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Diwali Shopping Tips: दिवाली में जरा संभल के करें ऑनलाइन शॉपिंग वर्ना लग जाएगा चूना, जानें ठगों से बचने के 5 जरूरी टिप्स

Updated at : 16 Oct 2025 5:49 PM (IST)
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Diwali Shoping Tips

दिवाली में ऑनलाइन ठगों से सावधान रहें.

Diwali Shopping Tips: दिवाली शॉपिंग के दौरान अगर आप डिजिटल पेमेंट करते हैं, तो सावधान रहें. त्योहारी सीजन में ऑनलाइन ठग नकली वेबसाइट्स और लिंक के जरिए लोगों से धोखाधड़ी करते हैं. सुरक्षित प्लेटफॉर्म से ही पेमेंट करें, ओटीपी या बैंक डिटेल किसी से साझा न करें और प्रमोशनल ईमेल या एसएमएस लिंक से बचें. एनपीसीआई की सलाह मानें और सतर्क रहकर ही खरीदारी करें, ताकि आपके ट्रांजैक्शन सुरक्षित रहें और धोखाधड़ी से बचाव हो सके.

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Diwali Shopping Tips: अगर आप दिवाली की शॉपिंग करने जा रहे हैं और आप ऑनलाइन डिजिटल पेमेंट करते हैं, तो ये काम जरा संभल के करें. ऑनलाइन डिजिटल पेमेंट करना कोई बुरी बात नहीं है. दिक्कत इस बात की है कि अगर आपने पेमेंट करने में कोई छोटी सी गलती कर दी, तो यह आपके लिए भारी पड़ जाएगा. दिवाली में जो लोग ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, ज्यादातर कंपनियां कस्टमर्स को आकर्षित करने के लिए कई ब्रांड आकर्षक डिस्काउंट, लिमिटेड-टाइम सेल और कैशबैक ऑफर ला रहे हैं, ताकि जल्दी खरीदारी को बढ़ावा दिया जा सके.

कंपनियां कस्टमर के व्यवहार और खरीदारी के पैटर्न को अच्छी तरह जानते हैं, जिसका फायदा वे त्योहारों के मौसम में बिक्री बढ़ाने के लिए उठाते हैं। हालांकि, बिना सोचे-समझे खरीदारी करने और अनरियलिस्टिक डील्स के चक्कर में पड़ने से खरीदार ऑनलाइन ठगी के शिकार हो सकते हैं. आज की डिजिटल दुनिया में धोखेबाज बैंक अकाउंट तक पहुंचने के लिए टेक्नोलॉजी और ऑनलाइन पेमेंट में गलतियों का फायदा उठाते हैं. ऐसे में आपकी सतर्कता और कुछ जरूरी डिजिटल पेमेंट सिक्योरिटी टिप्स को फॉलो करने से यह पक्का करने में मदद मिल सकती है कि आपके ट्रांजैक्शन सुरक्षित रहें. आइए, उन टिप्स के बारे में जानते हैं.

प्रमोशनल ईमेल, एसएमएस या फॉवर्डेड मैसेज से बचें

त्योहारी सीजन के दौरान ऑनलाइन ठग अक्सर कंपनियों से मिलती-जुलती ही वेबसाइट्स बनाते हैं और खरीदारों को पर्सनल और पेमेंट जानकारी चुराने के लिए नकली लिंक भेजते हैं. खरीदारी करते समय हमेशा वेब एड्रेस खुद टाइप करें या ब्रांड के ऑफिशियल ऐप का इस्तेमाल करें. नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) सलाह देता है कि प्रमोशनल ईमेल, एसएमएस या फॉरवर्ड किए गए मैसेज में दिए गए लिंक से बचें और कभी भी अनजान सोर्स से फाइलें डाउनलोड न करें.

सुरक्षित प्लेटफॉर्म से ही पेमेंट करें

अधिकतर लोगों ने कुछ ऐसे स्कैम देखे हैं, जिनमें धोखेबाज लोग सिक्योरिटी चेक को नजरअंदाज करते हुए लोगों को शॉपिंग ऐप या साइट के बाहर बाहरी यूपीआई आईडी या लिंक भेजते हैं. एक जिम्मेदार व्यक्ति के तौर पर पक्का करें कि आप सेलर की डिटेल्स कन्फर्म करें और ऑफिशियल चेकआउट पेज पर ट्रांजैक्शन पूरे करें.

वाउचर और कैशबैक ऑफर से सावधान रहें

त्योहारी सीजन के दौरान स्कैमर रिवॉर्ड, गिफ्ट और कैशबैक के वादे वाले मैसेज के जरिए लोगों को धोखा देने की कोशिश करते हैं. वे आपके मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी, कुछ छोटी फीस या बैंक अकाउंट की डिटेल्स भी मांग सकते हैं. ध्यान रखें कि असली ऑफर कस्टमर से सेंसिटिव जानकारी देने या कोई भी पहले पेमेंट करने के लिए नहीं कहते हैं.

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अनजाने लोगों को अनचाहे ओटीपी देने से बचें

अगर आपको कोई मैसेज मिलता है, जिसमें दावा किया जाता है कि पेमेंट फेल हो गया है या अकाउंट ब्लॉक हो गया है और आपसे समस्या को ठीक करने के लिए भेजा गया ओटीपी देने के लिए कहा जाता है, तो इस बात की बहुत ज्यादा संभावना है कि यह एक स्कैम है. वन-टाइम पासवर्ड यूजर द्वारा शुरू किए गए ट्रांजैक्शन को कन्फर्म करने के लिए होता है. बैंक और पेमेंट ऐप कभी भी कॉल या मैसेज के जरिए ओटीपी नहीं मांगते हैं.

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किसी भी परिस्थिति में घबराएं नहीं

कई ऑनलाइन ठग आप पर दबाव बनाने की तरकीबें अपनाते हैं और दावा करते हैं कि अगर आपने तुरंत कार्रवाई नहीं की तो ऑफर खत्म हो जाएगा. ये तरकीबें घबराहट पैदा करने और आपको पेमेंट करने या ओटीपी शेयर करने के लिए उकसाने के लिए बनाई जाती हैं, जिससे आपका बैंक अकाउंट खतरे में पड़ सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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