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GST :नौ घंटे की बहस में सुलझ गया पिछले 17 साल से फंसा कर सुधार का पेच

Updated at : 30 Mar 2017 7:55 AM (IST)
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GST :नौ घंटे की बहस में सुलझ गया पिछले 17 साल से फंसा कर सुधार का पेच

नयी दिल्ली : लोकसभा ने बुधवार को नौ घंटे की बहस के बाद वस्तु एवं सेवा कर से जुड़े चार विधेयकों को मंजूरी दे दी. आने वाले दिनों में (संभवत: एक जुलाई से) देश में नयी कर व्यवस्था लागू होगी और इसका असर हर सेक्टर पर पड़ेगा. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर […]

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नयी दिल्ली : लोकसभा ने बुधवार को नौ घंटे की बहस के बाद वस्तु एवं सेवा कर से जुड़े चार विधेयकों को मंजूरी दे दी. आने वाले दिनों में (संभवत: एक जुलाई से) देश में नयी कर व्यवस्था लागू होगी और इसका असर हर सेक्टर पर पड़ेगा. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर किस सेक्टर पर इसका क्या असर होगा. सेवा (रेस्टूरेंट में खाना, हवाई यात्रा व रेल टिकट आदि) महंगे होंगे, तो आम लोगों के उपभोग वाली ज्यादातर चीजें सस्ती हो जायेंगी. छोटी कारें, एसयूवी, बाइक, पेन व सीमेंट सस्ते होंगे. तंबाकू, सिगरेट आदि की कीमतें बढ़ जायेंगी, क्योंकि इन्हें विलासिता की श्रेणी में रखा गया है. इन पर उप कर भी लगेगा.

जानिए जीएसटी के बारे में सब कुछ

गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष कर है. जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है. यानी वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स जैसे करों की जगह सिर्फ एक ही टैक्स लगेगा.

चार टैक्स स्लैब

जीएसटी में चार टैक्स स्लैब हैं – 5, 12,18 और 28 फीसदी. किस टैक्स स्लैब में कौन सामान होगा, इस पर अभी जीएसटी काउंसिल को फैसला करना है.

उपभोक्ताओं को फायदा

उपभोक्ताओं पर दोहरे कर का भार नहीं पड़ेगा. किसी भी वस्तु पर राज्य अपनी तरफ से ज्यादा कर नहीं लगा सकेंगे. हालांकि सेवा कर बढ़ने से बोझ बढ़ेगा.

सरकार का खजाना भरेगा

विशेषज्ञों के अनुसार जीएसटी की वजह से अर्थव्यवस्था के विकास में दो फीसदी का उछाल आ सकता है. इससे सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा, क्योंकि करों में पारदर्शिता अायेगी.

किस सेक्टर को फायदा

लॉजिस्टिक कंपनियों को जीएसटी से फायदा होगा. पूरे देश में सामान पहुंचाना उनके लिए आसान होगा.

कर विवाद में कमी

जीएसटी से कई बार टैक्स देने से छुटकारा मिल जायेगा. इससे कर की वसूली करते समय कर विभाग के अधिकारियों द्वारा कर में हेराफेरी की संभावना भी कम हो जायेगी. एक ही व्यक्ति या संस्था पर कई बार टैक्स लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. उत्पाद शुल्क, सेवा कर और राज्यों के वैट इसमें शामिल हो जायेंगे.

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