Budget 2026: नारियल, काजू और चंदन के लिए बड़ी घोषणाएं, खेती में 'हाई-वैल्यू' क्रांति

Updated at : 01 Feb 2026 12:25 PM (IST)
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Budget 2026

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Budget 2026: इस बजट में नारियल, काजू, कोको और चंदन जैसी नकदी फसलों के लिए विशेष योजनाओं का ऐलान किया गया है, जिसका सीधा उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और निर्यात में भारत की धाक जमाना है.

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Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 पेश करते हुए भारतीय कृषि क्षेत्र को पारंपरिक फसलों से आगे ले जाकर ‘हाई-वैल्यू’ (उच्च मूल्य) वाली फसलों पर केंद्रित करने का एक नया रोडमैप तैयार किया है. इस बजट में नारियल, काजू, कोको और चंदन जैसी नकदी फसलों के लिए विशेष योजनाओं का ऐलान किया गया है, जिसका सीधा उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और निर्यात में भारत की धाक जमाना है.

नारियल संवर्धन योजना (Coconut Promotion Scheme)

  • नारियल की खेती में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए एक नई योजना शुरू की जाएगी.
  • लक्ष्य: उत्पादन और उत्पादकता में सुधार करना.
  • रणनीति: मुख्य नारियल उत्पादक राज्यों में पुराने और अनुत्पादक पेड़ों को हटाकर उनकी जगह अधिक उपज देने वाले (High-yielding) नए पौधे लगाए जाएंगे.

काजू और कोको: 2030 तक ‘ग्लोबल ब्रांड’ बनाने का लक्ष्य

  • भारत को कच्चे काजू और कोको के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक समर्पित कार्यक्रम की घोषणा की गई है.
  • सरकार का लक्ष्य भारतीय काजू और कोको को 2030 तक प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड के रूप में स्थापित करना है.
  • इसमें उत्पादन के साथ-साथ प्रोसेसिंग (प्रसंस्करण) और निर्यात पर विशेष जोर दिया जाएगा.

चंदन की विरासत की बहाली

चंदन को भारत की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बताते हुए वित्त मंत्री ने ‘इंडियन सैंडलवुड इकोसिस्टम’ को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया.
केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर चंदन की लक्षित खेती और ‘पोस्ट-हार्वेस्ट प्रोसेसिंग’ (कटाई के बाद का प्रबंधन) को बढ़ावा देगी.

सूखे मेवे और बागवानी में सुधार

  • अखरोट, बादाम और चिलगोजा (Pine nuts) जैसे महंगे सूखे मेवों के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान हैं.
  • पुराने और कम उपज देने वाले बागानों का कायाकल्प किया जाएगा.
  • हाई-डेंसिटी (सघन) खेती का विस्तार होगा, जिससे युवाओं को रोजगार मिलेगा और वैल्यू एडिशन के जरिए किसानों की कमाई बढ़ेगी.

पशुपालन: रोजगार और आधुनिकीकरण

  • पशुपालन क्षेत्र में ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है:
  • क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी: रोजगार सृजन के लिए ऋण आधारित सब्सिडी दी जाएगी.
  • एकीकृत वैल्यू चेन: डेयरी, पोल्ट्री और पशुधन के लिए आधुनिक वैल्यू चेन बनाई जाएगी.
  • FPO को बढ़ावा: पशुपालक किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के गठन को प्रोत्साहित किया जाएगा.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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