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सावधान! कहीं आपका वॉकी-टॉकी अवैध तो नहीं? सरकार ने फ्लिपकार्ट-अमेजन समेत इन 8 ई-कॉमर्स साइट्स पर लगाया लाखों का जुर्माना

Walkie Talkie Illegal Sale India 2026: अवैध वॉकी-टॉकी की बिक्री को लेकर सरकार ने अमेजन, फ्लिपकार्ट और मेटा समेत 8 ई-कॉमर्स कंपनियों पर ₹44 लाख का जुर्माना लगाया है. बिना लाइसेंस और गलत फ्रीक्वेंसी वाले ये डिवाइस देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन रहे थे, जिसके बाद CCPA ने सख्त नई गाइडलाइंस-2025 भी जारी कर दी हैं.

Walkie Talkie Illegal Sale India 2026: ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स पर सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर अवैध उपकरण बेचना अब कंपनियों को भारी पड़ गया है. सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले वॉकी-टॉकी की बिक्री पर कड़ा रुख अपनाते हुए 8 नामी कंपनियों पर 44 लाख रुपये का सामूहिक जुर्माना लगाया है.

कैसे हुआ बड़ा खुलासा?

जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर हजारों ऐसे वॉकी-टॉकी (Wireless Devices) धड़ल्ले से बिक रहे थे, जिनके पास भारत में बिक्री के लिए अनिवार्य इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल (ETA) सर्टिफिकेट ही नहीं था. नियमों के मुताबिक, बिना लाइसेंस के केवल 446.0 से 446.2 MHz की फ्रीक्वेंसी वाले डिवाइस ही बेचे जा सकते हैं, लेकिन ये कंपनियां नियमों को दरकिनार कर हाई-फ्रीक्वेंसी वाले अनधिकृत डिवाइस बेच रही थीं.

इन कंपनियों की कटी जेब: जुर्माने की पूरी लिस्ट

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, जुर्माना वसूलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है:

  • मीशो, मेटा (फेसबुक मार्केटप्लेस), फ्लिपकार्ट और अमेजन को देना होगा 10-10 लाख रुपए का जुर्माना.
  • जियोमार्ट, चिमिया, टॉक प्रो और मास्कमैन टॉयज. ताजा जानकारी के अनुसार, मीशो और जियोमार्ट ने अपनी गलती मानते हुए जुर्माना भर दिया है, जबकि अन्य कंपनियों पर सख्ती जारी है. जिन्हें 1-1 लाख रुपए का जुर्माना देना होगा.

क्यों खतरनाक हैं ये उपकरण?

CCPA ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी है कि ये अवैध वॉकी-टॉकी कोई साधारण खिलौने नहीं हैं. ये डिवाइस सुरक्षा बलों, पुलिस और इमरजेंसी सेवाओं जैसे एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड के रेडियो सिग्नल में दखल दे सकते हैं. यदि संवेदनशील इलाकों में इनका इस्तेमाल किया जाए, तो यह महत्वपूर्ण सरकारी ऑपरेशन्स को बाधित कर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर सकते हैं.

अब नहीं चलेगा ‘मिडिएटर’ का बहाना

जब कंपनियों से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने खुद को केवल ‘बिचौलिया’ बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की. लेकिन CCPA ने इस तर्क को पूरी तरह ठुकरा दिया. अथॉरिटी का कहना है कि जो प्लेटफॉर्म प्रॉडक्ट की लिस्टिंग से कमाई कर रहे हैं, उन्हें उसकी वैधता सुनिश्चित करनी ही होगी. तकनीकी दौर में अवैध सामान की पहचान करना कंपनियों की जिम्मेदारी है.

अब बदल जाएंगे ऑनलाइन शॉपिंग के नियम

इस मामले के बाद सरकार ने ‘रेडियो इक्विपमेंट गाइडलाइंस-2025’ लागू कर दी हैं. अब किसी भी वायरलेस डिवाइस को ऑनलाइन बेचने से पहले कंपनियों को

  • अनिवार्य रूप से ETA सर्टिफिकेट की जांच करनी होगी.
  • ग्राहकों को लाइसेंस की कानूनी जरूरतों के बारे में साफ शब्दों में बताना होगा.
  • अवैध उपकरणों को खुद-ब-खुद हटाने के लिए AI-बेस्ड ऑटोमैटिक सिस्टम बनाना होगा.

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Anshuman Parashar
Anshuman Parashar
अंशुमान पराशर पिछले दो वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के लिए बिजनेस की लेटेस्ट खबरों पर काम कर रहे हैं. इसे पहले बिहार की राजनीति, अपराध पर भी इन्होंने खबरें लिखी हैं. बिहार विधान सभा चुनाव 2025 में इन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और विस्तृत राजनीतिक कवरेज किया है.

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