केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बल के कर्मचारियों को मिलेगा पुरानी पेंशन योजना का लाभ, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया आदेश

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केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बल में विभिन्न पदों के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित करने वाला विज्ञापन जून 2002 में जारी किया गया था. चयन प्रक्रिया के बाद अभ्यर्थियों को अक्टूबर 2004 से 2005 तक की अवधि के दौरान नियुक्तियों की पेशकश की गई थी.
नई दिल्ली : केंद्र सरकार के अधीन कार्यरत केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बल (सीएपीएफ) कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है और वह यह कि राजस्थान, झारखंड और छत्तीसगढ़ के कर्मचारियों की तरह पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलेगा. लेकिन, केंद्रीय कर्मचारियों में उन्हीं लोगों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलेगा, जो केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) में काम करते हैं. इसके लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है.
मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने मोदी सरकार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के उन सभी कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) का लाभ देने का आदेश दिया है, जिनकी भर्ती प्रक्रिया 1 जनवरी, 2004 से पहले शुरू हुई थी. न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्ण की पीठ ने केंद्र को दिए आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि पुरानी पेंशन योजना का लाभ उन सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के कर्मचारियों पर भी लागू होगा, जिन्होंने अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाया था.
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने यह फैसला केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) के कर्मचारियों द्वारा दायर 82 याचिकाओं पर सुनाया है. याचिकाकर्ताओं ने 1 जनवरी, 2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने की मांग की थी, लेकिन उस तिथि से पहले अपने पदों के लिए आवेदन किया था.
याचिकाकर्ताओं के वकील अंकुर चिब्बर ने तर्क दिया कि केंद्रीय सशस्त्र सुरक्षा बल में विभिन्न पदों के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित करने वाला विज्ञापन जून 2002 में जारी किया गया था. चयन प्रक्रिया के बाद अभ्यर्थियों को अक्टूबर 2004 से 2005 तक की अवधि के दौरान नियुक्तियों की पेशकश की गई थी. इस बीच, 22 दिसंबर, 2003 को एक अधिसूचना द्वारा केंद्र ने 1 जनवरी, 2004 से नई अंशदायी पेंशन योजना (एनपीएस) को लागू किया था.
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याचिकाकर्ताओं ने पुरानी पेंशन योजना के लाभों की मांग करने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिन्हें 17 फरवरी, 2020 के एक कार्यालय ज्ञापन के मद्देनजर अस्वीकार कर दिया गया था. इसके तहत पुरानी पेंशन योजना का लाभ केवल उन्हीं उम्मीदवारों तक सीमित थे, जो 31 दिसंबर, 2003 को या उससे पहले उत्पन्न होने वाली रिक्तियों के खिलाफ भर्ती किए गए थे और जिनका चयन किया गया था. परिणाम 1 जनवरी, 2004 को या उससे पहले घोषित किए गए थे.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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