सैलरी पूरी आपकी जेब में, जानें किन देशों में नहीं लगता इनकम टैक्स

Published by :Soumya Shahdeo
Published at :27 Apr 2026 7:12 AM (IST)
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Tax Free Countries

इन देशों में सरकार टैक्स नहीं मांगती (Photo: Freepik & AI)

Tax Free Countries: खाड़ी देशों से लेकर कैरेबियन आइलैंड्स तक, कई जगह जीरो इनकम टैक्स की सुविधा मिलती है. क्या वाकई वहां रहना सस्ता है? आखिर ये देश बिना टैक्स के कैसे चलते हैं और क्या है इनका असली सच?

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Tax Free Countries: दुनिया के कुछ देश अपनी “जीरो इनकम टैक्स” पॉलिसी की वजह से प्रवासियों, कारोबारियों और रईसों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. सुनने में यह बात बहुत अच्छी लगती है कि आप जितना कमाएंगे, पूरा आपकी जेब में रहेगा. लेकिन क्या असलियत इतनी ही सीधी है? आइए समझते हैं टैक्स की इस जादुई दुनिया का सच.

किन देशों में नहीं लगता इनकम टैक्स?

बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, बिना टैक्स वाली लिस्ट में सबसे ऊपर खाड़ी देश (GCC) आते हैं. संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान और सऊदी अरब में सैलरी पर कोई टैक्स नहीं देना होता. ऐतिहासिक रूप से इन देशों का खर्च तेल की कमाई से चलता रहा है. सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं, कैरेबियन द्वीप समूह के देश जैसे बहामास, केमैन आइलैंड्स, बरमूडा और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स भी इसी राह पर चलते हैं. यूरोप में मोनाको एक खास नाम है, जहां के निवासियों को इनकम टैक्स या कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना पड़ता. वहीं दक्षिण-पूर्व एशिया में ब्रुनेई और प्रशांत क्षेत्र में वनुआतु भी इसी श्रेणी में आते हैं. 

बिना टैक्स के सरकारें कैसे चलती हैं?

जब सरकार आपकी सैलरी से पैसा नहीं लेती, तो वह अपना खजाना भरने के लिए दूसरे तरीके अपनाती है.  खाड़ी देश मुख्य रूप से तेल और गैस के राजस्व पर निर्भर हैं. हालांकि, अब वे अपनी अर्थव्यवस्था बदल रहे हैं. उदाहरण के लिए, UAE ने अब 9% का कॉर्पोरेट टैक्स शुरू किया है और कई खाड़ी देशों में 5% से 15% तक का VAT (Value Added Tax) भी लागू है. कैरेबियन देश टूरिज्म, विदेशी वित्तीय सेवाओं और इम्पोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) के जरिए पैसा कमाते हैं. वहीं कुछ देश अपने नागरिकता प्रोग्राम या लाइसेंस फीस से खर्च निकालते हैं. 

क्या ‘जीरो टैक्स’ का मतलब ‘जीरो खर्च’ है?

यहीं पर सबसे बड़ा पेंच है. भले ही आपकी सैलरी पर टैक्स न लगे, लेकिन रहने का खर्च काफी अधिक हो सकता है. 

  • अप्रत्यक्ष टैक्स (Indirect Tax): सामान खरीदने पर लगने वाला VAT, एक्साइज ड्यूटी और कस्टम चार्ज आपकी जेब ढीली करते हैं. 
  • महंगी लाइफस्टाइल: मोनाको जैसे देशों में रहने का खर्च इतना ज्यादा है कि वहां सिर्फ बहुत अमीर लोग ही टिक पाते हैं.
  • रेजीडेंसी की शर्तें: इन देशों में रहने के लिए आपको या तो वहां नौकरी करनी होगी या फिर मोटा निवेश करना होगा. 

क्या बदलाव की ओर बढ़ रहे हैं ये देश?

समय बदल रहा है. ग्लोबल नियमों और पारदर्शिता के दबाव में ये देश अब धीरे-धीरे टैक्स सिस्टम ला रहे हैं.  ओमान जैसे देश अब पर्सनल इनकम टैक्स लगाने पर विचार कर रहे हैं. वहीं, सिंगापुर जैसे देश ‘टैक्स-फ्री’ तो नहीं हैं, लेकिन वहां टैक्स की दरें (0% से 22%) बहुत कम हैं. 

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Soumya Shahdeo

लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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