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मोदी सरकार में खत्म हो गये बाजार के अच्छे दिन!

Updated at : 25 Sep 2014 5:10 PM (IST)
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मोदी सरकार में खत्म हो गये बाजार के अच्छे दिन!

मुंबई : अच्छे दिन लाने के वादे के साथ सत्ता में आयी भाजपा के नेता नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही बाजार गुलजार हुआ जा रहा था. निवेशकों को लगा कि सचमुच भाजपा व मोदी के वादे के अनुरूप बाजार के अच्छे दिन आ गये हैं, लेकिन पिछले दस दिनों से बाजार […]

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मुंबई : अच्छे दिन लाने के वादे के साथ सत्ता में आयी भाजपा के नेता नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही बाजार गुलजार हुआ जा रहा था. निवेशकों को लगा कि सचमुच भाजपा व मोदी के वादे के अनुरूप बाजार के अच्छे दिन आ गये हैं, लेकिन पिछले दस दिनों से बाजार के ट्रेंड ने यह आशंका उत्पन्न कर दी है कि अब बाजार के अच्छे दिन खत्म हो गये हैं. इससे निवेशकों में डर समा रहा है. इसे रोकने के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की उम्मीद बढ़ गयी है.
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति व उसके बाद कोल ब्लॉक आवंटन के फैसले के बीच कई अन्य कारणों से भी बाजार पिछले दस दिनों में लगातार नीचे गया है. सेंसेक्स साढ़े छब्बीस हजार के आसपास आ गया है, वहीं निफ्टी भी आठ हजार के नीचे गोता लगा रहा है. अमेरिकी डॉलर की संभलती कीमत एक बार फिर ऊपर चढ़ रही है. ऐसे में जानकार व निवेशक दोनों बाजार को लेकर आशंकित हो गये हैं. पखवाड़े भर पहले ही बाजार के उत्साह को देखते हुए सेंसेक्स के दिवाली तक 29 से 30 हजार तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा था व अगले बजट तक इसके 32 हजार तक पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही थी. इस उत्साह से बाजार में निवेश भी बढ़ा.
कोल ब्लॉक आवंटन रद्द किये जाने के फैसले को बुधवार को औद्योगिक संगठन एसोचैम ने बेहद कड़ा फैसला बताते कहा था कि इससे बाजार बहुत अधिक प्रभावित होगा. इधर, बाजार के एक जानकार हेलियस कैपिटल के समीर अरोड़ा ने एक बिजनेस न्यूज चैनल से बातचीत में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद एफआइआइ (फॉरेन इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टमेंट) का रुख निगेटिव हो गया है.
उन्होंने कहा है कि अगर सरकार ने कड़े फैसले नहीं लिए तो आने वाले दिनों में बाजार में तेजी की संभावना बेहद कम होगी. हालांकि उन्होंने कहा है कि बाजारों के प्रति निगेटिव नजरिया नहीं है, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत है. हालांकि दूसरा पक्ष यह भी कह रहा है कि इस फैसले से कॉरपोरेट अराजकता खत्म होने से पारदर्शिता आयेगी और कुछ उतार-चढ़ाव के बीच दीर्घकालिक रूप से इससे निवेशकों का उत्साह बढ़ेगा और वे निवेश करेंगे.
उल्लेखनीय है कि कोल ब्लॉक आवंटन के फैसले पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को इस बात के लिए आश्वस्त किया था कि वह कठोर फैसले के लिए राजी है और इससे उत्पन्न सामाजिक -आर्थिक परिस्थितियों से जूझने के लिए मानसिक रूप से तैयार है.
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