रांची एक्सप्रेस-वे के चेयरमैन पर सीबीआई ने दर्ज किया मुकदमा, हजार करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Mar 2019 10:35 PM
नयी दिल्ली : केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कैनरा बैंक की अगुआई वाले कर्जदाताओं के समूह को 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में रांची एक्सप्रेस-वे लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के श्रीनिवास राव समेत कंपनी के प्रवर्तकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. सीबीआई […]
नयी दिल्ली : केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कैनरा बैंक की अगुआई वाले कर्जदाताओं के समूह को 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में रांची एक्सप्रेस-वे लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के श्रीनिवास राव समेत कंपनी के प्रवर्तकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. सीबीआई ने रांची एक्सप्रेस-वे लिमिटेड के सीएमडी के श्रीनिवास राव, कंपनी के निदेशकों एन सीतैया, एन पृथ्वी तेजा और कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. इसके अलावा, मधुकॉन प्रोजेक्ट लिमिटेड, मधुकॉन इंफ्रा, मधुकॉन टोल हाईवे लिमिटेड और ऑडिट फर्म ‘ कोटा एंड कंपनी ‘ का नाम भी प्राथमिकी में शामिल है.
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बैंकों के समूह के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गयी है. यह मामला रांची से जमशेदपुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-33 पर 163 किलोमीटर लंबे मार्ग को चार लेन बनाने से जुड़ा है. इसके निर्माण के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने मधुकॉन प्रोजेक्ट लिमिटेड का 18 मार्च, 2011 को चुना था.
अधिकारियों ने कहा कि परियोजना के लिए विशेष कंपनी रांची एक्सप्रेस-वे लिमिटेड की स्थापना की गयी. यह परियोजना डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, परिचालन और स्थानांतरण मॉडल पर आधारित थी. उन्होंने कहा कि परियोजना की अनुमानित लागत 1,655 करोड़ रुपये थी. इसके लिए कैनरा बैंक की अगुआई वाले 15 बैंकों का समूह 1151.60 करोड़ रुपये का कर्ज देने पर सहमति जतायी थी, जबकि प्रवर्तकों को 503.60 करोड़ रुपये देने थे.
अधिकारियों ने कहा कि गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, रांची एक्सप्रेस-वे के प्रवर्तक-निदेशकों श्री निवास राव, एन सीतैया और एन पृथ्वी तेजा ने कुल 264.01 करोड़ रुपये की पूंजी गड़बड़ी की. अधिकारियों ने कहा कि निदेशकों पर आरोप है कि उन्होंने बैंकों के समूह से 1,029.39 रुपये की पूंजी प्राप्त करने के लिए धोखाधड़ी की, लेकिन परियोजना में कोई प्रगति नहीं हुई और ऋण 2018 में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति में तब्दील हो गया.
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