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नमो-नमो! अर्थव्‍यवस्‍था पटरी पर, अगले वर्ष 6.3% वृद्धि का अनुमान

Updated at : 30 Sep 2014 5:00 PM (IST)
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नमो-नमो! अर्थव्‍यवस्‍था पटरी पर, अगले वर्ष 6.3% वृद्धि का अनुमान

देश विदेश में नमो-नमों की गुंज के बीच मोदी के कारनामों की चर्चा जीन, जापान और अब अमेरिका में भी देखने को मिली. मोदी कभी जापान के साथ तो कभी चीन के साथ आर्थिक विकास दर को बढाने के लिए बातें कर रहे हैं. इस बीच रिजर्व बैंक की ओर से आर्थिक वृद्धि दर में […]

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देश विदेश में नमो-नमों की गुंज के बीच मोदी के कारनामों की चर्चा जीन, जापान और अब अमेरिका में भी देखने को मिली. मोदी कभी जापान के साथ तो कभी चीन के साथ आर्थिक विकास दर को बढाने के लिए बातें कर रहे हैं. इस बीच रिजर्व बैंक की ओर से आर्थिक वृद्धि दर में बढोतरी के आश्‍वासन से आम लोगों में भी अच्‍छे दिनों की चर्चा होने लगी है. रिजर्व बैंक के बयान के बाद अर्थव्‍यवस्‍था पटरी पर आती नजर आ रही है. नयी सरकार के शुरुआती दौर में कई चुनौतियों के प्रति रिजर्व बैंक ने सरकार को आगाह किया था. इस सब के बीच सरकार की क्रियाविधि और तत्‍परता ने आर्थिक विकास दर को प्रभावित करने का काम किया है.

रिजर्व बेंक के गवर्नर रघुराम राजन ने पत्रकारों से बात करते हुए आज इस बात की पुष्टि की कि अगर सरकार इसी गति से अपने योजनाओं को क्रियान्वित करती है तो इसका असर जीडीपी ग्रोथ और आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा. पिछले कई सालों में आर्थिक विकास दरों में वृदिृ के रिजर्व बैंक के अनुमान ने इस बात को स्‍पष्‍ट कर दिया है कि सरकारी तंत्रों के सुचारु रूप से कार्य करने से विकास दरों पर भी असर पड़ता है.

महंगाई पर नियंत्रण मोदी सरकार की प्राथमिकता

नरेंद्र मोदी ने जब भाजपा की ओर से लोकसभा चुनाव 2014 का कमान संभाला तो महंगाई को अपनी पहली प्राथमिकता में रखा. भाजपा के घोषणापत्र में भी महंगाई को प्राथमिकता दी गयी थी और यूपीए-2 की सरकार को इसके लिए जिम्‍मेवार बताया गया था. नयी सरकार के आते ही जनता ने महंग कम होने की उम्‍मीद पाली और रिजर्व बैंक के ताजे बयान से उम्‍मीद और भी पुख्‍ता हुआ है. पिछले तीन सालों में बेलगाम हुई महंगाई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती थी. सरकार की ओर से महंगाई पर नियंत्रण के लिए विशेष तौर कर कोई योजना तो नहीं बनायी गयी, लेकिन मुनाफाखोरों और जमाखोरों पर सरकार के सख्‍त रवैये के कारण कुछ राहत जरुर मिली.

तेल की कीमतों में गिरावट

तेल की कीमतों में गिरावट भी महंगाई को कम करने में मददगार साबित हुआ. हालांकि तेल की कीमतों में गिरावट और बढोतरी सरकार के नियंत्रण में नहीं है. लेकिन परिस्थितियों ने मोदी सरकार का साथ दिया और विश्‍व बाजार में कई बार क्रुड आयल की कीमतों में गिरावट आयी जिससे भारतीय बाजारों में भी पेट्रोल के दाम पिछले तीन सालों के निम्‍न स्‍तर पर आ गया. वहीं आज भी पेट्रोल की कीमतों में गिरावट आने का अनुमान लगाया जा रहा है जबकि पांच साल बाद तेल कंपनियां आज रात डीजल की कीमतों में भी गिरावट करने की तैयारी की है. विश्‍लेषकों के अनुसार आम जरुरत की वस्‍तुओं की कीमतों में बढोतरी का एक मुख्‍य कारण तेल की कीमतों में बढोतरी भी है. ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट से आम जनता को महंगाई से मुक्ति मिलने में भी अनुमान लगाया जा रहा है.

खराब मानसून की घोषणा के बाद बाजार प्रभावित

इस साल मौसम विशेषज्ञों की ओर से खराब मानसून की घोषणा की गयी थी. हालांकि इस अनुमान का पूरा असर मानसून पर नहीं हुआ, फिर भी सामानरू से कई वर्षा हुई. सरकार से इस चुनौ‍ती को भी गंभीरता से लिया और कृषि मंत्री की ओर से व्‍यापक तैयारियां की गयी थी. सरकार ने अनाज के उचित भंडारण पर जोर दिया और किसानों को हर प्रकार से सहायता प्रदान करने की बातें कहीं. हाल ही में नरेंद्र मोदी ने फूड पार्क का उदघाटन करते हुए भारतीय कृषकों के लिए नये बाजार तलाशने की बात कही. मोदी ने किसानों को सहूलियत देने की गरज से कोला कंपनियों से अपने उत्‍पादों में फ्रुट जूस तक मिलाने की संभावनाएं तलाशने का आग्रह कर डाला. सरकार शुरू से ही किसान हित के प्रति कृतसंकल्‍पित होने का दावा कर रही है. इससे भी बाजार में उत्‍साह का माहौल बना.

सरकार कीओर सेबैंकों पर नकेल

मोदी सरकार ने अपने शुरुआती दिनों में ही भारतीय बैंकों पर नकेल कसना शुरू कर दिया था. इसके परिणामस्‍वरुप कई सरकारीकृत बैंक के अधिकारी और एक बैंक के सीएमडी भी सलाखों के पीछे पहुंच गये. सरकार ने स्‍पष्‍ट किया कि बैंकों की ओर से कंपनियों को साठ-गांठ के तहत ऋण उपलब्‍ध कराना और उसकी वसूली के प्रति सचेत नहीं रहना भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की रीढ़ तोड़ सकता है. इस दौरान सरकार के निर्देश पर जांच पड़ताल में जो भी बैंक अधिकारी इस प्रकार की गतिविधि में लिप्‍त पाये गये उनपर कड़ी कार्रवाई की गयी. इसके अलावे बैंकों को सख्‍त निर्देश दिया गया कि वे अपना एनपीए कम करें. सरकारी तंत्र की कड़ाई के बाद कई बैंकों के अधिकारियों के साथ-साथ कई बड़ी कंपनियों के अधिकारी भी जांच के दायरे में आये और कुछ जेल में बंद बैंक का कर्ज उतारने के बारे में योजना बना रहे हैं. इस बीच सरकार ने बैंकों में पूंजी निवेश की भी घोषणा की जिससे बैंकों में भी उत्‍साह दिखा. सरकार की महत्‍वकांक्षी योजना जन-धन के तहत विभिन्‍न बैंकों में 2500 करोड़ रुपये से भी अधिक की राशि जमा की गयी.

शेयर बाजार में उत्‍साह का माहौल

नरेंद्र मोदी ने चीन, जापान और अमेरिका के निवेशकों को जिस जोश के साथ भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया है, उससे बाजार की धारणा प्रभावित हुई है. बाजार ने इसी साल सबसे उच्‍च अंक को छुआ. हालांकि पिछले कुछ दिनों से बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है लेकिन इसमें भी निवेशक काफी हतोत्‍साहित नहीं हैं. बाजार के जानकारों के अनुसार भी गिरावट भरे दौर में बाजार में निवेशकों को पैसा लगाने की बातें कही जा रही हैं. जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाजार की स्थिति आने वाले दिनों में और बेहतर हो सकत है. चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग ने आपने भारतीय दौरे के क्रम में भारत में अगले पांच सालों में 20 हजार करोड़ रुपये चीनी निवेश की घोषणा की है. इसके साथ ही जापान और अब अमेरिकी उद्योपतियों ने भी भारत में निवेश की घोषण की है. आरबीआई ने आपने बयान में कहा भी है कि विदेशी मुद्रा के प्रवाह और निर्यात में बढोतरी से ही आर्थिक वृद्धि दर में बढोतरी की संभावनाएं बनी हैं.

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