सब्सिडी और मुफ्त उपहारों पर सरकार को आपत्ति नहीं, लेकिन नियमों में पारदर्शिता जरूरी : निर्मला सीतारमण

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 21 Dec 2022 4:17 PM

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निर्मला सीतारमण ने कहा कि जब आप सब्सिडी और मुफ्त उपहार देने के नियमों में पारदर्शिता रखेंगे तो कोई आपकी कार्यप्रणाली पर सवाल नहीं उठायेगा. हम केवल पारदर्शिता और वैधानिक राजकोषीय नियमों का पालन करवाना चाहते हैं.

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सब्सिडी और मुफ्त उपहारों पर कोई आपत्ति नहीं है जरूरत इस बात की है कि उन्हें प्रासंगिक बनाया जाये. अगर सब्सिडी और मुफ्त उपहारों का प्रावधान बजट में कर दिया जाये तो किसी को क्यों आपत्ति होगी. जब आपका राजस्व आयेगा और आप पैसा देंगे, तो कोई क्यों एतराज करेगा. शिक्षा, स्वास्थ्य एवं किसानों को दी जाने वाली कई तरह की सब्सिडी पूरी तरह जायज है. उक्त बातें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज राज्यसभा में कही.

कर्मचारियों का वेतन नहीं दे पा रही है राज्य सरकार

उन्होंने कहा कि ऐसी मीडिया रिपोर्ट है कि एक राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के वेतन का भुगतान समय पर नहीं कर पा रही है और कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि वेतन के पैसे का उपयोग देश भर में कई अलग-अलग विज्ञापन देने के लिए किया जा रहा है.

पारदर्शिता आवश्यक

निर्मला सीतारमण ने कहा कि जब आप सब्सिडी और मुफ्त उपहार देने के नियमों में पारदर्शिता रखेंगे तो कोई आपकी कार्यप्रणाली पर सवाल नहीं उठायेगा. हम केवल पारदर्शिता और वैधानिक राजकोषीय नियमों का पालन करवाना चाहते हैं.

 निर्मला सीतारमण ने दिया चर्चा का जवाब

निर्मला सीतारमण ने आज राज्यसभा में कोरोना काल के दौरान सरकार द्वारा टारगेटेड राहत प्रदान करने के कारण भारत की अर्थव्यवस्था के मंदी में नहीं जाने का दावा करते हुए कहा यह राहत किसी क्षेत्र को कोई तोहफा नहीं है, बल्कि विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए है. वित्त मंत्री राज्यसभा में अनुदान की अनुपूरक मांगों और अतिरिक्त मांगों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए उक्त बातें कही.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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