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भारतीयों की पहली पसंद नहीं है सोना में निवेश, जानिए क्या कहती है WGC की रिपोर्ट...

Updated at : 01 May 2020 6:55 AM (IST)
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भारतीयों की पहली पसंद नहीं है सोना में निवेश, जानिए क्या कहती है WGC की रिपोर्ट...

भारत दुनियाभर में सोना के सबसे बड़े और स्थापित बाजारों में एक है. यहां का सोना बाजार देश के समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़ा हुआ है. भारत में सोने की मांग का आकलन और अनुसंधान करने वाले समूह इस बात की पुष्टि करते हैं कि सोना निवेशकों के बीच यह सबसे लोकप्रिय उत्पादों में से एक है, लेकिन हम निवेश के उन तरीकों के बारे में ज्यादा जानने की कोशिश करते हैं, जिसके जरिये भारत के निवेश इसमें निवेश करना चाहते हैं.

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भारत दुनियाभर में सोना के सबसे बड़े और स्थापित बाजारों में एक है. यहां का सोना बाजार देश के समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक सहयोग से जुड़ा हुआ है. भारत में सोने की मांग का आकलन और अनुसंधान करने वाले समूह इस बात की पुष्टि करते हैं कि सोना निवेशकों के बीच यह सबसे लोकप्रिय उत्पादों में से एक है, लेकिन हम निवेश के उन तरीकों के बारे में ज्यादा जानने की कोशिश करते हैं, जिसके जरिये भारत के निवेश इसमें निवेश करना चाहते हैं. मसलन, वे इसमें निवेश कैसे करते हैं? ऐसा करने के पीछे उनका उद्देश्य क्या हैं? क्या सोना उनके प्राथमिक निवेश उद्देश्यों को पूरा करने में सक्षम है? यदि नहीं, तो यह उद्योग विभिन्न प्रकार के निवेशकों के बीच अधिक प्रभावी ढंग से सोने को मजबूती के साथ पेश करने के लिए क्या कर सकता है? आइए, जानते हैं कि सोना में निवेश को लेकर भारतीय निवेशक क्या चाहते हैं और भारत के कितने प्रतिशत लोग प्राथमिकता के आधार पर सोना में निवेश करना चाहते हैं…?

Also Read: Gold demand in India : सोने की मांग में 36 फीसदी की गिरावट दर्ज, उतार-चढ़ाव में निवेश का मौका

ग्रामीण और शहरी निवेशकों में अंतर : जैसे-जैसे हम निवेशकों के प्रोफाइल की गहराई से पड़ताल करते हैं और सोने में निवेश को लेकर उनके विचार और व्यवहार को जानने की कोशिश करते हैं, तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्र निवेशकों के बीच का अंतर साफ हो जाता है. दोनों के बीच उनके निवेश की जरूरत, व्यवहार और जोखिम प्रोफाइल के संदर्भ में चिह्नित अंतर मौजूद हैं. शहरी क्षेत्र निवेशकों के पास आम तौर पर अधिक विविध निवेश पोर्टफोलियो और एक दीर्घकालिक निवेश का मौका है. दिलचस्प यह भी है कि शहरी क्षेत्र के निवेशकों के पास ग्रामीण क्षेत्र के निवेशकों की तुलना में जोखिम अधिक है. हालांकि, शहरी क्षेत्र के निवेशक इस बात को खुद स्वीकार भी करते हैं कि उनके सामने बहुत अधिक जोखिम है.

सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश आम जरूरत : भारत के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के निवेशकों में एक आम बात है और वह यह कि यहां के दोनों क्षेत्रों के निवेशक सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से निवेश करना चाहते हैं. ऐसे में अगर देखा जाए, तो भारत के निवेशकों के लिए सोना में निवेश करना सबसे सुरक्षित और भरोसे के लायक माना जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल भविष्य में भी किया जा सके.

निवेश के लिए संघर्ष कर रहा सोना : विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी)की ओर से गुरुवार को जारी आंकड़ों पर यकीन करें, तो भारत के बाजारों में निवेश के लिए सोना अब भी संघर्ष कर रहा है. देश में कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन के पहले से ही यानी साल के शुरुआती महीने जनवरी से मार्च के बीच की तिमाही में निवेश की बाट जोह रहे सोने की मांग में करीब 36 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी है. विश्व स्वर्ण परिषद के भारत के प्रबंध निदेशक सोमसुंदरम पीआर की रिपोर्ट के अनुसार, निवेशक किसी भी क्षेत्र में तभी निवेश करने से पहले जांच-पड़ताल करना बेहतर समझते हैं. आइए, विश्व स्वर्ण परिषद की ओर से जारी आंकड़ों के आधार पर समझते हैं कि भारत के निवेशक किस तरीके से प्राथमिक तौर पर किस क्षेत्र में निवेश करना ज्यादा पसंद करते हैं…

  • भारत के निवेशक

  • 28 फीसदी लोग अपनी आमदनी के अनुपात में निवेश करना ज्यादा पसंद करते हैं.

  • 3.5 लोगों की औसत संख्या स्वामित्व वाले उत्पादों में निवेश करने के प्रति इच्छुक दिखाई देती है.

  • टॉप 5 निवेश : अब हमें भारत के निवेशकों की मानसिकता और सामाजिक परिवेश के आधार पर इस बात का भी मूल्यांकन करना होगा कि यहां के निवेशक प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले टॉप के किन पांच क्षेत्रों में निवेश करना ज्यादा पसंद करते हैं और सोने में निवेश का स्थान क्या है?

  • जीवन बीमा

  • बचत खाता

  • सोने के आभूषण

  • सोने के सिक्के

  • निवेश कोष

भारत के निवेशकों की क्या है सोच?

  • 4 फीसदी लोग निवेश की शुरुआत और खरीद करने का इरादा रखते हैं.

  • 29 फीसदी लोग सोना खरीदने पर विचार करते तो हैं, लेकिन उन्होंने पहले कभी खरीद नहीं की है.

  • 67 फीसदी लोग भविष्य को ध्यान में रखते हुए अतीत में सोने की खरीद की है.

  • शहरी क्षेत्र के निवेशक

  • 33 फीसदी लोग अपनी आमदनी के अनुपात में निवेश करना ज्यादा पसंद करते हैं.

  • 4.5 लोगों की औसत संख्या स्वामित्व वाले उत्पादों में निवेश करने के प्रति इच्छुक दिखाई देती है.

शहरी क्षेत्र में टॉप 5 निवेश : भारत के शहरी क्षेत्रों के निवेशकों की मानसिकता और सामाजिक परिवेश के आधार पर इस बात का भी मूल्यांकन करना होगा कि यहां के निवेशक प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले टॉप के किन पांच क्षेत्रों में निवेश करना ज्यादा पसंद करते हैं और सोने में निवेश का स्थान क्या है?

  • जीवन बीमा

  • बचत खाता

  • निवेश कोष

  • सोने के आभूषण

  • सोने के सिक्के

शहरी क्षेत्र के निवेशकों की क्या है सोच?

  • 3 फीसदी लोग निवेश की शुरुआत और खरीद करने का इरादा रखते हैं.

  • 21 फीसदी लोग सोना खरीदने पर विचार करते तो हैं, लेकिन उन्होंने पहले कभी खरीद नहीं की है.

  • 76 फीसदी लोग भविष्य को ध्यान में रखते हुए अतीत में सोने की खरीद की है.

  • ग्रामीण क्षेत्र के निवेशक

  • 24 फीसदी लोग अपनी आमदनी के अनुपात में निवेश करना ज्यादा पसंद करते हैं.

  • 2.5 लोगों की औसत संख्या स्वामित्व वाले उत्पादों में निवेश करने के प्रति इच्छुक दिखाई देती है.

ग्रामीण क्षेत्र में टॉप 5 निवेश : भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के निवेशकों की मानसिकता और सामाजिक परिवेश के आधार पर इस बात का भी मूल्यांकन करना होगा कि यहां के निवेशक प्राथमिकता के आधार पर सबसे पहले टॉप के किन पांच क्षेत्रों में निवेश करना ज्यादा पसंद करते हैं और सोने में निवेश का स्थान क्या है?

  • जीवन बीमा

  • बचत खाता

  • सोने के आभूषण

  • सोने के सिक्के

  • निवेश कोष

ग्रामीण क्षेत्र के निवेशकों की क्या है सोच?

  • 5 फीसदी लोग निवेश की शुरुआत और खरीद करने का इरादा रखते हैं.

  • 37 फीसदी लोग सोना खरीदने पर विचार करते तो हैं, लेकिन उन्होंने पहले कभी खरीद नहीं की है.

  • 58 फीसदी लोग भविष्य को ध्यान में रखते हुए अतीत में सोने की खरीद की है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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