सरकार की सलाह पर नोटबंदी की सिफारिश, बैंकों में जमा हुए 3-4 लाख करोड़ रुपये संदिग्ध

Updated at : 11 Jan 2017 8:01 AM (IST)
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सरकार की सलाह पर नोटबंदी की सिफारिश, बैंकों में जमा हुए 3-4 लाख करोड़ रुपये संदिग्ध

नयी दिल्ली : नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा की गयी राशि की जांच-पड़ताल में सरकार को करीब तीन से चार लाख करोड़ रुपये की आय में कर चोरी का पता चला है. यह राशि नोटबंदी के दौरान जमा करायी गयी है. आयकर विभाग पड़ताल में जुटा है. जांच के बाद 3-4 लाख करोड़ रुपये […]

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नयी दिल्ली : नोटबंदी के बाद बैंकों में जमा की गयी राशि की जांच-पड़ताल में सरकार को करीब तीन से चार लाख करोड़ रुपये की आय में कर चोरी का पता चला है. यह राशि नोटबंदी के दौरान जमा करायी गयी है. आयकर विभाग पड़ताल में जुटा है. जांच के बाद 3-4 लाख करोड़ रुपये की संदिग्ध टैक्स चोरी वाली राशि जमा कराने वालों को नोटिस जारी किया जायेगा.

आंकड़ों के मुताबिक नोटबंदी के बाद 60 लाख से अधिक बैंक खातों में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा करायी गयी. कुल 7.34 लाख करोड़ रुपये की राशि बैंक खातों में जमा करायी गयी. नोटबंदी के बाद 25,000 करोड़ रुपये निष्क्रिय बैंक खातों में जमा कराये गये, जबकि आठ नवंबर 2016 के बाद 80,000 करोड़ रुपये के कर्ज का नकद राशि में भुगतान किया गया.

आंकड़ें बताते हैं कि इस दौरान 60 लाख बैंक खातों में दो लाख करोड़ रुपये से अधिक की नकदी जमा करायी गयी. इनमें से 6.80 लाख खातों का सरकार के साथ उपलब्ध डाटाबेस के साथ मिलान कर लिया गया है. वहीं, प्रत्येक खाते में दो से ढाई लाख करोड़ रुपये की नकद जमा कराने वाले ऐसे खातों का पता चला है, जिनमें पैन, मोबाइल और घर का पता सब एक जैसा है. इस तरह करीब 42,000 करोड़ रुपये की राशि है.

उल्लेखनीय है कि सरकार ने आठ नवंबर 2016 को अचानक 500 और 1,000 रुपये के नोट चलन से वापस ले लिये थे. सरकार ने इन अमान्य नोटों को बैंक खातों में जमा कराने या फिर नयी मुद्रा से बदलवाने के लिए 30 दिसंबर तक का समय दिया था.

सरकार की सलाह पर नोटबंदी की सिफारिश की थी : आरबीआइ

नयी दिल्ली/ मुंबई: नोटबंदी के बाद कुछ मौकों पर केंद्र सरकार भले ही इसके पीछे का कारण रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की अनुशंसा बताती रही हो, लेकिन आरबीआइ ने संसद की वित्तीय मामलों की समिति के सामने जो सच रखा है, उसके मुताबिक केंद्र की सलाह पर ही केंद्रीय बैंक ने नोटबंदी की सिफारिश की थी. कांग्रेस नेता एम वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति को भेजे सात पन्नों के नोट में आरबीआइ ने यह बात कही है.

नोट के मुताबिक सरकार ने सात नवंबर, 2016 को सलाह दी थी कि जालसाजी, आतंकियों को मिलनेवाले वित्तीय मदद और ब्लैक मनी को रोकने के लिए केंद्रीय बैंक के सेंट्रल बोर्ड को 500 व 1000 रुपये के पुराने नोट को हटाने पर विचार करना चाहिए. इस सलाह के अगले दिन ही बोर्ड की बैठक हुई. ‘विचार-विमर्श’ के बाद केंद्र से सिफारिश करने का फैसला किया गया कि 500 और 1,000 के नोटाें को चलन से बाहर कर दिया जाये. इस सिफारिश के कुछ घंटे बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की बैठक हुई, जिसमें नोटबंदी का फैसला हुआ. इसके बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में इसका एलान किया. मालूम हो कि कुछ मंत्री अभी तक यह कहते रहे हैं कि सरकार ने नोटबंदी का फैसला रिजर्व बैंक की सिफारिश पर किया था.

समिति को भेजे नोट में रिजर्व बैंक ने यह भी कहा कि पिछले कुछ साल से वह नयी सीरीज के बैंक नोटों में सुधरे हुए सुरक्षा फीचर्स जोड़ने पर काम कर रहा है, जिससे इनकी नकल न की जा सके. वहीं दूसरी ओर सरकार कालेधन तथा आतंकवाद से निपटने के लिए कदम उठा रही है.

फैसले की वजह

रिजर्व बैंक ने समिति को नोटबंदी की वजह भी बतायी है. रिपोर्ट के अनुसार ऊंचे मूल्य के नोटों की वजह से कालाधन धारकों और जाली नोटों का धंधा करनेवालों का काम आसान हो रहा था. इन नोटों का इस्तेमाल आतंक के वित्तपोषण के लिए भी किया जा रहा है. ऐसे में आरबीआइ और सरकार को लगा कि नये नोटों को पेश करने से इन समस्याओं से निपटने का अवसर मिलेगा.

2,000 के नोट क्यों

आरबीआइ ने कहा कि चूंकि नये डिजाइन और नये मूल्य के नोटों के प्रति लोगों का आकर्षण होता है, ऐसे में यह फैसला किया गया कि 2,000 के नोट पर्याप्त संख्या में छापे जाएं, ताकि इन्हें देश में एक साथ उपलब्ध कराया जा सके. रिजर्व बैंक ने कहा कि सरकार 18 मई, 2016 को 2,000 का नोट पेश करने पर सहमत हुई थी. ‘सरकार ने इस पर 7 जून, 2016 को अंतिम मंजूरी दे दी.

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