कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग. सरकारी तेल कंपनियों को 30,000 करोड़ का भारी नुकसान

Published by :Abhishek Pandey
Published at :08 May 2026 4:04 PM (IST)
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Crude Oil Price

सांकेतिक तस्वीर (फोटो : Freepik)

Crude Oil : ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंचने और घरेलू कीमतों में बदलाव न होने से भारत की सरकारी तेल कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में कटौती से कंपनियों को बड़ी राहत मिली है.

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Crude Oil : पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव ने भारत की सार्वजनिक तेल कंपनियों की कमर तोड़ दी है. एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन ऑयल (IOC), बीपीसीएल (BPCL) और एचपीसीएल (HPCL) को मार्च के मध्य से अब तक लगभग 30,000 करोड़ रुपये का घाटा झेलना पड़ा है.

क्यों हुआ इतना बड़ा नुकसान ?

इस भारी नुकसान के पीछे मुख्य कारण कच्चे माल (कच्चा तेल) की लागत में भारी बढ़ोतरी और घरेलू कीमतों का स्थिर रहना है.

  • कच्चे तेल के दाम में उछाल: संघर्ष शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 72 डॉलर प्रति बैरल था, जो तनाव के कारण एक समय 144 डॉलर तक पहुंच गया था. अब यह 100 डॉलर के आसपास है.
  • कीमतें नहीं बढ़ीं: कच्चे तेल की लागत 50 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ने के बावजूद, भारत में 28 फरवरी के बाद से पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया.
  • प्रति लीटर घाटा: अप्रैल के दौरान तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 18 रुपये और डीजल पर 25 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा था.

सरकार ने दी थोड़ी राहत

अगर केंद्र सरकार ने दखल न दिया होता, तो यह नुकसान और भी भयावह हो सकता था. सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने से कंपनियों को कुछ सहारा मिला. यदि यह कटौती नहीं होती, तो तेल कंपनियों का कुल घाटा 62,500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता था.

आपूर्ति पर नहीं पड़ा असर

इतने बड़े वित्तीय दबाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते सप्लाई में अनिश्चितता के बावजूद, तेल कंपनियों ने देश में ईंधन की कमी नहीं होने दी. देशभर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) की सप्लाई सामान्य बनी रही. इसके अलावा, आपातकालीन कच्चे तेल की खरीद, महंगा बीमा प्रीमियम और परिवहन लागत बढ़ने से भी कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है.

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लेखक के बारे में

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अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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