एंटी-एजिंग दवा के लिए फार्मा सलाहकार ने मांगा पेटेंट, बढ़ती उम्र का असर करेगा कम

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Sanjay Aggarwal Pharma consultant

फार्मा कंसल्टेंट संजय अग्रवाल (बाएं) और एआई जेनरेटेड तस्वीर (दाएं).

Anti-Aging Drug Patent: फार्मा सलाहकार संजय अग्रवाल ने बढ़ती उम्र के असर को कम करने वाली नई एंटी-एजिंग दवा के लिए भारतीय पेटेंट कार्यालय में आवेदन किया है. यह दवा सेलुलर स्तर पर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने, त्वचा की सेहत सुधारने और समग्र जीवन शक्ति बढ़ाने में सक्षम है.

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Anti-Aging Drug Patent: बढ़ती उम्र के असर को रोकने और त्वचा की सेहत सुधारने वाली नई एंटी-एजिंग दवा के लिए फार्मा सलाहकार संजय अग्रवाल ने पेटेंट के लिए आवेदन किया है. संजय अग्रवाल अमेरिका स्थित एल्कोमेक्स जीबीएन फार्मा ग्रुप के वैज्ञानिक सलाहकार भी हैं. उन्होंने यह दवा सेलुलर स्तर पर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने के उद्देश्य से विकसित की है.

भारतीय पेटेंट कार्यालय में किया आवेदन

अहमदाबाद स्थित शोधकर्ता संजय अग्रवाल ने भारतीय पेटेंट कार्यालय में अपनी नई एंटी-एजिंग दवा के लिए पेटेंट आवेदन किया है. उन्होंने बताया कि यह फॉर्मूलेशन त्वचा के स्वास्थ्य को सुधारने और समग्र जीवन शक्ति को बढ़ाने में सक्षम है.

42 से अधिक पेटेंट वाले संजय अग्रवाल का नया इनोवेशन

संजय अग्रवाल के पास 42 से अधिक पेटेंट हैं, जिनमें विभिन्न फार्मा फॉर्मूलेशन शामिल हैं. उन्होंने कहा, “हमारा नया फॉर्मूला एंटी-एजिंग के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है और दीर्घकालिक प्रभाव डालने में सक्षम होगा.”

ऐसे काम करेगी नई एंटी-एजिंग दवा

यह दवा कोशिकाओं के स्तर पर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने के लिए डिज़ाइन की गई है. इसके लाभों में शामिल हैं.

  • त्वचा की लोच और चमक को बनाए रखना
  • झुर्रियों और महीन रेखाओं को कम करना
  • कोशिकाओं की पुनर्निर्माण क्षमता को बढ़ाना
  • संपूर्ण जीवन शक्ति में सुधार करना

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एंटी-एजिंग में नया अध्याय

यह एंटी-एजिंग मेडिसिन उम्र बढ़ने के प्रभाव को कम करने के लिए बायोटेक्नोलॉजी और फार्मास्युटिकल एडवांसमेंट का इस्तेमाल कर रही है. यदि पेटेंट स्वीकृत हो जाता है, तो यह दवा ब्यूटी और हेल्थकेयर इंडस्ट्री में एक नया अध्याय जोड़ सकती है.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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