बजट 2026 : हलवा सेरेमनी के साथ 'मिशन बजट' शुरू, अब 1 फरवरी तक 'कैद' रहेंगे अधिकारी !

Edited by Abhishek Pandey
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमणब और अन्य कर्मचारी

बजट 2026 : हमारे यहां कोई भी शुभ काम करने से पहले 'मुंह मीठा' करने का रिवाज है. बजट देश का सबसे बड़ा आर्थिक लेखा-जोखा है, इसलिए इसकी छपाई शुरू होने से पहले हलवा बनाया जाता है. इसे खाने के बाद ही सभी कर्मचारी बजट पूरा होने तक दुनिया से कट जाते हैं.

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बजट 2026 : मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिल्ली के नॉर्थ ब्लॉक में ‘हलवा सेरेमनी’ में हिस्सा लिया. इस रस्म का मतलब यह है कि अब बजट छपने की तैयारी पूरी हो चुकी है और 1 फरवरी को लोकसभा में इसे पेश किया जाएगा.

पुराने बेसमेंट में लौटी टीम

एक मजेदार बात यह है कि इस बार बजट बनाने वाली टीम को वापस नॉर्थ ब्लॉक के पुराने बेसमेंट में जाना पड़ा. दरअसल, वित्त मंत्रालय का ऑफिस तो नए ‘कर्तव्य भवन’ में शिफ्ट हो गया है, लेकिन वहां अभी प्रिंटिंग प्रेस (छपाई की मशीनें) नहीं लगी हैं. इसलिए बजट की सीक्रेसी (गोपनीयता) बनाए रखने के लिए टीम को पुराने बेसमेंट में आना पड़ा.

अब शुरू हुआ ‘नजरबंदी’ का दौर

हलवा बंटते ही बजट बनाने वाले अफसरों और कर्मचारियों का ‘लॉक-इन’ पीरियड शुरू हो गया है.
इसका मतलब है कि अब बजट पेश होने तक ये लोग नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में ही कैद रहेंगे.
न ये घर जा सकते हैं और न ही फोन पर किसी बाहरी व्यक्ति से बात कर सकते हैं.
यह सब इसलिए किया जाता है ताकि बजट की कोई भी खबर बाहर लीक न हो.

निर्मला सीतारमण का 9वां बजट

1 फरवरी को निर्मला सीतारमण अपना 9वां बजट पेश करेंगी. जब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था डगमगा रही है, तब भारत की रफ्तार 7.6% रहने की उम्मीद है. ऐसे में मिडिल क्लास और टैक्स भरने वालों को उम्मीद है कि इस बार उन्हें कुछ बड़ी राहत मिलेगी.

इस बार भी होगा ‘डिजिटल बजट’

पिछले कुछ सालों की तरह इस बार भी बजट कागज पर नहीं, बल्कि डिजिटल होगा.
जैसे ही संसद में भाषण खत्म होगा, आप ‘यूनियन बजट मोबाइल ऐप’ पर सारा डेटा देख पाएंगे.
यह ऐप हिंदी और अंग्रेजी दोनों में है और मोबाइल पर आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है.

क्यों मनाते हैं हलवा सेरेमनी?

हमारे यहां कोई भी शुभ काम करने से पहले ‘मुंह मीठा’ करने का रिवाज है. बजट देश का सबसे बड़ा आर्थिक लेखा-जोखा है, इसलिए इसकी छपाई शुरू होने से पहले हलवा बनाया जाता है. इसे खाने के बाद ही सभी कर्मचारी बजट पूरा होने तक दुनिया से कट जाते हैं.

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By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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