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अच्छी पहल : उग्रवाद प्रभावित 22 पंचायतों में मनरेगा के तहत प्रवासी व अप्रवासी मजदूरों को मिलने लगा काम

Updated at : 04 May 2020 6:22 PM (IST)
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अच्छी पहल : उग्रवाद प्रभावित 22 पंचायतों में मनरेगा के तहत प्रवासी व अप्रवासी मजदूरों को मिलने लगा काम

गोमिया प्रखंड के उग्रवाद प्रभावित 22 पंचायतों में प्रवासी व अप्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है. प्रखंड क्षेत्र में करीब 2 हजार ग्रामीण मजदूरों को मनरेगा के तहत रोजगार सृजन कर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है. इससे प्रवासी मजदूरों को भी काफी राहत मिलने लगी है.

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नागेश्वर

ललपनिया (बोकारो) : बोकारो जिला अंतर्गत गोमिया प्रखंड के उग्रवाद प्रभावित 22 पंचायतों में प्रवासी व अप्रवासी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है. प्रखंड क्षेत्र में करीब 2 हजार ग्रामीण मजदूरों को मनरेगा के तहत रोजगार सृजन कर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है. इससे प्रवासी मजदूरों को भी काफी राहत मिलने लगी है. गोमिया प्रखंड के अंतर्गत 36 पंचायत है, जिसमें 22 पंचायत उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में है.

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गोमिया प्रखंड के प्रभारी बीडीओ प्रणव कुमार अम्बष्ट ने कहा कि लॉकडाउन की इस घड़ी में सभी की जिम्मेवारी है कि हर किसी का सहयोग किया जाये. क्षेत्र में काफी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने घर वापस लौट रहे हैं. वे सभी किसी न किसी रूप में काम छोड़कर आ रहे हैं. इन प्रवासी मजदूरों को भी रोजगार की दिक्कत न हो, इसके लिए स्थानीय प्रशासन प्रयत्नशील है. ग्रामीणों के साथ इन प्रवासी मजदूरों को भी मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है. वर्तमान में हर दिन दो हजार मजदूर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत अधिक से अधिक मजदूरों को जोड़ना सरकार व प्रशासन की पहली प्राथमिकता है.

बीपीओ राकेश कुमार ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए मजदूरों के लिए क्षेत्र में रोजगार से जोड़ने के लिए कई योजनाएं चलायी जा रही है. इसके तहत डोभा, टीसीबी, कुआं व जल संरक्षण के तहत नाले के पानी को रोकने के अलावा वृक्षरोपण के कार्य हैं. उन्होंने बताया कि हर पंचायत में 10 डोभा, 5 टीसीबी, हर पंचायत में एक खेल का मैदान का निर्माण करने तथा पांच एकड़ भूमि में 10 लोगों को 50 डिसमिल भूमि में फलदार वृक्ष लगाने के कार्य को विभागीय स्तर पर जोर दिया जा रहा है. सभी कार्यों में मजदूरों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ख्याल रखा जा रहा है.

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सभी योजनाओं को कार्यरूप दिये जाने पर पंचायत के मुखिया व रोजगार सेवकों को ग्रामसभा कर योजनाओं के क्रियान्वयण पर जोर देने को कहा गया है, ताकि काम के अभाव में एक भी मजदूर न भटके. उन्होंने कहा कि जो नये मजदूर आ रहे हैं, वैसे मजदूरों को जॉब कार्ड मुहैया कराये जाने पर जोर दिया जा रहा है. जिला से 10 हजार जॉब कार्ड विभिन्न पंचायतों को मिला है.

प्रखंड स्तर पर पूर्व से संचालित योजनाओं को भी विभागीय स्तर पर कार्यरूप दिया जा रहा है. बडकीपुनू पंचायत में करीब 200 ग्रामीण रोजगार से जुडे हैं. पंचायत प्रतिनिधियों के मुताबिक 80 प्रतिशत मजदूर आदिवासी व 20 प्रतिशत अन्य लोग हैं. इसी प्रकार बड़कीचिदरी, तुलबूल, चतरोचटी, ललपनिया, पचमो, बारीडारी, कडेर, कुदा धवैया, कर्री, चुटे, लोधी, तिलैया, हुरलूग, बडकी सिधावारा, पचमो आदि पंचायत में एक- एक सौ मजदूर रोजगार से जुड़े हैं. अन्य पंचायतों में भी प्रवासी व अप्रवासी मजदूरों को मनरेगा के तहत जोड़ा जा रहा है.

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