चांदी खरीदना अब नहीं होगा आसान! सरकार ने इम्पोर्ट के नियमों को किया सख्त

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Silver Import Policy

Silver Import Policy (Photo: Freepik)

Silver Import Policy: चांदी का इम्पोर्ट बढ़ने से सरकार ने नियमों को काफी सख्त कर दिया है. जानिए सोलर पैनल और मोबाइल बनाने वाली इंडस्ट्रीज पर इस नए फैसले का क्या असर होगा.

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Silver Import Policy: भारत सरकार ने देश में चांदी के बढ़ते इम्पोर्ट को रोकने और विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) को बचाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. मंगलवार को सरकार ने चांदी के कुछ खास कैटेगरीज के इम्पोर्ट नियमों को काफी कड़ा कर दिया है. अब किसी भी एजेंसी या बैंक को चांदी भारत लाने के लिए सरकार से स्पेशल मंजूरी लेनी होगी. आइए जानते हैं कि इस फैसले का क्या मतलब है और सरकार ने ऐसा क्यों किया.

सरकार ने क्या नया नियम बनाया है?

अब तक आरबीआई (RBI) और डीजीएफटी (DGFT) द्वारा तय की गई एजेंसियां, बैंक और आईएफएससीए (IFSCA) से मान्यता प्राप्त ज्वेलर्स सीधे तय माध्यमों जैसे इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (IIBX) के जरिए चांदी का इम्पोर्ट कर लेते थे. लेकिन अब नया नियम आने के बाद ऐसा नहीं होगा. अब चाहे कोई बैंक हो, बड़ी एजेंसी हो या कोई बड़ा ज्वेलर अगर उन्हें चांदी का पाउडर, चांदी के दाने (जिसमें 99.9% या उससे ज्यादा शुद्धता हो) या बिना तराशी गई चांदी भारत मंगानी है, तो उन्हें डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेक्स ट्रेड (DGFT) से एक वैलिड ‘इम्पोर्ट ऑथराइजेशन’ यानी लिखित मंजूरी लेनी ही होगी. हालांकि, चांदी रिफाइन करने वाली कंपनियों के लिए ‘सिल्वर डोरे’ (कच्ची चांदी) मंगाने के नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है, वे पहले की तरह लाइसेंस और एक्चुअल यूजर शर्त के तहत इसे मंगा सकेंगे.

आखिर सरकार को यह सख्त कदम क्यों उठाना पड़ा?

इस फैसले के पीछे दो मुख्य वजहें हैं:

  1. इम्पोर्ट में भारी उछाल: देश में चांदी की मांग और इसका इम्पोर्ट बहुत तेजी से बढ़ रहा था. साल 2025-26 में चांदी का इम्पोर्ट करीब 150 फीसदी बढ़कर 12 अरब डॉलर पर पहुंच गया था. वहीं, सिर्फ अप्रैल महीने में ही यह पिछले साल के मुकाबले 157 फीसदी बढ़कर 411 मिलियन डॉलर हो गया था.
  2. विदेशी मुद्रा पर दबाव: मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट की वजह से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर काफी दबाव है. गैर-जरूरी चीजों के इम्पोर्ट को कम करने के लिए सरकार ने पिछले महीने ही सोने और चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) बढ़ाकर 15 फीसदी कर दी थी, और अब इस नए नियम से सरकार इम्पोर्ट पर पूरी तरह नजर रखना चाहती है.

आम जनता और बिजनेस पर इसका क्या असर पड़ेगा?

भारत अपनी जरूरत की ज्यादातर चांदी यूएई (UAE), ब्रिटेन (UK) और चीन (China) से इम्पोर्ट करता है. भारत में चांदी का इस्तेमाल सिर्फ गहने या बर्तन बनाने में ही नहीं होता, बल्कि मोबाइल, सोलर पैनल और कई तरह की इंडस्ट्रीज में भी बड़े पैमाने पर होता है. नियम सख्त होने से अब बाजार में चांदी की सप्लाई पूरी तरह सरकार के नियंत्रण में रहेगी. मंजूरी मिलने में वक्त लगने से आने वाले दिनों में चांदी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है, जिससे घरेलू बाजार में इसकी कीमतें प्रभावित हो सकती हैं. सरकार का सीधा मकसद यही है कि बिना जरूरत के भारी मात्रा में चांदी देश में न आए ताकि देश की इकोनॉमी को मजबूती दी जा सके.

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सौम्या शाहदेव

लेखक के बारे में

By सौम्या शाहदेव

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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