पेट्रोल-डीजल के दाम फिर बढ़ेंगे ! इस रिपोर्ट के दावे ने बढ़ाई महंगाई की चिंता
Crisil Report
Crisil Report : आम जनता पर महंगाई का डबल अटैक! पेट्रोल-डीजल ₹2.50 तक और महंगे होने के आसार. 15 मई से अब तक ₹7.50 की बढ़ोतरी, जानिए आपकी रसोई और रोजमर्रा के सामान पर इसका क्या असर होगा.
Crisil Report : ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल में लगी आग के बीच भारतीय उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में एक और बड़े झटके के लिए तैयार रहना होगा. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, तेल कंपनियां अपने घाटे को कम करने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹2.50 प्रति लीटर तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकती हैं.
बता दें कि देश में बीते 15 मई से अब तक महज कुछ ही दिनों में पेट्रोल-डीजल के दामों में करीब ₹7.50 प्रति लीटर का भारी इजाफा पहले ही हो चुका है. क्रिसिल का कहना है कि यदि ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल इसी तरह महंगा होता रहा, तो कंपनियां कुल बढ़ोतरी को ₹10 प्रति लीटर तक ले जा सकती हैं.
महज 10 दिनों में कैसे बढ़े दाम ?
तेल कंपनियों ने ‘डेली प्राइस रिवीजन’ के तहत टुकड़ों में कीमतें बढ़ाकर आम जनता की जेब पर बड़ा असर डाला है.
| तारीख | पेट्रोल | डीजल |
|---|---|---|
| 15 मई | ₹3.00 | ₹3.00 |
| 19 मई | 90 पैसे | 90 पैसे |
| 23 मई | 87 पैसे | 91 पैसे |
| 25 मई | ₹2.61 | ₹2.71 |
अब तक की पेट्रोल में ₹7.38 (लगभग ₹7.40) और डीजल में ₹7.52 प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हुई है.
खुदरा महंगाई (Inflation) पर क्या होगा असर ?
ईंधन की कीमतों में हुई ₹7.50 की यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर हमारी खुदरा महंगाई में 36 बेसिस पॉइंट्स (0.36%) जोड़ देगी. वहीं, अगर यह बढ़ोतरी ₹10 प्रति लीटर के आंकड़े को छूती है, तो महंगाई पर इसका असर बढ़कर 48 बेसिस पॉइंट्स (0.48%) हो जाएगा.
ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग (उत्पादन) की लागत बढ़ेगी, जिससे आने वाले महीनों में रोजमर्रा की चीजें महंगी होना तय है.
मालभाड़ा बढ़ने से बिगड़ेगा रसोई का बजट
भारत में माल ढुलाई (सप्लाई चेन) का करीब 71% हिस्सा सड़क परिवहन (ट्रकों) के जरिए होता है. ट्रक और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों के कुल खर्च में अकेले डीजल की हिस्सेदारी लगभग 42% होती है. डीजल महंगा होने से मालभाड़ा बढ़ेगा, जिसका सीधा असर इन चीजों की कीमतों पर पड़ेगा.
सबसे ज्यादा असर डेयरी प्रोडक्ट्स (दूध, दही, पनीर), चाय, कॉफी, ताजे फल, दालें, मसाले, अंडे, मीट और मछली पर पड़ेगी. दूसरी तरफ गैर-खाद्य सामान भी होंगे महंगे. जैसे कपड़े, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स (टीवी, फ्रिज आदि), लकड़ी के उत्पाद, सीमेंट, सिरेमिक और कंस्ट्रक्शन सामग्रियां. ये सभी उद्योग भारी मात्रा में ट्रांसपोर्ट पर निर्भर हैं. या लागत बढ़ने पर कंपनियां या तो दाम बढ़ाएंगी या फिर पैकेट का साइज छोटा कर देंगी.
क्यों आ रही है ईंधन के दामों में इतनी तेजी?
इसकी सबसे मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच भड़का सैन्य संघर्ष है. युद्ध शुरू होने से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल जो 70 डॉलर प्रति बैरल पर था, वह अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुका है. मौजूदा वित्तीय वर्ष (FY27) के शुरुआती दो महीनों में कच्चे तेल की औसत कीमत $112 प्रति बैरल रही है, जो क्रिसिल के पूरे साल के अनुमान ($95) से काफी ज्यादा है.
हालांकि, पिछले साल सितंबर 2025 में सरकार द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और FMCG प्रोडक्ट्स पर की गई GST कटौती से ग्राहकों को थोड़ी राहत जरूर मिल रही है, लेकिन महंगा तेल इस राहत को बेअसर कर रहा है. राहत की बात बस यह है कि मौजूदा महंगाई दर अभी भी आरबीआई के 2-6% के संतोषजनक दायरे (Tolerance Band) के भीतर है.
आपके पास पहुंचने से पहले कैसे तय होती है तेल की कीमत?
कच्चे तेल (बेस प्राइस) पर कई स्तरों के टैक्स और खर्च जुड़ने के बाद यह आपकी गाड़ियों तक पहुंचता है.
- कच्चा तेल (Base Price): भारत अपनी जरूरत का 90% क्रूड आयात करता है, जिसकी कीमत डॉलर और अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय होती है.
- रिफाइनिंग कॉस्ट: कंपनियों द्वारा कच्चे तेल को साफ करने की लागत और उनका अपना मुनाफा.
- एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty): केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला उत्पाद शुल्क और रोड सेस, जो पूरे देश में एक समान होता है.
- डीलर कमीशन: पेट्रोल पंप मालिकों को मिलने वाला उनका तय कमीशन.
- वैट (VAT): सबसे आखिर में राज्य सरकारें अपने हिसाब से लोकल सेल्स टैक्स (VAT) लगाती हैं. चूंकि हर राज्य की वैट दरें अलग होती हैं, इसीलिए अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल के रेट भी अलग होते हैं.
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