Nitin Gadkari की सख्त हिदायत! हाईवे प्रोजेक्ट्स में तेजी लाने के लिए लें फटाफट फैसले

Nitin Gadkari
Nitin Gadkari: नितिन गडकरी ने राजमार्ग परियोजनाओं की धीमी रफ्तार पर चिंता जताते हुए मंत्रालय के अफसरों को फटाफट निर्णय लेने की नसीहत दी. गडकरी ने सुस्त अफसरों को सेवानिवृत्त करने तक की बात कही.
Nitin Gadkari: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को मंत्रालय के अधिकारियों को दो टूक संदेश दिया कि वे राजमार्ग परियोजनाओं के काम में तेजी लाने के लिए फटाफट फैसले लें. उन्होंने नेशनल हाईवे एक्सीलेंस अवार्ड्स 2025 समारोह के दौरान कहा कि मंत्रालय तब तक फाइल आगे नहीं बढ़ाता, जब तक कोई सख्त शिकायत न करे.
बिना चिल्लाए आगे नहीं बढ़ती फाइल
नितिन गडकरी ने कहा, “जब तक कोई चिल्लाता नहीं, मंत्रालय में फाइल आगे नहीं बढ़ती.” उन्होंने अफसरों की फैसले लेने की धीमी गति पर नाराजगी जताई और यहां तक कह दिया कि मंत्रालय में करीब दो प्रतिशत कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्हें समय पर फैसला न लेने के चलते रिटायर कर देना चाहिए.
बैंक गारंटी लौटाने में देरी
नितिन गडकरी ने ठेकेदारों की बैंक गारंटी लौटाने में लगने वाले अनावश्यक समय पर भी चिंता जताई, जहां एक प्रक्रिया में लगभग एक साल लग रहा है. इसके अलावा, उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े करीब 2 लाख मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, जो परियोजनाओं में देरी का एक बड़ा कारण है.
इंजीनियरों और श्रमिकों की सराहतना
समारोह में राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग बुनियादी ढांचे के विस्तार में इंजीनियरों और श्रमिकों की भूमिका की सराहना की. वहीं, राजमार्ग सचिव वी उमाशंकर ने कहा कि विभिन्न पक्षों के बीच सहयोग से ही विश्वस्तरीय हाईवे नेटवर्क तैयार किया जा सकता है.
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अफसरशाही सुस्त रवैया
मंत्रालय ने हाल के वर्षों में हाईवे निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अफसरशाही की सुस्ती प्रोजेक्ट्स की गति पर असर डालती रही है. गडकरी के सख्त रुख को मंत्रालय में जरूरी सुधारों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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