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लागत में बढ़ोतरी आैर कर्ज उपलब्धता में कमी के चलते फिच ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को घटाया

Updated at : 06 Dec 2018 2:25 PM (IST)
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लागत में बढ़ोतरी आैर कर्ज उपलब्धता में कमी के चलते फिच ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को घटाया

नयी दिल्ली : दुनिया भर की रेटिंग एजेंसी फिच ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष 2018-19 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि अनुमान को घटा दिया है. रेटिंग एजेंसी ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को 7.8 फीसदी से घटाकर 7.2 फीसदी कर दिया है. कंपनी […]

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नयी दिल्ली : दुनिया भर की रेटिंग एजेंसी फिच ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष 2018-19 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि अनुमान को घटा दिया है. रेटिंग एजेंसी ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को 7.8 फीसदी से घटाकर 7.2 फीसदी कर दिया है. कंपनी की आेर से बताया जा रहा है कि उच्च वित्तपोषण में ज्यादा लागत और ऋण उपलब्धता में कमी के चलते आर्थिक वृद्धि अनुमान को घटाया गया है.

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फिच ने गुरुवार को जारी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में कहा कि 2019-20 और 2020-21 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर क्रमश: सात फीसदी और 7.1 फीसदी रहने का अनुमान है. वित्त वर्ष 2017-18 में देश की अर्थव्यवस्था 6.7 फीसदी की दर से आगे बढ़ी थी. इससे पहले उसने सितंबर में वृद्धि दर के 7.8 फीसदी और जून में 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. रेटिंग एजेंसी फिच का नया अनुमान चालू वित्त वर्ष के लिए आरबीआई के 7.4 फीसदी के अपने पहले लगाये गये अनुमान से काफी कम है.

फिच ने कहा कि हमने जीडीपी आंकडों में अपेक्षा से कम तेजी, उच्च वित्तपोषण लागत और ऋण उपलब्धता में कमी के चलते अपने अनुमान को घटाया है. हमें लगता है कि मार्च, 2019 को समाप्त वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 7.2 फीसदी रहेगी. इसके 2019-20 में सात फीसदी और 2020-21 में 7.1 फीसदी रहने का अनुमान है. एजेंसी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में जीडीपी वृद्धि दर कम होकर 7.1 फीसदी पर रही. अप्रैल-जून में यह 8.2 फीसदी थी.

फिच ने कहा कि खपत कमजोर बनी हुर्इ है, यह 8.6 फीसदी से गिरकर 7 फीसदी पर आ गयी है. घरेलू मांग के अन्य कारक बेहतर स्थिति में है. खासकर, निवेश 2017 की दूसरी छमाही के बाद लगातार बढ़ा है. रेटिंग एजेंसी का कहना है कि अगले साल होने वाले आम चुनावों को देखते हुए भारत की राजकोषीय नीतियां वृद्धि को बढ़ावा देने के अनुकूल रहेंगी. साथ ही, साल 2019 के आखिर तक डॉलर के मुकाबले रुपया 75 रुपये प्रति डॉलर तक गिर सकता है. इस समय रुपया 71 रुपये प्रति डाॅलर के आसपास चल रहा है.

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