CEA की सलाह : देश में तीन से पांच सरकारी बैंक ही काफी

Updated at : 13 Jul 2018 4:14 PM (IST)
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CEA की सलाह : देश में तीन से पांच सरकारी बैंक ही काफी

नयी दिल्ली : देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) के पद से विदाई ले रहे अरविंद सुब्रमण्यन का कहना है कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में सिर्फ एक दर्जन ही बैंकों की जरूरत है. यही नहीं उनका यह भी कहना है कि इनमें से भी सरकारी बैंकों के मुकाबले निजी बैंकों की संख्या अधिक होनी चाहिए. […]

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नयी दिल्ली : देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) के पद से विदाई ले रहे अरविंद सुब्रमण्यन का कहना है कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में सिर्फ एक दर्जन ही बैंकों की जरूरत है. यही नहीं उनका यह भी कहना है कि इनमें से भी सरकारी बैंकों के मुकाबले निजी बैंकों की संख्या अधिक होनी चाहिए.

इसे भी पढ़ें : CEA ने अरविंद सुब्रमण्यन कहा, सरकारी बैंकों के स्वामित्व पर नये सिरे से विचार करने की जरूरत

अंग्रेजी के अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को दिये एक साक्षात्कार उन्होंने कहा कि भारत में सिर्फ तीन से पांच ही सरकारी बैंक होने चाहिए. इसके अलावा निजी क्षेत्र के बैंक होने चाहिए. देश के बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति को लेकर सुब्रमण्यन ने कहा कि देश को और सुधारों की जरूरत है. हमें यह सोचने की जरूरत है कि गवर्नेंस में सुधार कैसे किया जाये और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाया जाये.

पूरी व्यवस्था में बैंकों की संख्या कम हो

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मैं यह सोचता हूं कि अधिक निजी बैंक होने चाहिए और पूरी व्यवस्था में बैंकों की संख्या कम होनी चाहिए. एक स्वस्थ तंत्र वह होगा, जिसमें तीन से पांच सरकारी बैंक होंगे और तीन से चार निजी क्षेत्र के बैंक हों. इसके अलावा, एक या दो विदेशी बैंक होने चाहिए.

आरबीआई और सरकार में मतभेद लाजिमी

केंद्र सरकार और आरबीआई के संबंधों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि असल में दोनों के बीच कुछ मतभेद होते ही हैं. इसकी वजह यह है कि दोनों के उद्देश्य अलग हैं, जनादेश अलग हैं और कई बार व्यक्तित्व भी अलग-अलग होते हैं. यदि थोड़ी बहुत टेंशन नहीं होगी, तो काम सही दिशा में नहीं होंगे.

राजन को उनकी पत्नी से बेहतर मैं जानता हूं

पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन के साथ संबंधों को लेकर सुब्रमण्यन ने कहा कि मेरे उनके साथ बेहद दोस्ताना संबंध थे. मैंने रघु को यह बताया था कि उन्हें उनकी पत्नी से भी बेहतर कोई जानने वाला हो सकता है, तो वह है सह-लेखक. इसलिए मैं रघु को उनकी पत्नी से और वह मुझे मेरी पत्नी से बेहतर जानते हैं.

नोटबंदी के आकलन में लगेगा पांच साल

मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले को लेकर सुब्रमण्यन ने कहा कि सिस्टम में पैसे के वापस आने का यह अर्थ नहीं है कि कालेधन से निपटा नहीं जा सका है. यह सही थी या गलत? इससे मदद मिली या नहीं? इसे आपको इतिहासकारों पर छोड़ना होगा. तीन, चार या फिर पांच साल बाद इसका सही ढंग से आकलन किया जा सकेगा. गौरतलब है कि सुब्रमण्यन ने पिछले महीने ही मुख्य आर्थिक सलाहकार के पद को छोड़ने का ऐलान किया था.

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