BPSC परीक्षा पास करने का मंत्र, एक तरीका जिससे कई छात्रों को मिला टॉप रैंक, जानिये क्या हैं सलाह...

66th bpsc final result: बीपीएससी ने 66वीं संयुक्त परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी कर दिया है. बीपीएससी की तैयारी कर रहे छात्रों को सफल छात्रों से जरुर जानने चाहिए की बीपीएससी की तैयारी कैसे करें.
66th Bpsc Final Result: 66वीं बीपीएससी परीक्षा का रिजल्ट आयोग ने जारी कर दिया है. बिहार सरकार को अब 685 नये अधिकारी मिल गये हैं. सफल छात्रों की सूची में सबसे ऊपर वैशाली के सुधीर कुमार रहे जिन्होंने इस बार टॉप किया है. वहीं टॉप रैंक हासिल करने वाले कई छात्र ऐसे हैं जो गांव व कस्बों से ही आते हैं. किसी के पिता किसान हैं तो किसी के पिता दुकान चलाते हैं. तो किसी की मां आंगनबाड़ी सेविका. लेकिन उनके बच्चों ने बाजी मारकर ये साबित कर दिया कि सफलता का एक ही मंत्र हैं और वो है मेहनत. सफल होने के लिए कोई शॉर्टकट नहीं होता.
किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने के लिए अभ्यर्थी अपने-अपने तरीके आजमाते हैं. किसी को सफलता मिलती है तो कोई इससे वंचित रह जाता है. लेकिन बीपीएससी जैसी परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को आगे बढ़ने के दौरान सफल छात्रों के दिये सुझाव से भी रुबरु होना चाहिए.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 66वीं बीपीएससी के टॉपर सुधीर कुमार बताते हैं कि इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने दिल्ली में सेल्फ स्टडी ही की. गाइड के बदले एनसीईआरटी और स्टैंडर्ड किताबों पर फोकस देने का वो सुझाव देते हैं.
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10वीं रैंक लाने वाले अरवल जिला निवासी अमर्त्य कुमार आदर्श बेहद साधारण परिवार से आते हैं. सरकारी स्कूल में पढ़ाई करके ओपन यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हुए. बताया कि वायुसेना में साढ़े 9 साल सेवा देकर बिहार वित्त सेवा में चयनीत हुए. उसके बाद 2016 में दिल्ली जाकर तैयारी की. उन्होंने कोचिंग के बदले सेल्फ स्टडी ही किया और अब अधिकारी बन गये.
पूर्वी चंपारण के सदानंद कुमार को 66वीं बीपीएससी में आठवां रैंक मिला है. वो इंजीनियरिंग करने के बाद तैयारी में जुट गये. उन्होंने पूर्णिया में छात्रों को भी पढ़ाया. खुद 6 से 8 घंटे पढ़ाई भी की. बताया की अगर बीपीएससी की तैयारी कर रहे हैं तो सेल्फ स्टडी अधिक जरुरी है. सदानंद कुमार के पिता किसान हैं. जमालपुर के विनय कुमार को सातवां रैंक मिला है और वो पटना में कोचिंग चलाते हैं. कहते हैं कि बच्चों को पढ़ाते-पढ़ाते ही खुद भी अधिकारी बन गये.
Published By: Thakur Shaktilochan
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