कोरोना से राहत के लिए रिजर्व बैंक की घोषणा के बाद रुपया 81 पैसे उछला

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Rupee rises 81 paise after RBI announcement : रिजर्व बैंक की अप्रत्याशित नीतिगत घोषणा के दम पर शुक्रवार को अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में कारोबार के दौरान रुपये में 81 पैसे की जबरदस्त उछाल आयी. इसके बाद भारतीय मुद्रा कारोबार के दौरान 74.35 रुपये प्रति डॉलर के उच्च स्तर को छू गयी.

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मुंबई : रिजर्व बैंक की अप्रत्याशित नीतिगत घोषणा के दम पर शुक्रवार को अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में कारोबार के दौरान रुपये में 81 पैसे की जबरदस्त उछाल आयी. इसके बाद भारतीय मुद्रा कारोबार के दौरान 74.35 रुपये प्रति डॉलर के उच्च स्तर को छू गयी. रिजर्व बैंक ने तीन अप्रैल को प्रस्तावित नीतिगत घोषणा से पहले ही शुक्रवार को रेपो दर में 0.75 प्रतिशत की भारी-भरकम कटौती करने की घोषणा की.

इसके अलावा रिजर्व बैंक ने रिवर्स रेपो दर और नकदी आरक्षित दर में भी कटौती करने समेत कई अन्य नीतिगत उपाय किये. कारोबारियों ने रिजर्व बैंक के इस कदम का स्वागत किया. इससे शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ 74.60 रुपये प्रति डॉलर पर खुलने वाली भारतीय मुद्रा ने और मजबूती दिखायी. दोपहर के कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 81 पैसे की तेजी के साथ 74.35 प्रति डॉलर के स्तर पर चल रहा था. बृहस्पतिवार को रुपया 75.16 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था.

कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए देश में लागू 21 दिन की पाबंदियों के आर्थिक व वित्तीय प्रभावों को कम करने के लिए केंद्र सरकार के राहत पैकेज के एक ही दिन बाद शुक्रवार को रिजर्व बैंक ने भी मौद्रिक नीतियों से आर्थिक गति को सहारा देने की कोशिश की. रिजर्व बैंक ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए तीन अप्रैल को प्रस्तावित मौद्रिक नीति घोषणा से पहले ही रेपो दर, रिवर्स रेपो दर घटाने समेत कई नीतिगत उपाय किये. गवर्नर ने कहा, रेपो दर में कमी से कोरोना वायरस महामारी के आर्थिक प्रभाव से निपटने में मदद मिलेगी.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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