बिहार में खेत से शहर तक आग बनी विपदा, अगलगी से जान-माल का हो रहा भारी नुकसान, जानें कैसे करें बचाव

आपदा प्रबंधन विभाग ने अग्निकांड से बचाव के लिए जिलों में आपातकालीन नंबर को जारी करने का दिशा-निर्देश भी दिया है, जिसके बाद जिलों में नंबर जारी करना शुरू कर दिया है.
प्रहलाद, पटना. वैशाख के इस महीने में अगलगी की घटनाओं से पूरा प्रदेश बेहाल है. राजधानी के पॉश इलाके से लेकर दूर-दराज के गांवों में अगलगी से जान-माल को भारी नुकसान हो रहा है. सैकड़ों एकड़ में लगी गेहूं की पसल नष्ट हो गयी है. अगलगी से संपन्न लोगों से लेकर रोजाना मजदूरी कर पेट भरने वाले लोग भी पीड़ित हो रहे हैं. भविष्य के लिए संजो कर रखे नकद रुपये भी जल कर खाक हो जा रहे हैं. परेशानी यह कि अभी भी कई पुलिस थाने और प्रखंड मुख्यालयों में अगलगी रोकने को अग्निशमन गाड़ी उपलब्ध नहीं है.
आपदा प्रबंधन विभाग ने गर्मी के दौरान अगलगी की बढ़ी घटना की रोकथाम के लिए सभी डीएम व विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रधान सचिव को अलर्ट किया है. विभाग ने अग्निकांड से बचाव के लिए जिलों में आपातकालीन नंबर को जारी करने का दिशा-निर्देश भी दिया है, जिसके बाद जिलों में नंबर जारी करना शुरू कर दिया है. साथ ही, फायर बिग्रेड की गाड़ी एवं अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर समय पर घटनास्थल पर पहुंच कर राहत कार्य को पूरा करने को कहा गया है.
राज्य में गर्मी बढ़ने के साथ ही आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं. ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ग्रामीण इलाकों में फायर बूथ बनाया जायेगा. इसको लेकर आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलों और पंचायती राज विभाग को पत्र भेजा है, ताकि अगलगी की घटना को तुरंत रोका जा सके. विभाग ने पत्र में कहा है कि फायर बूथ की स्थापना के बाद ग्रामीण इलाकों के लोगों को राहत मिलेगी. वहीं, सभी जिलों को राहत-बचाव के लिए जागरूकता अभियान भी चलाने का निर्देश दिया गया है.
ग्रामीण क्षेत्रों में फायर बूथों का निर्माण प्रत्येक गांव के स्तर पर होगा. जिसमें फायर बीटर्स , फायर टैंक, बाल्टी, रस्सी, कुल्हाड़ी सहित छोटे-छोटे अग्निशमन उपकरण रहेंगे.सार्वजनिक स्थल पर रखवाने की व्यवस्था पंचायत की मदद से होगी. जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों की मदद गांव के लोग करेंगे. इसमें युवाओं को जोड़ा जायेगा, ताकि राहत कार्य को शुरू करने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी.
राज्य के ऐसे बहुत से जिलों में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को पहुंचने में काफी दिक्कत होती है. ऐसे ग्रामीण इलाकों को चिन्हित करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी और उन इलाके में आग बुझाने को लेकर अलग से तैयारी की जायेगी. इसके लिए अनुमंडल मुख्यालय , थानों में भी गाड़ियों को रखने की व्यवस्था की जायेगी. खासकर जहां के क्षेत्रों का रास्ता दुर्गम होगा.
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हवा के झोंको के तेज होने के पहले ही खाना पकाकर चूल्हे की आग को पानी से पूरी तरह बुझा लें.
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चूल्हे की आग की चिंगारी पूरी तरह बुझी हो, इसे सुनिश्चित कर लें.
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घर से बाहर जाते समय बिजली का स्विच ऑफ करें.
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बीड़ी , सिगरेट पीकर इधर-उधर या खलिहान की तरफ नहीं फेंके.
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गांव, मोहल्लों में जल एवं बालू संग्रहण की व्यवस्था रखें, ताकि आग पर शीघ्र काबू पाया जा सकें.
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आगजनी से बचाव के लिए उपाय क्या करें और क्या नहीं करें, इस संबंध में लोगों को जागरूक करें.
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आपदा विभाग के 0612-2294204 एवं 2294205 नंबर को जारी करें.
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घायलों के इलाज, मृतकों के आश्रितों को अनुग्रह का तुरंत भुगतान करें. जले एवं क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वेक्षण कर फोटोग्राफी कर अनुदान का भुगतान करें.
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भीषण अग्निकांड से प्रभावित क्षेत्रों में विशेष राहत केंद्र का संचालन किया जाये.
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आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि गर्मी के मौसम में अगलगी की घटनाएं बढ़ जाती हैं. ऐसे में आपदा विभाग की ओर से एसओपी के मुताबिक जिलों को अलर्ट भेज दिया गया है. जिलों में अगलगी की घटनाओं की रोकथाम के लिए पूर्व में किये गये कार्यों को देखने से ही वर्तमान में काम करना आसान होगा. ऐसे में सभी जिलों में अधिकारियों की टीम बनाने का निर्देश एसओपी में है. इन बिुदुओं पर काम करने और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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