ATM फ्रॉड मामले में बैंक को देना होगा 5 लाख मुआवजा, कंज्यूमर कोर्ट का बड़ा फैसला

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ATM Fraud

सांकेतिक तस्वीर (फोटो क्रेडिट Canva)

ATM Fraud: कंज्यूमर कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया को 65 साल की महिला को ₹5 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया। महिला के खाते से ATM के जरिए करीब ₹12 लाख बिना अनुमति के निकाल लिए गए थे.

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ATM Fraud: महाराष्ट्र के कंज्यूमर आयोग ने एक अहम फैसले में बैंक की जिम्मेदारी को लेकर बड़ा संदेश दिया है. आयोग ने बैंक ऑफ इंडिया को एक 65 साल की महिला को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है. महिला के खाते से करीब 12 लाख रुपये से ज्यादा की रकम ATM के जरिए बिना अनुमति के निकाल ली गई थी.

क्या है पूरा मामला

यह मामला एक 65 साल की महिला से जुड़ा है, जिन्होंने साल 2010 में बैंक में सेविंग अकाउंट खुलवाया था. उन्होंने अपने घर की बिक्री से मिले पैसे इस खाते में जमा किए थे. बाद में महिला ने शिकायत की कि उनके खाते से करीब 12.47 लाख रुपये ATM ट्रांजैक्शन और खरीदारी के जरिए निकाल लिए गए. इन पैसों से ज्वेलरी, वाइन और टीवी जैसी चीजें खरीदी गई थीं. महिला का कहना था कि उन्होंने ये ट्रांजैक्शन नहीं किए.

बैंक ने क्या दलील दी

बैंक का कहना था कि यह काम किसी तीसरे व्यक्ति (फ्रॉड करने वाले) ने किया होगा. बैंक ने दावा किया कि उसने ग्राहक को डेबिट कार्ड और PIN वाला वेलकम किट दिया था और ग्राहक ने इसे लेने की पुष्टि भी की थी. लेकिन जांच के दौरान एक अहम बात सामने आई. बैंक के दस्तावेज में लिखा था कि महिला ने बैंक अधिकारियों के सामने डेबिट कार्ड के सिग्नेचर बैंड पर साइन किए थे. महिला ने कहा कि उन्होंने कभी उस पर साइन नहीं किया.

आयोग ने क्या कहा

कंज्यूमर आयोग ने कहा कि सिग्नेचर बैंड पर साइन करना सिर्फ औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह कार्ड के सही उपयोग और पहचान के लिए जरूरी सुरक्षा कदम है. आयोग ने यह भी कहा कि जब ग्राहक बुजुर्ग या कम पढ़े-लिखे हों, तो बैंक की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है.

ऐसे मामलों में बैंक को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए. आयोग ने माना कि हर फ्रॉड के लिए बैंक को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बैंक अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह बच जाए. इसी आधार पर आयोग ने बैंक को 5 लाख रुपये मुआवजा और 25 हजार रुपये केस के खर्च के रूप में देने का आदेश दिया.

छोटे डिजिटल फ्रॉड पर RBI का प्रस्ताव

इसी बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने छोटे डिजिटल फ्रॉड के मामलों में ग्राहकों को राहत देने का प्रस्ताव दिया है. प्रस्ताव के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति 5 दिनों के अंदर फ्रॉड की शिकायत करता है, तो उसे हुए नुकसान का 85% तक पैसा वापस मिल सकता है. हालांकि इसकी अधिकतम सीमा 25,000 रुपये होगी.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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