ATM से मिल सकते हैं ₹10, ₹20 और ₹50 के नोट, सरकार ने शुरू किया पायलट प्रोजेक्ट

अभी एटीएम से नहीं मिलते छोटे नोट (फोटो क्रेडिट-Canva)
ATM Machine Small Notes: वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि अब तक एटीएम मशीनों से आमतौर पर ₹10, ₹20 और ₹50 के नोट नहीं दिए जाते थे. लेकिन अब छोटे नोट देने के लिए खास तरह के स्मॉल वैल्यू डिस्पेंसर लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है.
ATM Machine Small Notes : अब आने वाले समय में एटीएम से छोटे नोट निकालना आसान हो सकता है. केंद्र सरकार ने ₹10, ₹20 और ₹50 के नोट एटीएम से देने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है. अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में लोगों को एटीएम से छोटे नोट भी मिल सकते हैं.
अभी एटीएम से नहीं मिलते छोटे नोट
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि अब तक एटीएम मशीनों से आमतौर पर ₹10, ₹20 और ₹50 के नोट नहीं दिए जाते थे. लेकिन अब छोटे नोट देने के लिए खास तरह के स्मॉल वैल्यू डिस्पेंसर लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है.
छोटे नोटों की कमी को लेकर उठे थे सवाल
दरअसल संसद में यह सवाल उठाया गया था कि देश के कई हिस्सों में ₹10, ₹20 और ₹50 के नोटों की कमी देखी जा रही है और एटीएम से भी ये नोट नहीं मिलते. इसी के जवाब में सरकार ने बताया कि छोटे नोटों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए यह पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है.
पिछले सालों में कितने नोट छपे
| वित्त वर्ष (Financial Year) | ₹10 के नोट (लाख) | ₹20 के नोट (लाख) | ₹50 के नोट (लाख) |
| 2022-23 | 6,000 | 19,999 | 20,000 |
| 2023-24 | 8,000 | 20,000 | 25,000 |
| 2024-25 | 18,000 | 15,000 | 30,000 |
| 2025-26 (फरवरी तक) | 43,940 | 19,370 | 13,030 |
सरकार का कहना है कि छोटे नोटों की जरूरत सिर्फ नोटों से ही नहीं, बल्कि सिक्कों और डिजिटल पेमेंट से भी पूरी हो रही है. आजकल छोटे लेन-देन में UPI और डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल भी काफी बढ़ गया है.
RBI रखता है मांग पर नजर
सरकार ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार यह देखता रहता है कि बाजार में किस मूल्य के नोटों की कितनी जरूरत है. उसी हिसाब से वह सरकार को नोट छापने और बाजार में जारी करने की सिफारिश करता है. सरकार का कहना है कि देश की जरूरत को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग मूल्य के नोट और सिक्के लगातार बाजार में जारी किए जाते हैं, ताकि लोगों को लेन-देन में परेशानी न हो.
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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