बिहार की इस सीट पर लिटरेसी रेट 80% से ज्यादा, राजनीति फिर भी जातिगत समीकरण के इर्द-गिर्द
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 13 Jul 2025 4:14 PM
Sasaram Vidhan Sabha: सोलहवीं शताब्दी में जब शेर शाह सूरी ने हुमायूं को हराकर सत्ता संभाली, तब सासाराम न सिर्फ सूर वंश की राजधानी बना, बल्कि भारतीय इतिहास में एक अध्याय भी जुड़ गया. शेर शाह सूरी की प्रशासनिक दूरदृष्टि- जिसमें कर सुधार, डाक व्यवस्था की शुरुआत और ग्रैंड ट्रंक रोड जैसे बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है. इसका उदाहरण आज भी दिया जाता है.
Sasaram Vidhan Sabha: सासाराम बिहार के रोहतास जिले का मुख्यालय है. इसे 1972 में शाहाबाद जिले के विभाजन के बाद स्थापित किया गया था. यहां की साक्षरता दर 80.26% है, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं ऊपर है, फिर भी इसकी राजनीति जातिगत समीकरणों के इर्द-गिर्द ही घूमती रही है.
35 साल लगातार एक जाति से विधायक
जातिगत मतदान व्यवहार की एक बड़ी मिसाल सासाराम में 1980 से 2015 के बीच दिखती है, जहां लगातार कुशवाहा समुदाय के नेताओं को ही जीत हासिल होती रही. दिलचस्प बात यह है कि विपक्ष के उम्मीदवार भी अक्सर इसी समुदाय से रहे हैं, जो दर्शाता है कि यहां जातीय पहचान दलों और विचारधाराओं से ज्यादा प्रभावशाली रही है.
सासाराम विधानसभा का इतिहास
1957 में स्थापित इस विधानसभा क्षेत्र में अब तक 17 चुनाव हो चुके हैं. इनमें समाजवादी धारा की पार्टियों ने अलग-अलग नामों से 10 बार जीत दर्ज की है, भाजपा 5 बार और कांग्रेस केवल 2 बार जीत सकी है. कांग्रेस कभी भी इस क्षेत्र में मज़बूत आधार नहीं बना सकी.
समीकरण
सासाराम विधानसभा क्षेत्र, सासाराम लोकसभा सीट का हिस्सा है, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. यह लोकसभा क्षेत्र कुल छह विधानसभा क्षेत्रों में बंटा है- तीन रोहतास और तीन कैमूर जिले में स्थित है.
यहां अनुसूचित जाति के मतदाता 17.55% और मुस्लिम मतदाता 15.20% हैं, जो चुनाव परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित करते हैं. साथ ही, यहां 66.70% मतदाता ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं जबकि 33.31% शहरी मतदाता हैं. 1 जनवरी 2024 तक, सासाराम विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 3,57,849 थी, जिसमें नए अपडेट के बाद कुछ बढ़ोतरी हो सकती है.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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