Budget 2023 : मिलिए उन 'बजट वीरों' से, जिन्होंने सरकार का नहीं; आपका 'लेखा' किया तैयार

इस साल के बजट से भी लोगों की काफी उम्मीदें जुड़ी हैं. नौकरी-पेशा और पेंशनधारी इनकम टैक्स में छूट की सीमा बढ़ाने की उम्मीद पाले बैठे हैं, तो आम आदमी महंगाई कम होने की बाट जोह रहा है. विद्यार्थी एजुकेशन लोन सस्ता और आसान होने की आस में हैं, तो महिलाओं को रसोई का बजट कम होने के आसार नजर आ रहे हैं.
नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2023 को अपना चौथा केंद्रीय बजट पेश करेंगी. उन्होंने कोरोनोवायरस महामारी के दो उथल-पुथल वाले वर्षों के दौरान वित्त मंत्रालय का नेतृत्व किया है और महामारी से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने में मदद करने के लिए कई आर्थिक राहत पैकेज दिए हैं. इस साल के बजट से भी लोगों की काफी उम्मीदें जुड़ी हैं. नौकरी-पेशा और पेंशनधारी इनकम टैक्स में छूट की सीमा बढ़ाने की उम्मीद पाले बैठे हैं, तो आम आदमी महंगाई कम होने की बाट जोह रहा है. विद्यार्थी एजुकेशन लोन सस्ता और आसान होने की आस में हैं, तो महिलाओं को रसोई का बजट कम होने के आसार नजर आ रहे हैं. उद्योग जगत प्रोत्साहन पैकेज की उम्मीद कर रहा है, तो अमीर और धनकुबेर अपनी तिजोरी के आकार को और बढ़ाना चाह रहे हैं. इसलिए बजट देश के हर वर्ग के लोगों के लिए आवश्यक है, लेकिन बजट को आकार देने वाली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की कोर टीम के बारे में कितने लोग जानते हैं? आइए, मिलते हैं कोर टीम के अफसरों से…
10 मई 1965 को जन्मे टीवी सोमनाथन तमिलनाडु कैडर से 1987 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं. इस समय वे केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन कार्यरत व्यय विभाग में वित्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं. इसके पहले वह प्रधानमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त सचिव और संयुक्त सचिव थे. इतना ही नहीं, वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से प्रतिनियुक्ति पर विश्व बैंक और वाशिंगटन डीसी में निदेशक के रूप में कार्यरत थे.
आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1987 बैच के कर्नाटक कैडर के अधिकारी हैं. इससे पहले, अजय सेठ बेंगलुरु मेट्रो रेल निगम में प्रबंध निदेशक के तौर पर काम कर चुके हैं. वर्ष 2000 से 2004 तक अजय सेठ वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग और आर्थिक मामलों के विभाग में उपसचिव और निदेशक रह चुके हैं. इसके बाद 2004 से 2008 के दौरान वे एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के कार्यकारी निदेशक के सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं.
तुहिन कांता पांडेय भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में 1987 बैच के ओडिशा कैडर के अधिकारी हैं. इन्होंने चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और ब्रिटेन से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत ओडिशा राज्य वित्त निगम और ओडिशा स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन कार्यकारी निदेशक और प्रबंध निदेशक के पद से की. इसके बाद वे संभलपुर में जिलाधिकारी के तौर पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
विवेक जौहरी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1984 बैच के अधिकारी हैं. सीबीआईसी के अध्यक्ष बनने से पहले वे मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. इतना ही नहीं, वे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक के पद पर भी काम कर चुके हैं.
नितिन गुप्ता भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1986 बैच के अधिकारी हैं. इससे पहले वे भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के महानिदेशक के पद पर काम कर चुके हैं.
वर्ष 1963 में जन्मे वेंकटरमण अनंत नागेश्वरन भारत के एक अर्थशास्त्री हैं और भारत सरकार के 18वें मुख्य आर्थिक सलाहकार हैं. इससे पहले, वे स्विट्जरलैंड में बैंक जुलियस बेयर में वैश्विक मुख्य निवेश अधिकारी के शोध प्रमुख के तौर पर काम कर चुके हैं. इसके अलावा, उन्होंने आईएफएमआर ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन के रूप में सिंगापुर प्रबंधन विश्वविद्यालय में स्नातक छात्रों के लिए प्रोफेसर के रूप में और भारतीय प्रबंधन संस्थान बैंगलुरु और भारतीय प्रबंधन संस्थान इंदौर में अपनी सेवाएं दी हैं.
विवेक जोशी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 1989 बैच के अधिकारी हैं. वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव का पद संभालने से पहले गृह मंत्रालय के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त के तौर पर काम कर चुके हैं.
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संजय मल्होत्रा भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के राजस्थान कैडर के 1990 बैच के अधिकारी हैं. इससे पहले वह वित्तीय सेवा विभाग में सचिव के पद पर थे.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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