आपकी जेब पर बैंकों का डाका, मिनिमम बैलेंस के नाम पर उड़ा लिये करोड़ों रुपये
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 28 Mar 2025 5:36 PM
Minimum Balance Penalty
Minimum Balance Penalty: बैंक ग्राहकों से मिनिमम बैलेंस न रखने पर भारी पेनल्टी वसूल रहे हैं. 2023-24 में 11 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 2,331 करोड़ रुपये मिनिमम बैलेंस पेनल्टी के रूप में वसूले. पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक सबसे आगे रहे. आरबीआई के नियमों के बावजूद, कई बैंक छुपे हुए चार्ज और अन्य शुल्क लगाकर ग्राहकों की जेब पर असर डाल रहे हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 2020 में यह पेनल्टी हटा दी थी.
Minimum Balance Panalty: बैंक आम जनता के वित्तीय लेनदेन के लिए सबसे भरोसेमंद संस्थान माने जाते हैं, लेकिन राज्यसभा आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने बैंकों की ओर से लगाए जा रहे हिडेन चार्ज और पेनल्टी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि बैंक मिनिमम बैलेंस न रखने पर पेनल्टी, अतिरिक्त एटीएम ट्रांजैक्शन फीस, स्टेटमेंट चार्ज, इनएक्टिविटी फीस और एसएमएस अलर्ट चार्ज जैसी फीस वसूलकर ग्राहकों की जेब पर भारी बोझ डाल रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार, बैंकों ने सिर्फ मिनिमम बैलेंस पेनल्टी के जरिए 2022-23 में 3500 करोड़ रुपये ग्राहकों से वसूल किए.
बैंक ग्राहकों से वसूल रहे भारी भरकम पेनल्टी
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 में 11 पब्लिक सेक्टर बैंकों ने बचत खातों में न्यूनतम बैलेंस न रखने पर 2,331 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला. यह राशि पिछले वित्त वर्ष 2022-23 की तुलना में 25.63% अधिक थी, जब इन बैंकों ने 1,855.43 करोड़ रुपये का शुल्क लिया था.
सबसे अधिक मिनिमम बैलेंस पेनल्टी वसूलने वाले बैंक:
- पंजाब नेशनल बैंक: 633.4 करोड़ रुपये
- बैंक ऑफ बड़ौदा: 386.51 करोड़ रुपये
- इंडियन बैंक: 369.16 करोड़ रुपये
दूसरे 11 सरकारी बैंकों में बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूको बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने भी बीते तीन सालों में ग्राहकों से 5614 करोड़ रुपये मिनिमम बैलेंस न रखने के कारण पेनल्टी के रूप में वसूले.
RBI के नियम क्या कहते हैं?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, बैंकों को खाते खोलते समय ग्राहकों को न्यूनतम बैलेंस की जानकारी देना जरूरी है. अगर बैंक अपने नियमों में कोई बदलाव करता है, तो उसे ग्राहकों को पूर्व सूचना देनी होगी. इसके अलावा, बैंक बैलेंस न रखने पर ग्राहकों को पहले नोटिस देंगे और कम से कम एक महीने का समय देंगे. आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि पेनल्टी की वजह से किसी भी ग्राहक के खाते में नेगेटिव बैलेंस नहीं होना चाहिए.
SBI ने 2020 में खत्म किया मिनिमम बैलेंस चार्ज
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने 2020 में अपने ग्राहकों को राहत देते हुए मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाली पेनल्टी को समाप्त कर दिया. दूसरे बैंकों से भी ग्राहकों को ऐसी ही राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है.
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ग्राहकों से भारी शुल्क वसूलना विवादास्पद
बैंकिंग सेवाओं के नाम पर आम ग्राहकों से भारी शुल्क वसूलने की यह नीति विवादास्पद है. RBI ने बैंकों को पारदर्शिता बरतने और ग्राहकों को सही जानकारी देने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अब भी कई बैंक हिडन चार्जेज और मिनिमम बैलेंस पेनल्टी के जरिए करोड़ों रुपये वसूल रहे हैं. ग्राहकों को अपने बैंक के नियमों को ध्यान से पढ़ना चाहिए और जहां संभव हो, ऐसे खातों का चयन करना चाहिए, जिनमें मिनिमम बैलेंस की अनिवार्यता न हो.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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