ePaper

फ्रांस ने अनिल अंबानी की RCom की अनुुषंगी कंपनी के 14.37 करोड़ यूरो का Tax किया माफ : फ्रेंच न्यूजपेपर

Updated at : 13 Apr 2019 6:26 PM (IST)
विज्ञापन
फ्रांस ने अनिल अंबानी की RCom की अनुुषंगी कंपनी के 14.37 करोड़ यूरो का Tax किया माफ : फ्रेंच न्यूजपेपर

नयी दिल्ली : फ्रांस ने 36 राफेल विमानों की खरीद की भारत की घोषणा के बाद अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस कम्युनिकेशन्स की एक अनुषंगी के 14.37 करोड़ यूरो का कर माफ किया था. फ्रांस के एक प्रमुख समाचार पत्र ला मोंदे ने शनिवार को इस खबर का प्रकाशन किया है. अखबार की खबर […]

विज्ञापन

नयी दिल्ली : फ्रांस ने 36 राफेल विमानों की खरीद की भारत की घोषणा के बाद अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस कम्युनिकेशन्स की एक अनुषंगी के 14.37 करोड़ यूरो का कर माफ किया था. फ्रांस के एक प्रमुख समाचार पत्र ला मोंदे ने शनिवार को इस खबर का प्रकाशन किया है. अखबार की खबर के मुताबिक, रिलायंस कम्युनिकेशन की संबद्ध अनुषंगी कंपनी फ्रांस में रजिस्टर्ड है और टेलीकम्यूनिकेशन सेक्टर में काम करती है.

इसे भी देखें : राफेल डील : रिव्यू पिटिशन पर सुनवाई के लिए तैयार सुप्रीम कोर्ट, केंद्र सरकार की आपत्तियों को खारिज किया

उधर, रिलायंस कम्युनिकेशन ने इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया में किसी भी तरह के गलत काम से इनकार किया है. कंपनी ने कहा है कि कर विवाद को कानूनी ढांचे के तहत निपटाया गया. उन्होंने कहा कि फ्रांस में काम करने वाली सभी कंपनियों के लिए इस तरह का तंत्र उपलब्ध है. फ्रांस के समाचारपत्र ने कहा है कि देश के कर अधिकारियों ने रिलायंस फ्लैग अटलांटिक फ्रांस से 15.1 करोड़ यूरो के कर की मांग की थी, लेकिन 73 लाख यूरो में यह मामला सुलट गया.

इस समाचार पर प्रतिक्रिया देते हुए रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि कर मामले और राफेल के मुद्दे में किसी तरह का संबंध स्थापित करना पूरी तरह अनुचित, निहित उद्देश्य से प्रेरित और गलत जानकारी देने की कोशिश है. मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा है कि हम ऐसी खबरें देख रहे हैं, जिसमें एक निजी कंपनी को कर में दी गयी छूट एवं भारत सरकार द्वारा राफेल लड़ाकू विमान की खरीद के बीच अनुमान के आधार पर संबंध स्थापित किया जा रहा है. ना तो कर की अवधि और ना ही रियायत के विषय का वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हुई राफेल की खरीद से दूर-दूर तक कोई लेना-देना है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में 10 अप्रैल, 2015 को फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ बातचीत के बाद 36 राफेल विमानों की खरीद की घोषणा की थी. कांग्रेस इस सौदे में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाती रही है. विपक्षी दल ने आरोप लगाया है कि सरकार 1,670 करोड़ रुपये की दर से एक विमान खरीद रही है, जबकि तत्कालीन यूपीए सरकार ने प्रति विमान 526 करोड़ की दर से सौदा पक्का किया था.

कांग्रेस अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस डिफेंस को द साल्ट एवियशन का ऑफसेट साझीदार बनाने को लेकर भी सरकार पर हमालवर है. सरकार ने आरोपों को खारिज किया है. समाचार पत्र ने कहा कि फ्रांस के अधिकारियों ने रिलायंस फ्लैग अटलांटिक फ्रांस की जांच की और पाया कि 2007-10 के बीच उसे छह करोड़ यूरो का कर देना था. हालांकि, मामले को सुलटाने के लिए रिलायंस ने 76 लाख यूरो की पेशकश की, लेकिन फ्रांस के अधिकारियों ने राशि स्वीकार करने से इनकार कर दिया.

अधिकारियों ने 2010-12 की अवधि के लिए भी जांच की और कर के रूप में 9.1 करोड़ यूरो के भुगतान का निर्देश दिया. अप्रैल, 2015 तक रिलायंस को फ्रांस के अधिकारियों को 15.1 करोड़ यूरो का कर देना था. हालांकि, पेरिस में मोदी द्वारा राफेल सौदे की घोषणा के छह महीने बाद फ्रांस अधिकारियों ने अंबानी की कंपनी की 73 लाख यूरो की पेशकश स्वीकार कर ली.

रिलायंस कम्युनिकेशन्स के एक प्रवक्ता ने बताया कि कर की मांग ‘पूरी तरह अमान्य और गैर-कानूनी थी.’ कंपनी ने किसी तरह के पक्षपात या सुलह से किसी तरह के फायदे की बात से इनकार किया.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola