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गणतंत्र दिवस 2024 : भारतीय सेना का परचम लहरा रही हैं ये 5 पॉपुलर कारें

Updated at : 26 Jan 2024 2:40 PM (IST)
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गणतंत्र दिवस 2024 : भारतीय सेना का परचम लहरा रही हैं ये 5 पॉपुलर कारें

हिंदुस्तान एंबेसडर को भारत में सबसे पॉपुलर कारों में से एक है. इस कार ने कई दशकों तक निजी कारों के साथ-साथ टैक्सियों के रूप में भी भारतीय सड़कों पर राज किया है. 1991 में भारतीय सेना के बेड़े में शामिल की गई मारुति सुजुकी जिप्सी सशस्त्र बल का पर्याय बन गई.

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नई दिल्ली: आज पूरा भारत 75वां गणतंत्र दिवस पूरे धूमधाम से मना रहा है. देश की राजधानी दिल्ली के इंडिया गेट के कर्तव्यपथ पर भारतीय सेना और अर्द्धसैनिक बलों के जवान और कलाकार अपना करतब और अदम्य उत्साह का प्रदर्शन कर रहे हैं. दुनिया भर में किसी भी अन्य सशस्त्र बल की तरह भारतीय सेना मुख्य रूप से विशेष सैन्य वाहनों पर निर्भर करती है, जो कुछ निश्चित फीचर्स के साथ आते हैं. हालांकि, भारतीय वाहन निर्माताओं की कुछ ऐसी मॉस्ट आइकॉनिक कारें हैं, जिन्होंने भारतीय सेना के बेड़े में अपनी जगह बनाई है और उसके परचम को आसमान पर लहराया है. हालांकि, अब ये कारें मार्केट से आउट हो गई हैं, लेकिन अब इनके इलेक्ट्रिक वेरिएंट आने की उम्मीद की जा रही है. आइए, इन कारों के बारे में जानते हैं.

हिंदुस्तान एंबेसडर
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हिंदुस्तान एंबेसडर को भारत में सबसे पॉपुलर कारों में से एक है. इस कार ने कई दशकों तक निजी कारों के साथ-साथ टैक्सियों के रूप में भी भारतीय सड़कों पर राज किया है. यह एक सामान्य ऑफ-रोडर नहीं है, लेकिन हिंदुस्तान एंबेसेडर को इसकी मजबूत बनावट और आरामदायक सवारी के लिए जाना और सराहा गया है. इनमें से कुछ सदाबहार कारें अभी भी भारतीय सेना के उच्च पदों पर सेवा प्रदान करती हैं. हालांकि हिंदुस्तान एम्बेसडर का उत्पादन 2014 में ही बंद कर दिया गया था.

मारुति सुजुकी जिप्सी
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1991 में भारतीय सेना के बेड़े में शामिल की गई मारुति सुजुकी जिप्सी सशस्त्र बल का पर्याय बन गई. बिना किसी परेशानी के उबड़-खाबड़ इलाकों में चलने की क्षमता वाली इस हल्की और कॉम्पैक्ट एसयूवी ने देश की सेवा की. चुस्त हैंडलिंग, उत्कृष्ट गतिशीलता और भागों की आसान उपलब्धता ने मारुति सुजुकी जिप्सी को न केवल साहसिक प्रेमियों बल्कि भारतीय सेना के बीच भी लोकप्रिय बना दिया है.

टाटा सूमो 4X4
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टाटा मोटर्स का भारतीय सेना के साथ बहुत पुराना संबंध रहा है. टाटा सूमो 4X4 एक मजबूत और दुर्लभ सैन्य वाहन है, जिसे घरेलू वाहन निर्माता ने सेना के लिए बनाया है. इसे सीमित संख्या में बनाया गया था और इसका उपयोग एम्बुलेंस सहित विभिन्न क्षमताओं में किया गया था. हाई ग्राउंड क्लीयरेंस और ऑल-व्हील ड्राइव सिस्टम एसयूवी को एक कठिन ऑफ-रोडर बनाता है, जबकि बड़ा केबिन इसे भारतीय सेना मेडिकल कोर के लिए एम्बुलेंस के रूप में उपयोगी बनाता है.

टाटा सफारी स्ट्रोम
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टाटा सफारी स्ट्रोम भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सबसे पावरफुल कारों में से एक है. सफारी स्टॉर्म को मूल रूप से पुरानी जिप्सी के बदले में भारतीय सेना के बेड़े में शामिल किया गया था. हरे रंग की स्पेक टाटा सफारी स्टॉर्म जीएस800 को भारतीय सेना के बेड़े में शामिल किया गया. भारतीय सेना-स्पेक टाटा सफारी स्टॉर्म रेगुलर वेरिएंट के मुकाबले की तुलना में अधिक पावर प्रदान करती है.

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महिंद्रा स्कॉर्पियो क्लासिक एक और पॉपुलर कार है, जो भारतीय सेना की मोबिलिटी को पूरा करती है. स्कॉर्पियो क्लासिक महिंद्रा की पॉपुलर स्कॉर्पियो एसयूवी के अपडेटेड वेरिएंट के रूप में आती है. इसे महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन के साथ बेचा जाता है. मजबूत निर्माण गुणवत्ता, 4X4 ड्राइवट्रेन की बदौलत कठिन ऑफ-रोडिंग क्षमता और हाई ग्राउंड क्लीयरेंस इस एसयूवी को भारतीय सेना के लिए एक सक्षम वाहन बनाते हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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