रिपोर्ट : डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हासिल हुई सर्वाधिक 10.08 फीसदी रही वृद्धि दर

Updated at : 17 Aug 2018 11:14 PM (IST)
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रिपोर्ट : डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल में हासिल हुई सर्वाधिक 10.08 फीसदी रही वृद्धि दर

नयी दिल्ली : देश की आर्थिक वृद्धि दर का आंकड़ा 2006-07 में 10.08 प्रतिशत रहा, जो उदारीकरण शुरू होने के बाद का सर्वाधिक वृद्धि आंकड़ा है. यह आंकड़ा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का है. आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी है. आजादी के बाद देखा जाये, तो सर्वाधिक 10.2 फीसदी आर्थिक वृद्धि […]

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नयी दिल्ली : देश की आर्थिक वृद्धि दर का आंकड़ा 2006-07 में 10.08 प्रतिशत रहा, जो उदारीकरण शुरू होने के बाद का सर्वाधिक वृद्धि आंकड़ा है. यह आंकड़ा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल का है. आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गयी है. आजादी के बाद देखा जाये, तो सर्वाधिक 10.2 फीसदी आर्थिक वृद्धि दर 1988-89 में रही. उस समय प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे.

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग द्वारा गठित ‘कमेटी ऑफ रीयल सेक्टर स्टैटिक्स’ ने पिछली शृंखला (2004-05) के आधार पर जीडीपी आंकड़ा तैयार किया. यह रिपोर्ट सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी की गयी है. रिपोर्ट में पुरानी शृंखला (2004-05) और नयी शृंखला 2011-12 की कीमतों पर आधारित वृद्धि दर की तुलना की गयी है.

पुरानी शृंखला 2004-05 के तहत सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर स्थिर मूल्य पर 2006-07 में 9.57 फीसदी रही. उस समय मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे. नयी शृंखला (2011-12) के तहत यह वृद्धि दर संशोधित होकर 10.08 फीसदी रहने की बात कही गयी है. वर्ष 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की अगुवाई में शुरू आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत के बाद यह देश की सर्वाधिक वृद्धि दर है.

रिपोर्ट के बाद कांग्रेस पार्टी ने ट्विटर पर लिखा है कि जीडीपी शृंखला पर आधारित आंकड़ा अंतत: आ गया है. यह साबित करता है कि यूपीए शासन के दौरान (औसतन 8.1 फीसदी) की वृद्धि दर मोदी सरकार के कार्यकाल की औसत वृद्धि दर (7.3 फीसदी) से अधिक रही. पार्टी ने कहा कि यूपीए सरकार के शासन में ही वृद्धि दर दहाई अंक में रही, जो आधुनिक भारत के इतिहास में एकमात्र उदाहरण है.

रिपोर्ट के अनुसार, बाद के वर्षों के लिए भी जीडीपी आंकड़ा संशोधित कर ऊपर गया है. राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग ने इन आंकड़ों के संग्रह, मिलान और प्रसार के लिए प्रणाली तथा प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए उपयुक्त उपायों का सुझाव देने के लिये समिति का गठन किया था.

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