2BHK किराए के फ्लैट की बालकनी में सब्जियां उगाने से शुरू किया बिजनेस, आज ₹50 लाख का टर्नओवर
Success Story
Success Story : ₹1 लाख से शुरुआत और अब ₹50 लाख का टर्नओवर! जानिए हैदराबाद की चंदना गाड़े की कहानी, जिन्होंने बालकनी गार्डनिंग से खड़ा किया ‘सीडबास्केट’ स्टार्टअप.
Success Story : आज के दौर में शहरों में मिलने वाली हरी सब्जियों में केमिकल फर्टिलाइजर्स और कीटनाशकों (Pesticides) का इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है. कई जगह तो गंदे नाले के पानी से सब्जियां उगाने की खबरें भी आती हैं. हैदराबाद की रहने वाली 36 वर्षीय चंदना गाड़े भी साल 2014 में अपनी बेटी के जन्म के बाद इसी बात को लेकर परेशान थीं.
वह अपनी बेटी को बाजार की ‘जहरीली’ सब्जियां नहीं खिलाना चाहती थीं. मूल रूप से तेलंगाना के खम्मम जिले के एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली चंदना ने बचपन में हमेशा खेत की ताजा और शुद्ध सब्जियां खाई थीं.
अपनी बेटी के लिए भी वह ऐसा ही चाहती थीं. जब उन्होंने घर पर उगाने के लिए भारतीय नस्ल के देसी (Indigenous/Desi) बीजों की तलाश शुरू की, तो उन्हें बाजार में सिर्फ हाइब्रिड बीज मिले, जो सेहत के लिए उतने अच्छे नहीं माने जाते.
ऑनलाइन मिलने वाले बीजों की क्वालिटी भी खराब थी. बस इसी समस्या में चंदना और उनके सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति नवीन गाड़े को एक बड़ा बिजनेस आइडिया दिखा. उन्होंने साल 2016 में मिलकर ‘सीडबास्केट’ (Seedbasket) नाम के एक ऑनलाइन स्टार्टअप की शुरुआत की.
फ्लैट के एक कमरे से शुरू हुआ 50 लाख का बिजनेस
चंदना ने इस काम की शुरुआत महज 1 लाख रुपये के इन्वेस्टमेंट के साथ अपने 2BHK किराए के फ्लैट के एक छोटे से कमरे से की थी. जो बिजनेस कभी महीने में सिर्फ 2 ऑर्डर से शुरू हुआ था, आज वह सालाना ₹50 लाख का टर्नओवर जनरेट कर रहा है.
आज सीडबास्केट के पास हर महीने 1,000 से ज्यादा ऑर्डर आते हैं और वे देशभर में 25,000 से अधिक ग्राहकों को सर्व कर रहे हैं. इनके सबसे ज्यादा ग्राहक कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और राजस्थान से हैं.
बालकनी में खेती
एमसीए (MCA) ग्रेजुएट चंदना के लिए गांव के बड़े खेतों के मुकाबले शहर के फ्लैट की 10×4 वर्ग फुट की छोटी सी बालकनी में सब्जियां उगाना काफी चुनौतीपूर्ण था. बालकनी में धूप कम आती थी, जिससे पत्तों के साइज पर असर पड़ता था.
इस चुनौती से निपटने के लिए चंदना ने करीब 6 महीने तक होम गार्डनिंग की क्लासेस लीं. उन्होंने सीखा कि घर के गीले कचरे से खाद (Compost) कैसे बनाएं, अंडे के छिलके और कॉफी पाउडर से पौधों को न्यूट्रिशन कैसे दें और नीम के तेल से कीड़ों को कैसे भगाएं. आज वह जो भी बीज अपनी वेबसाइट से बेचती हैं, उसके साथ एक इंस्ट्रक्शन मैनुअल (गाइड) भी देती हैं, ताकि नया गार्डनर भी आसानी से पौधे उगा सके.
हर 3 महीने में ₹50,000 की एक्स्ट्रा कमाई
चंदना ने बीजों की शुद्धता बनाए रखने के लिए अपने गृह जिले के स्थानीय किसानों से हाथ मिलाया. उन्हीं में से एक किसान हैं बाबू राव, जो पिछले चार साल से चंदना को चुक्का कुरा (Green Sorrel), पालक और लीची के देसी बीज सप्लाई कर रहे हैं.
किसान बाबू राव बताते हैं “पहले फसल काटने के बाद जो सब्जियां खेत में बच जाती थीं, उनके बीजों को हम ऐसे ही सड़ने के लिए छोड़ देते थे या गाएं खा जाती थीं. लेकिन अब हम उन बचे हुए प्रोडक्ट्स से बीज इकट्ठा करते हैं और चंदना की कंपनी को बेचते हैं. इससे मुझे हर तीन महीने में ₹50,000 तक की अतिरिक्त आमदनी हो जाती है.”
‘सीडबास्केट’ के पिटारे में क्या-क्या है खास ?
आज इस प्लेटफॉर्म पर गार्डनिंग से जुड़े करीब 200 प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं, जिनमें फल, सब्जी, फूल के देसी बीज, ग्रो बैग्स और गाय के गोबर के उपले (Cow dung cakes) शामिल हैं.
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