हेल्थ इंश्योरेंस के नए नियम, जानें क्यों बढ़ा क्लेम सेटलमेंट रेशियो और कैसे मिलेगा फायदा
Published by : Soumya Shahdeo Updated At : 26 Mar 2026 3:35 PM
हॉस्पिटल में वेट करते हुए पेशेंट (Photo: ANI)
Health Insurance Claims: देश में हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम का आंकड़ा 1.2 लाख करोड़ के पार निकल गया है. जानिए क्यों बढ़ रहे हैं प्रीमियम के दाम और क्लेम रिजेक्ट होने की मुख्य वजहें क्या हैं.
Health Insurance Claims: भारत में अब लोग अपनी सेहत को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं. वित्त मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2024-25 में हेल्थ इंश्योरेंस सेक्टर ने 9% की रफ्तार से बढ़त दर्ज की है. कुल प्रीमियम का आंकड़ा अब 1.2 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. यह बढ़ती संख्या साफ बताती है कि अब लोग इलाज के भारी-भरकम खर्चों से बचने के लिए बीमा पर भरोसा जता रहे हैं.
कैशलेस क्लेम में कितनी जल्दी मिलेगी मंजूरी?
इलाज के दौरान होने वाली देरी को खत्म करने के लिए IRDAI ने कड़े नियम लागू कर दिए हैं. अब अस्पतालों को कैशलेस प्री-ऑथोराइजेशन (इलाज शुरू करने की अनुमति) की प्रक्रिया 1 घंटे के भीतर पूरी करनी होगी. वहीं, अस्पताल से छुट्टी (डिस्चार्ज) के समय फाइनल बिल की मंजूरी 3 घंटे के अंदर देना अनिवार्य है. इसका सीधा मकसद मरीजों को बिना किसी मानसिक तनाव के सही समय पर इलाज दिलाना है.
क्या क्लेम मिलने में सुधार हो रहा है?
आंकड़ों की मानें तो क्लेम सेटलमेंट की स्थिति काफी सुधरी है. पिछले तीन सालों में इसमें उतार-चढ़ाव देखा गया:
- 2022-23: 85.66% क्लेम पास हुए.
- 2023-24: यह गिरकर 82.46% रहा.
- 2024-25: अब यह बढ़कर 87.50% पर पहुंच गया है. इसके साथ ही, शिकायतों के निपटारे में भी तेजी आई है. इस साल आई 1.37 लाख शिकायतों में से करीब 93% शिकायतों को सुलझा लिया गया है.
क्लेम रिजेक्ट होने की मुख्य वजह क्या है?
अक्सर जानकारी के अभाव में क्लेम अटक जाते हैं. मंत्रालय के अनुसार, क्लेम रिजेक्ट होने के पीछे कंपनी की गलती नहीं, बल्कि पॉलिसी की शर्तें होती हैं. मुख्य कारण ये हैं:
- बीमा राशि (Sum Insured) से ज्यादा का खर्च होना.
- रूम रेंट की सीमा (Capping) और को-पेमेंट जैसे क्लॉज.
- मेडिकल के अलावा अन्य खर्चे (Non-medical expenses).
- पॉलिसी में दिए गए छोटे-छोटे सब-लिमिट्स.
पॉलिसी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?
बढ़ती उम्र, बेहतर सुविधाएं और इलाज की बढ़ती लागत की वजह से प्रीमियम के दामों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. हालांकि, IRDAI के 2024 के नए नियम यह सुनिश्चित करते हैं कि ग्राहकों से सही कीमत ली जाए और उन्हें पूरी वैल्यू मिले.
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By Soumya Shahdeo
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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