Budget 2025 Expectations: क्या बीमा कंपनियों को मिलेगी बड़ी राहत ? बजट में कर छूट और सुधारों की मांग

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Budget 2025 Expectations

क्या बीमा कंपनियों को मिलेगी बड़ी राहत ? बजट में कर छूट और सुधारों की मांग

Budget 2025 Expectations: बीमा कंपनियां कर छूट और सुधारों की उम्मीद कर रही हैं, जिससे उद्योग में सुधार हो और ग्राहकों को लाभ मिले. क्या मिलेगा बड़ा राहत?

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Budget 2025 Expectations In EMI: भारत में बीमा उद्योग 2025-26 के केंद्रीय बजट का बेसब्री से इंतजार कर रहा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी, जिससे बीमा कंपनियों को कर लाभ और आर्थिक रियायतों की उम्मीद है. खासतौर पर बीमा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उद्योग के सामने कई चुनौतियां और अवसर मौजूद हैं.

बीमा क्षेत्र को कर लाभ की अपेक्षा

एसबीआई जनरल इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ नवीन चंद्र झा ने ‘बीमा सुगम’ जैसे प्रयासों की जरूरत पर बल दिया है, जिससे बीमा क्षेत्र को 2047 तक ‘सभी के लिए बीमा’ का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिल सके. इसके साथ ही, पीबीफ़िनटेक के संयुक्त समूह सीईओ सरबवीर सिंह ने धारा 80सी और 80डी के तहत कर लाभ की सीमा बढ़ाने की बात कही. वर्तमान में 1.5 लाख रुपये की सीमा वित्तीय योजनाओं के लिए अपर्याप्त साबित हो रही है.

बजाज एलियांज लाइफ के एमडी तरुण चुघ ने सुझाव दिया कि जीवन बीमा उत्पादों को राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए. उन्होंने वार्षिकी उत्पादों पर कर संबंधी समस्याओं को हल करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

बीमा प्रवेश और जागरूकता की चुनौतियां

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) की रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में बीमा पैठ घटकर 3.7 प्रतिशत रह गई. जीवन बीमा पैठ 2.8 प्रतिशत और गैर-जीवन बीमा पैठ मात्र 1 प्रतिशत रही.

इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस के एमडी सुब्रत मंडल का मानना है कि सरकार को इस बजट के जरिए बीमा उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए. पीएनबी मेटलाइफ के एमडी समीर बंसल ने रिटायरमेंट योजनाओं को मजबूत करने और पेंशन योजनाओं के लिए प्रोत्साहन देने की उम्मीद जताई.

उद्योग की बढ़ती अपेक्षाएं

बीमा क्षेत्र को उम्मीद है कि बजट 2025 में ऐसे सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे जो वित्तीय नियोजन को सरल बनाएं और बीमा क्षेत्र को प्रोत्साहित करें. कर लाभ की सीमा में वृद्धि और नीतिगत बदलाव न केवल बीमा उत्पादों की मांग को बढ़ाएंगे बल्कि देश में वित्तीय सुरक्षा को भी मजबूत करेंगे.

बीमा कंपनियों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों के लिए भी यह बजट महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. अब देखना होगा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार के बजट में क्या नई घोषणाएं करती हैं.

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Abhishek Pandey

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By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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