NFHS रिपोर्ट: भारतीयों के समाचार जानने की आदतों में हुआ बदलाव, पुरुष अखबार से तो महिलाएं टीवी से हुईं दूर

एनएफएचएस की ओर से इसी मई के महीने में वर्ष 2019 से 2021 के बीच किए गए सर्वेक्षण के आधार पर पांचवीं रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें यह कहा गया है कि लोगों की अखबार-मैगजीन पढ़ने, टीवी देखने और रेडियो सुनने की आदतों में तेजी से बदलाव आया है.
नई दिल्ली : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) की पांचवीं रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा किया गया है. अभी हाल ही में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, भारतीयों के मनोरंजन करने के तरीकों और आदतों में तेजी से बदलाव आ रहा है, जिसकी वजह से अखबार पढ़ने, रेडियो सुनने, टेलीविजन और सिनेमा देखने के मामलों में करीब दोहरे अंकों में भारी गिरावट दर्ज की गई है.
एनएफएचएस की ओर से इसी मई के महीने में वर्ष 2019 से 2021 के बीच किए गए सर्वेक्षण के आधार पर पांचवीं रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें यह कहा गया है कि लोगों की अखबार-मैगजीन पढ़ने, टीवी देखने और रेडियो सुनने की आदतों में तेजी से बदलाव आया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के लोगों के मनोरंजन करने के तरीकों में बदलाव आने की वजह से देश में वर्ष 2015-16 के मुकाबले अखबार-मैगजीन पढ़ने, टेलीविजन देखने और रेडियो सुनने की आदतों में दोहरे अंकों में गिरावट दर्ज की गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अखबार-मैगजीन पढ़ना, टेलीविजन देखना, सप्ताह में कम से कम एक बार रेडियो सुनना और महीने में एक बार सिनेमा देखने जाना मास मीडिया के नियमित इस्तेमाल के अध्ययन का मानदंड है.
एनएफएचएस की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2015-2016 में कराए गए सर्वे रिपोर्ट में 25 फीसदी महिलाओं और 14 फीसदी पुरुषों ने दावा किया था कि वे पारंपरिक मास मीडिया (अखबार, टीवी, मैगजीन, रेडियो और सिनेमा) के संपर्क में नहीं हैं, जबकि वर्ष 2019 में 41 फीसदी महिलाओं और 32 फीसदी पुरुषों का कहना है कि मनोरंजन के लिए वे अखबार, टीवी, मैगजीन, रेडियो और सिनेमा के संपर्क में नहीं है. पारम्परिक मास मीडिया में आई इस गिरावट पर कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि एनएफएचएस की ये रिपोर्ट व्यापक नहीं है और इसमें डिजिटल माध्यमों द्वारा परोसी जा रही सामग्री का कोई उल्लेख नहीं किया गया है.
एनएफएचएस के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2005-06 और 2015-16 के दौरान पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं के बीच टीवी, पत्रिकाओं और न्यूज़पेपर के प्रसार में वृद्धि हुई है। लेकिन वर्ष 2019-2021 की अवधि में ये प्रवृत्ति बिलकुल उलट गई है. एनएफएचएस की पांचवीं रिपोर्ट के आंकड़ों से पता चलता है कि पुरुषों के अखबार या मैगजीन के पढ़ने में सबसे ज्यादा गिरावट आई है, जबकि महिलाओं ने खुद को टीवी से सबसे ज्यादा दूर किया है.
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इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी के अध्यक्ष मोहित जैन के अनुसार, एनएफएचएस की पांचवीं रिपोर्ट का आंकड़ा भले ही समाचार इंडस्ट्री के अनुरूप नहीं है, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खबरों की उपलब्धता के कारण न्यूज पढ़ने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है. दरअसल न्यूज मीडिया का मतलब अभी तक केवल अखबार और टीवी से लगाया जाता रहा है, लेकिन अब भौतिक रूप से न सही, लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जाकर खबरों को पढ़ और सुन रहे हैं. एनएफएचएस -5 की सर्वे रिपोर्ट से ये स्पष्ट है कि प्रिंट और टीवी न्यूज इंडस्ट्री की ओर से परोसी जा रही खबरों के प्रति लोगों की उदासीनता बढ़ रही है और लोग इन खबरों से खुद को कनेक्ट नहीं कर पा रहे हैं.
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