दिखते हैं. सुबह से शाम तक मंदिर परिसर खाली खाली रहता है.

Posted By : Samir ranjan.

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