Budget 2026: 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से तय होगा राज्यों का हिस्सा, जानें क्या बदलेगा

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Budget 2026: 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से तय होगा राज्यों का हिस्सा, जानें क्या बदलेगा

Budget 2026: 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें न केवल राज्यों की आर्थिक स्थिति तय करेंगी, बल्कि आपदा प्रबंधन और स्थानीय निकायों (Panchayats & Municipalities) को मिलने वाले फंड की दिशा भी तय करेंगी. हालांकि रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि सरकार इन सिफारिशों को स्वीकार कर बजट में बड़े वित्तीय बदलावों का आधार रखेगी.

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Budget 2026: भारत के आगामी केंद्रीय बजट में इस बार सबकी नजरें 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं. अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता वाले इस आयोग ने अपनी सिफारिशें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दी हैं, जिन्हें 1 अप्रैल 2026 से लागू किया जाना है. यह रिपोर्ट तय करेगी कि अगले पांच सालों तक केंद्र सरकार अपनी कमाई का कितना हिस्सा राज्यों के साथ बांटेगी.

क्या है वित्त आयोग और इसकी भूमिका?

वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसका मुख्य काम केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संतुलन बनाए रखना है. यह आयोग तय करता है कि केंद्र द्वारा वसूले गए करों (Taxes) में से कितना पैसा राज्यों को मिलना चाहिए और किस राज्य को कितनी ‘ग्रांट-इन-एड’ (सहायता अनुदान) दी जानी चाहिए.

16वें वित्त आयोग का सफर

  • गठन: 31 दिसंबर 2023 को नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया के नेतृत्व में.
  • प्रमुख सदस्य: इसमें एनी जॉर्ज मैथ्यू, मनोज पांडा, सौम्या कांति घोष और टी रबी शंकर जैसे दिग्गज शामिल हैं.
  • रिपोर्ट सौंपना: आयोग ने 17 नवंबर 2025 को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को अपनी गोपनीय रिपोर्ट सौंपी.

इन मुद्दों पर रहेगी नजर

आमतौर पर वित्त आयोग करों के बंटवारे के लिए कुछ खास पैमानों का इस्तेमाल करता है, जैसे

  • जनसंख्या और क्षेत्रफल: जिस राज्य की आबादी और इलाका बड़ा है, उसे अधिक संसाधन.
  • राजकोषीय प्रयास: जो राज्य बेहतर टैक्स वसूली और वित्तीय अनुशासन दिखाते हैं.
  • जनसांख्यिकीय प्रदर्शन: यहां दक्षिण भारतीय राज्यों की आपत्ति रही है, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया है, जिससे आबादी आधारित फंडिंग में उन्हें नुकसान होने का डर रहता है.

पुराने आंकड़ों पर एक नजर

पिछले आयोगों ने राज्यों की हिस्सेदारी में बड़े बदलाव किए थे.

  • 14वां वित्त आयोग: राज्यों का हिस्सा 32% से बढ़ाकर सीधा 42% कर दिया था.
  • 15वां वित्त आयोग: एन. के. सिंह के नेतृत्व में इसे 41% पर बरकरार रखा गया था.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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