CRISIL ने आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाकर 5.1 फीसदी किया, Dun & Broad Street ने कहा-नरमी बरकार है

मुंबई : वित्तीय साख निर्धारित करने वाली एजेंसी क्रिसिल ने चालू वित्त वर्ष में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अपने अनुमान को काफी कम कर 5.1 फीसदी कर दिया है. इससे पहले उसने वृद्धि 6.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. एक अन्य एजेंसी डन एंड ब्रॉड स्ट्रीट ने कहा […]
मुंबई : वित्तीय साख निर्धारित करने वाली एजेंसी क्रिसिल ने चालू वित्त वर्ष में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अपने अनुमान को काफी कम कर 5.1 फीसदी कर दिया है. इससे पहले उसने वृद्धि 6.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. एक अन्य एजेंसी डन एंड ब्रॉड स्ट्रीट ने कहा है कि निकट भविष्य में भारत की आर्थिक वद्धि दर नरम बनी रह सकती है.
क्रिसिल ने यह बात ऐसे समय कही है, जब आरबीआई पांच दिसंबर को नीतिगत दर की घोषणा करने वाला है. रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की मौद्रिक नीति समीक्षा के लिए 3-5 दिसंबर को बैठक होगी. क्रिसिल का यह अनुमान जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा के 4.7 फीसदी अनुमान के बाद सबसे कम है. रेटिंग एजेंसी ने जीडीपी वृद्धि का आंकड़ा आने के कुछ दिन बाद ही यह अनुमान जताया है.
पिछले सप्ताह शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 4.5 फीसदी रही. इससे पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में वृद्धि दर 4.75 फीसदी रही, जो कई साल का न्यूनतम स्तर है. एजेंसी ने शोध रिपोर्ट में कहा कि औद्योगिक उत्पादन, वस्तु निर्यात, बैंक कर्ज उठाव, कर संग्रह, वस्तु का आना-जाना और बिजली उत्पादन जैसे प्रमुख अल्पकाली संकेतक वृद्धि में नरमी का इशारा कर रहे हैं. हालांकि, दूसरी छमाही में वृद्धि दर में हल्की तेजी की उम्मीद है.
क्रिसिल के अनुसार, 2019-20 की दूसरी छमाही में वृद्धि दर 5.5 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पहली छमाही में 4.75 फीसदी थी. रिजर्व बैंक ने अक्टूबर महीने में मौद्रिक नीति समीक्षा में जीडीपी के अनुमान को संशोधित कर 6.9 से कम कर 6.1 फीसदी कर दिया. ऐसी संभावना है कि केंद्रीय बैंक पांच दिसंबर को नीतिगत दर में कमी कर सकता है. आर्थिक वृद्धि को गति देने तथा नकदी की स्थिति बढ़ाने के लिए इस साल अबतक पांच बार रेपो रेटा में कुल 1.35 फीसदी की कटौती की जा चुकी है.
इसी तरह, बाजार शोध कंपनी डन एंड ब्रॉड स्ट्रीट ने भी एक रिपोर्ट में कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि दर निकट भविष्य में नीचे रह सकती है, क्योंकि नरमी और गहरा गयी है. इसमें यह भी कहा गया है कि यह नरमी उम्मीद के विपरीत लंबे समय तक रह सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, चूंकि निवेश नरम बनी हुई है, ऐसे में औद्योगिक उत्पादन में तेजी धीमे-धीमे गति पकड़ेगी.
इतना ही नहीं, हाल में आयी बाढ़ तथा कृषि उत्पादन कम रहने से ग्रामीण क्षेत्र में मांग प्रभावित रह सकती है. डन एंड ब्रॉड स्ट्रीट के अनुसार, वाहन से लेकर रीयल एस्टेट दबाव में है और यह कंपनियों के लाभ मार्जिन और सरकार के राजस्व संग्रह पर दिख रहा है.
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