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Budget 2026: 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से तय होगा राज्यों का हिस्सा, जानें क्या बदलेगा

Updated at : 28 Jan 2026 1:54 PM (IST)
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Budget 2026

डॉ. अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता वाले इस आयोग ने आज (17 नवंबर 2025) भारत के माननीय राष्ट्रपति को अपनी रिपोर्ट सौंपी.

Budget 2026: 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें न केवल राज्यों की आर्थिक स्थिति तय करेंगी, बल्कि आपदा प्रबंधन और स्थानीय निकायों (Panchayats & Municipalities) को मिलने वाले फंड की दिशा भी तय करेंगी. हालांकि रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि सरकार इन सिफारिशों को स्वीकार कर बजट में बड़े वित्तीय बदलावों का आधार रखेगी.

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Budget 2026: भारत के आगामी केंद्रीय बजट में इस बार सबकी नजरें 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं. अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता वाले इस आयोग ने अपनी सिफारिशें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दी हैं, जिन्हें 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जाना है. यह रिपोर्ट तय करेगी कि अगले पांच सालों तक केंद्र सरकार अपनी कमाई का कितना हिस्सा राज्यों के साथ बांटेगी.

क्या है वित्त आयोग और इसकी भूमिका?

वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसका मुख्य काम केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संतुलन बनाए रखना है. यह आयोग तय करता है कि केंद्र द्वारा वसूले गए करों (Taxes) में से कितना पैसा राज्यों को मिलना चाहिए और किस राज्य को कितनी ‘ग्रांट-इन-एड’ (सहायता अनुदान) दी जानी चाहिए.

16वें वित्त आयोग का सफर

  • गठन: 31 दिसंबर 2023 को नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया के नेतृत्व में.
  • प्रमुख सदस्य: इसमें एनी जॉर्ज मैथ्यू, मनोज पांडा, सौम्या कांति घोष और टी रबी शंकर जैसे दिग्गज शामिल हैं.
  • रिपोर्ट सौंपना: आयोग ने 17 नवंबर 2025 को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को अपनी गोपनीय रिपोर्ट सौंपी.

इन मुद्दों पर रहेगी नजर

आमतौर पर वित्त आयोग करों के बंटवारे के लिए कुछ खास पैमानों का इस्तेमाल करता है, जैसे

  • जनसंख्या और क्षेत्रफल: जिस राज्य की आबादी और इलाका बड़ा है, उसे अधिक संसाधन.
  • राजकोषीय प्रयास: जो राज्य बेहतर टैक्स वसूली और वित्तीय अनुशासन दिखाते हैं.
  • जनसांख्यिकीय प्रदर्शन: यहां दक्षिण भारतीय राज्यों की आपत्ति रही है, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया है, जिससे आबादी आधारित फंडिंग में उन्हें नुकसान होने का डर रहता है.

पुराने आंकड़ों पर एक नजर

पिछले आयोगों ने राज्यों की हिस्सेदारी में बड़े बदलाव किए थे.

  • 14वां वित्त आयोग: राज्यों का हिस्सा 32% से बढ़ाकर सीधा 42% कर दिया था.
  • 15वां वित्त आयोग: एन. के. सिंह के नेतृत्व में इसे 41% पर बरकरार रखा गया था.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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