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जापान पहुंचकर कितने का हो जाता है भारत का रुपया? जानकर चौंक जाएंगे आप

Updated at : 29 Aug 2025 4:44 PM (IST)
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INR vs JPY

जापानी येन और भारतीय रुपया.

INR vs JPY: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के बीच लोग जानना चाहते हैं कि जापान में भारतीय रुपये की कीमत कितनी है. वर्तमान विनिमय दर के अनुसार 1 रुपया 1.68 येन और 100 रुपये लगभग 167.74 येन के बराबर होते हैं. हालांकि जापान में 100 रुपये की क्रय शक्ति सीमित है, जिससे केवल कॉफी, स्नैक या बस टिकट खरीदा जा सकता है. भारत में यही राशि अधिक उपयोगी है. रुपया-येन दर दोनों देशों के व्यापार, निवेश और जीवन-यापन पर सीधा असर डालती है.

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INR vs JPY: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त 2025 से दो दिवसीय भारत–जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए जापान की यात्रा पर हैं. इस मौके पर भारत और जापान के बीच आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा हुई है. इसी बीच लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर जापान पहुंचने पर भारतीय रुपये की कितनी कीमत होती है और 100 रुपये में वहां क्या खरीदा जा सकता है. आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

रुपये और जापानी येन का विनिमय दर

वर्तमान समय में 1 भारतीय रुपया 1.68 जापानी येन के बराबर है. इस दर के हिसाब से भारत का 100 रुपया लगभग 167.74 येन के बराबर होता है. यह दर वैश्विक वित्तीय बाजार, केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के आधार पर बदलती रहती है. इसलिए रुपया और येन का मूल्य समय-समय पर ऊपर-नीचे होता रहता है.

रुपये और येन का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

भारत और जापान दोनों एशिया की मजबूत अर्थव्यवस्थाएं हैं. जापानी येन को लंबे समय से स्थिर और मजबूत मुद्रा के रूप में देखा जाता है. वहीं, भारतीय रुपया विकासशील अर्थव्यवस्था की पहचान के साथ चलता है. बीते वर्षों में रुपया कई मुद्राओं के मुकाबले कमजोर हुआ है, लेकिन जापानी येन के मुकाबले उसने अपेक्षाकृत स्थिरता बनाए रखी है. भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक दबावों के बावजूद संतुलन बनाए रखने की क्षमता रखती है.

जापान में 100 रुपये क्या-क्या खरीदेंगे

भारत में 100 रुपये से आप आसानी से चाय, स्नैक्स या स्थानीय बस-ऑटो का किराया चुका सकते हैं. लेकिन जापान में 167 येन की क्रय शक्ति काफी सीमित है. उदाहरण के तौर पर अगर आप जापान में हैं, तो करीब 100 से 150 येन में कन्वीनियंस स्टोर कॉफी, करीब 150 से 200 येन में ब्रेड का पैक, करीब 150 से 200 येन में बस का टिकट, करीब 120 से 160 येन में सॉफ्ट ड्रिंक और करीब 100 से 170 येन में छोटा स्नैक पैक खरीद सकते हैं. जापान में 100 रुपये (167 येन) से सिर्फ एक कॉफी, छोटा स्नैक या कभी-कभार एक बस टिकट खरीदा जा सकता है. वहीं भारत में इसी रकम से आप कई बुनियादी चीजें आसानी से ले सकते हैं.

जापान और भारत में जीवन-यापन का अंतर

भारत की तुलना में जापान का जीवन-यापन काफी खर्चीला है. जापान में मजदूरी और आय भी अधिक है. इसलिए वहां की कीमतें स्थानीय लोगों के लिए संतुलित मानी जाती हैं. लेकिन भारतीय रुपये को येन में बदलने पर यह साफ दिखता है कि भारत में छोटी राशि भी ज्यादा उपयोगी है.

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अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश पर असर

भारत और जापान के बीच व्यापार और निवेश लंबे समय से मजबूत रहे हैं. जापानी कंपनियां भारत में ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश करती हैं. मजबूत येन भारतीय निर्यातकों के लिए फायदेमंद होता है, क्योंकि उन्हें अपने माल का अधिक मूल्य मिलता है. वहीं, कमजोर रुपया आयातकों के लिए मुश्किलें बढ़ा देता है, क्योंकि आयात महंगे हो जाते हैं. रुपये और येन की विनिमय दर सीधे दोनों देशों के व्यापारिक समीकरण और निवेश पर असर डालती है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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