लंदन के लोग चखेंगे भारत के ताजे जामुन का स्वाद, सरकार ने इस राज्य से भेजी पहली खेप

Updated at : 19 Jun 2025 8:58 PM (IST)
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Jamun Export

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Jamun Export: भारत ने पहली बार कर्नाटक से लंदन के लिए ताजा जामुन का निर्यात शुरू किया है. एपीडा और कर्नाटक सरकार की साझेदारी से भेजी गई इस खेप से किसानों को औसतन 110 रुपये प्रति किलो का मूल्य मिलेगा, जो घरेलू दर से लगभग दोगुना है. पहले केवल जमे हुए जामुन का निर्यात होता था. कर्नाटक का जामुन अपने औषधीय गुणों और स्वाद के लिए प्रसिद्ध है. यह पहल भारत के पारंपरिक फलों को वैश्विक बाजार में ले जाने की दिशा में अहम कदम है.

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Jamun Export: लंदन के लोग अब भारत के जामुन का स्वाद चखेंगे. भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अधीन कार्यरत एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए गुरुवार को कर्नाटक से लंदन के लिए ताजा जामुन फल की पहली खेप को हरी झंडी दिखाई. यह कदम भारत के पारंपरिक फलों को वैश्विक बाजारों में पहचान दिलाने और देश के किसानों को बेहतर मुनाफा दिलाने की दिशा में उठाया गया है.

पहले फ्रोजेन जामुन का होता था निर्यात

अब तक भारत से केवल फ्रोजेन जामुन (जमा हुआ जामुन) का ही निर्यात किया जाता था. यह पहली बार है जब ताजे जामुन फल को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया गया है. इस खेप को कर्नाटक सरकार के बागवानी विभाग और एपीडा द्वारा अनुमोदित प्लांट क्वारंटीन पैकहाउस में उच्च गुणवत्ता मानकों के तहत पैक किया गया.

एफपीओ से सीधे फलों की खरीदी

एपीडा ने बताया कि जामुन के फल सीधे किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) से प्राप्त किए गए हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है. इससे जामुन उत्पादक किसानों को बेहतर दाम मिलना सुनिश्चित हुआ है.

किसानों की आय में होगी दोगुनी बढ़ोतरी

अनंता ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के निर्यातक पार्थसारधी के अनुसार, इस निर्यात से किसानों को औसतन 110 रुपये प्रति किलोग्राम का मूल्य मिल रहा है, जबकि देश में उन्हें केवल 50-60 रुपये प्रति किलोग्राम का भाव मिलता था. यह कदम किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में प्रभावशाली साबित हो सकता है.

कर्नाटक के जामुन की खासियत

कर्नाटक को भारत में जामुन का एक प्रमुख उत्पादक राज्य माना जाता है. यहां की जलवायु और मिट्टी इस फल की पैदावार के लिए अनुकूल मानी जाती है. कर्नाटक के जामुन का गूदा गाढ़ा, स्वाद खट्टा-मीठा और रंग गहरा बैंगनी होता है. इसके औषधीय गुण जैसे ब्लड शुगर नियंत्रण, पाचन में सहायक, और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के कारण यह न केवल स्वादिष्ट बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है.

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भविष्य में अन्य बाजारों की ओर रुख

एपीडा के इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में भारत के अन्य पारंपरिक फलों जैसे आम, लीची, बेल आदि को भी ताजे रूप में वैश्विक बाजारों में पहुंचाया जाएगा. यह पहल भारत को “फल निर्यातक राष्ट्र” के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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