ट्रेन हादसों के घायलों का कैसे होगा इलाज? रेलवे के अस्पतालों में कर्मचारियों की भारी कमी

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 10 Aug 2024 12:18 PM

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रेलवे के अस्पतालों में अव्यवस्था पर कैग की रिपोर्ट में किया गया खुलासा.

Train Accident: कैग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि आईपीएचएस मानदंडों के संदर्भ में क्षेत्रीय रेलवे के अस्पतालों में चिकित्सकीय और पैरा-मेडिकल कर्मचारियों के अलावा मशीनों और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता में भी कमी पाई गई है. दवा-दारू की तो बात ही दूर है.

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नई दिल्ली: भारत में आए दिन कहीं न कहीं छोटे-बड़े ट्रेन हादसे होते ही रहते हैं. ये ट्रेन हादसे होने के बाद घायलों की जान बचाने के लिए तत्काल इलाज कराने की जरूरत होती है. लेकिन, ट्रेन हादसों में घायल होने वाले लोगों का इलाज कैसे होगा? भारतीय रेलवे के क्षेत्रीय अस्पतालों में कर्मचारियों की भारी कमी है. इतना ही नहीं, कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे रेलवे के इन क्षेत्रीय अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों का भी घनघोर अभाव है. दवाओं की उपलब्धता की तो बात ही दूर है. इस बात का खुलासा संसद में पेश की गई भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में किया गया है.

रेलवे के अस्पतालों में मशीन और चिकित्सा उपकरण भी नहीं

संसद में पेश की गई रिपोर्ट में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि उसने भारतीय रेलवे में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन का भी ऑडिट किया है. इस ऑडिट में पाया गया है कि क्षेत्रीय रेवले के अस्पतालों में चिकित्सकीय और पैरा-मेडिकल कर्मचारियों की भारी कमी है. कैग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि उसने अपने ऑडिट में यह भी पाया है कि आईपीएचएस (भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक) मानदंडों के संदर्भ में क्षेत्रीय रेलवे के अस्पतालों में चिकित्सकीय और पैरा-मेडिकल कर्मचारियों के अलावा मशीनों और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता में भी कमी पाई गई है. दवा-दारू की तो बात ही दूर है.

कैग ने रेलवे की खिंचाई की

भारतीय रेलवे को 2,604.40 करोड़ रुपये का घाटा होने पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने खिंचाई कर दी. कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारतीय रेलवे को यह नुकसान कर्ज और जीएसटी (वस्तु एवं सेवाकर) की वसूली होने के कारण हुआ है. कैग ने रिपोर्ट में कहा है कि रेलवे ने कर्ज और जीएसटी से जुड़े मामलों का ठीक से अध्ययन ठीक से नहीं कराया गया. इसके अलावा किराया के साथ-साथ दूसरे स्रोतों से आमदनी सृजित करने के लिए ठीक ढंग से फैसला नहीं किया गया, गलत तरीके से छूट अनुदान बांटा गया और बेमतलब का खर्च किया गया. इस वजह से रेलवे को इतना बड़ा घाटा उठाना पड़ा है. कैग ने रेलवे से जुड़े कुल 33 मामलों का अध्ययन कराया है, जिसमें इतने बड़े नुकसान का खुलासा किया गया है.

रेल मंत्रालय को 834.72 करोड़ का नुकसान

कैग ने कहा है कि उसकी रिपोर्ट में उन मामलों को शामिल किया गया है, जो वित्त वर्ष 2021-22 की अवधि के लिए परीक्षण ऑडिट और पहले के वर्षों में सामने में आए थे, लेकिन पिछली ऑडिट रिपोर्ट में ये चीजें नहीं आ पाई थीं. इन 33 मामलों में से एक में रेल मंत्रालय को ब्याज में 834.72 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. उसे एक भूमि के विकास के लिए इरकॉन को दिए गए 3,200 करोड़ रुपये के कर्ज पर थर्ड पार्टी को भुगतान करने के लिए यह पैसा देने को मजबूर होना पड़ा. इसमें कहा गया है कि इरकॉन ने ब्याज सहित कर्ज का भुगतान किया, लेकिन जमीन का कोई विकास नहीं किया गया.

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जिम्मेदारी तय करने की सिफारिश

एक दूसरे मामले में यह पाया गया कि रेलवे ने इंजन की ‘शंटिंग’ गतिविधि के लिए शुल्क नहीं लगाया. नतीजतन, पूर्वी तट रेलवे को 2018 से 2022 तक 149.12 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ. साइडिंग मालिकों को रेलवे की ओर से प्रदान की गई सेवाओं पर जीएसटी लगाने के संबंध में वस्तु और सेवाकर नियमों का अनुपालन न करने का एक मामला भी सामने लाया है. इससे साइडिंग मालिकों से 13.43 करोड़ रुपये जीएसटी नहीं वसूला गया. कैग ने रेलवे से सरकारी खजाने को होने वाले नुकसान से बचने के लिए साइडिंग मालिकों से बकाया जीएसटी की जल्द से जल्द वसूली करने और जीएसटी अधिसूचना के प्रावधानों को लागू न करने के लिए उचित स्तर पर जिम्मेदारी तय करने को कहा है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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