भूटानी इंफ्रा को लेकर विपक्ष के निशाने पर गोवा के सीएम, प्रमोद सावंत ने दिया जवाब

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत
Goa: गोवा के दक्षिणी जिले के सांकौले तटीय, वनभूमि और पहाड़ी इलाका है. यहां के निवासी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं. सांकौले निवासी भूटानी इंफ्रा प्रोजेक्ट के खिलाफ हैं. भूटानी इंफ्रा की ओर से प्रायोजित इंजीनियर्स पुरस्कार समारोह में उपस्थिति को लेकर उठे विवाद पर खुद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने जवाब दिया है.
Goa: गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भूटानी इंफ्रा रियल स्टेट को लेकर इन दिनों विपक्ष के निशाने पर हैं. अभी हाल ही में भूटानी इंफ्रा के एक कार्यक्रम में शिरकत करने को लेकर विपक्षी पार्टी गोवा फॉरवर्ड ब्लॉक मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत पर हमलावर हो गई. कार्यक्रम में शिरकत करने पर गोवा फॉरवर्ड ब्लॉक ने कई सवाल खड़े किए. विवाद बढ़ने की स्थिति में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत को जवाब भी देना पड़ा. सोशल मीडिया मंच एक्स पर गोवा फॉरवर्ड पार्टी के अध्यक्ष विजय सरदेसाई ने लिखा कि भूटानी इंफ्रा रियल स्टेट कंपनी के समारोह में भाग लेने के दौरान भूटानी के सैनकोले परियोजना का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं से मिलने से इनकार करने से आश्चर्य होता है कि क्या हमारे सीएम हिल कटिंग बिल्डर्स एसोसिएशन के सीईओ बन गए हैं.
पर्यावरण नुकसान पर गोवा के लोग चुप नहीं बैठेंगे : विजय सरदेसाई
टाइम्स नाऊ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया मंच एक्स पर विजय सरदेसाई ने लिखा कि मुख्यमंत्री को विधानसभा में परियोजना की समीक्षा करने के आश्वासन को नहीं भूलना चाहिए. उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि जनता ही उन्हें चुनती है, बेईमान बिल्डर नहीं. अनियमितताओं के नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं और इन पर कार्रवाई करने से सरकार का इनकार पूरे मंत्रिमंडल को बेईमान बिल्डरों की दलाली करार देता है. सीएमओ के पास भू-माफियाओं के लिए वन विंडो क्लीयरेंस है. गोवा के लोग हमारी पहाड़ियों के हो रहे विनाश पर चुप नहीं रहेंगे और सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करेंगे.
पूर्व पर्यावरण मंत्री ने भी उठाई है आवाज
गोवा के पूर्व पर्यावरण एवं वन मंत्री अलीना सलदान्हा ने इन विकास परियोजनाओं के खिलाफ पहले ही आवाज उठाई है. उन्होंने कहा कि सावंत प्रशासन के तहत निजी वनभूमि की रद्दीकरण की प्रक्रिया गोवा की पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन है. उन्होंने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी सरकार की नीतियां कुछ शक्तिशाली डेवलपर्स को लाभ पहुंचाने के लिए हैं, जो गोवा के पर्यावरणीय धरोहर को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
भूटानी परियोजना का विरोध कर रहा सांकौले समुदाय
सांकौले समुदाय भूटानी इंफ्रा परियोजना के विरोध में मुखर है. इस समुदाय के लोगों का कहना है कि यहां संरक्षण के लिए नामित निजी वन भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है. सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि विकास के लिए इस भूमि का रूपांतरण संदिग्ध परिस्थितियों में किया गया है. दरअसल, 15 सितंबर को भूटानी इंफ्रा का कार्यक्रम हुआ था. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सावंत शामिल हुए थे. मुख्यमंत्री के शामिल होने का स्थानीय लोगों ने विरोध किया था. प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री से जवाब मांगने के लिए कार्यक्रम स्थल के बाहर एकजुट हो गए थे.
गोवा में भूटानी और डीएलएफ परियोजना की होगी जांच : प्रमोद सावंत
भूटानी इंफ्रा की ओर से प्रायोजित इंजीनियर्स पुरस्कार समारोह में उपस्थिति को लेकर उठे विवाद पर खुद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने जवाब दिया है. सीएम प्रमोद सावंत ने कहा कि उनका भूटानी से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम एक निजी समारोह था, जिसका सरकार या भूटानी से कोई संबंध नहीं है. गोवा सरकार ने कहा कि स्थानीय लोगों के विरोध के मद्देनजर राज्य में रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ और भूटानी इंफ्रा प्रोजेक्ट की परियोजनाओं को दी गई अनुमतियों की नए सिरे से जांच की जाएगी. गोवा के नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री विश्वजीत राणे ने कहा कि उनका विभाग दक्षिण गोवा जिले के संकोले में भूटानी इंफ्रा की परियोजना की जांच करेगा.
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क्या है सांकौले विवाद
गोवा के दक्षिणी जिले के सांकौले तटीय, वनभूमि और पहाड़ी इलाका है. यहां के निवासी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं. सांकौले निवासी भूटानी इंफ्रा प्रोजेक्ट के खिलाफ हैं. सांकौले समुदाय के लोगों का आरोप है कि सरकार निजी वनभूमि को बिल्डरों और रियल एस्टेट कंपनियों के हाथों में सौंप रही है. उनका कहना है कि यह भूमि पर्यावरण संरक्षण के लिए निर्धारित थी और इसे संदिग्ध परिस्थितियों में रियल एस्टेट डेवलपर्स के लाभ के लिए इसे बदल दिया गया है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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