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Economic Survey: रेल नेटवर्क विस्तार में 10% की गिरावट, डिब्बों और इंजन का उत्पादन बढ़ा

Updated at : 31 Jan 2025 8:20 PM (IST)
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Economic Survey

आर्थिक सर्वेक्षण में रेल नेटवर्क और वंदे भारत ट्रेन की चर्चा.

Economic Survey: आर्थिक सर्वेक्षण 2024 के अनुसार, रेलवे नेटवर्क विस्तार 10% घटा लेकिन डिब्बों और इंजनों के उत्पादन में वृद्धि हुई. वंदे भारत ट्रेनों का विस्तार भी जारी है. जानिए रेलवे में हुए बदलावों की पूरी जानकारी

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Economic Survey: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 को पेश कर दिया है. इस आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने के कई महत्वपूर्ण तथ्यों का जिक्र किया गया है. आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में रेलवे नेटवर्क के विस्तार में लगभग 10% की कमी आई है, लेकिन रेल डिब्बों और इंजनों के उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

रेलवे नेटवर्क विस्तार में कमी

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-नवंबर 2023-24 में 2,282 किलोमीटर नया रेलवे नेटवर्क चालू किया गया था, जबकि 2024-25 की समान अवधि में यह घटकर 2,031 किलोमीटर रह गया. इससे संकेत मिलता है कि रेलवे के बुनियादी ढांचे के विस्तार की गति थोड़ी धीमी हुई है.

डिब्बों और इंजनों के उत्पादन में बढ़ोतरी

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि, रेल से संबंधित उत्पादन में सुधार देखने को मिला है. रेल डिब्बों का उत्पादन बढ़कर 26,148 यूनिट हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 22,042 था. इंजन उत्पादन भी 968 से बढ़कर 1,042 यूनिट हो गया.

वंदे भारत ट्रेनों का विस्तार जारी

आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2023-24 में 41 नई वंदे भारत ट्रेनों की शुरुआत की गई थी. 2024-25 में अक्टूबर तक, देश के विभिन्न गंतव्यों के लिए 17 नई वंदे भारत ट्रेनें शुरू की गईं.

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रेलवे विकास की दिशा

रेलवे नेटवर्क विस्तार की गति में आई गिरावट चिंताजनक हो सकती है, लेकिन डिब्बों और इंजनों के बढ़ते उत्पादन से रेलवे के आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा. वंदे भारत ट्रेनों का विस्तार भी इस बात का संकेत है कि सरकार रेलवे को अधिक तेज, आधुनिक और कुशल बनाने के लिए काम कर रही है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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